Monday, 14 August 2017

15 वर्ष से अटका कुर्ला सबवे दिवाली के पूर्व शुरु होगा

बहुप्रतिक्षित कुर्ला पूर्व और पश्चिम को जोड़नेवाला ऐसा कुर्ला सबवेे का काम लगभग पूर्ण हुआ है औए दीवाली के पहले आम लोगों के लिए खुलेगा। मध्य रेलवे ने  3.84 करोड़ अबतक खर्च किया हैं वहीं मध्य रेलवे ने 2.11 करोड़ और मनपा 2.94 करोड़ ऐसे कुल मिलाकर  5.05 करोड़ खर्च किए हैं।

 

कुर्ला सबवेे का काम यह पिछले 15 वर्षो से प्रलंबित हैं। मनपा और मध्य रेलवे में आपसी समन्वय न होने के चलते काम अटक गया था। मनपा के मुख्य अभियंता एस ओ कोरी ने बताया कि कुर्ला सबवे की कुल लंबाई 129.90 मीटर, चौड़ाई 7.60 मीटर और उंचाई 2.60 मीटर इतनी हैं। मनपा ने सिर्फ पश्चिमी छोर का अप्रोच रोड़ का काम किया हैं जिसका कुल  खर्च रु. 2 करोड़ 94 लाख 88 हजार 383 हैं।  यह काम करने के लिए मे.जे.एल.कंस्ट्रक्शन कंपनी की नियुक्ती की गई हैं। काम शुरु करने की तारीख 15 फरवरी 2016 थी।  अबतक रेलवे प्रशासन ने रु. 3 करोड़ 84 लाख 43 हजार रकम खर्च की हैं।  सोलापूर की मेसर्स महेश रुपचंदाणी कंपनी ने दिनांक 21 अक्तूबर 2014 को काम शुरु किया था।  इसका काम मध्य और हार्बर रेलवे की पटरियों से तले हो रहा हैं।

अनिल गलगली के अनुसार करोड़ों का खर्च करने के बाद भी पिछले 15 वर्षों से कुर्ला सबवे शुरु नहीं हो पाया हैं। कुर्ला सबवे शुरु होते ही उसका लाभ हजारों पैदल चलनेवाले नागरिकों को तो होगा ही साथ ही में रेलवे की दुर्घटना की संख्या में गिरावट आने में मदद होगी, ऐसा विश्वास अनिल गलगली ने व्यक्त किया हैं।

15 वर्षे रखडलेला कुर्ला सबवे दिवाळी पूर्व सुरु होणार

बहुप्रतिक्षित असा कुर्ला पूर्व आणि पश्चिमेला जोडणारा असा कुर्ला सबवे चे काम जवळपास पूर्ण झाले असून दिवाळीच्या आधी तो नागरिकांसाठी सुरु होईल. मध्य रेल्वेने 3.84 कोटी आतापर्यंत खर्च केले असून आता मध्य रेल्वे 2.11 कोटी आणि पालिका 2.94 कोटी असे 5.05 कोटी खर्च केले आहे.

कुर्ल्याचा सबवे चे काम हे गेल्या 14 वर्षापासून प्रलंबित आहे. पालिका आणि मध्य रेल्वेच्या समन्वयाच्या अभावी काम रखडलेले होते. आरटीआय कार्यकर्ते अनिल गलगली यांनी सतत केलेल्या पाठपुराव्यानंतर कुर्ला सबवे जवळपास पूर्ण झाला आहे. पालिकेचे मुख्य अभियंता एस ओ कोरी यांनी कळविले की सबवेची एकूण लांबी 129.90 मीटर, रुंदी 7.60 मीटर आणि उंची 2.60 मीटर इतकी आहे.  पालिकेने फक्त पश्चिमेकडील पोहोचमार्गाचे काम केले असून त्याचा एकूण खर्च रु. 2 कोटी 94 लाख 88 हजार 383 झाला आहे. हे काम करण्यासाठी मे.जे.एल.कंस्ट्रक्शन कंपनीची नेमणूक करण्यात आली होती. काम 15 फेब्रुवारी 2016 रोजी सुरु झाले असून कामाचा कालावधी 9 महिन्याचा (पावसाळा वगळून) होता. आतापर्यंत रेल्वेने रु. 3 कोटी 84 लाख 43 हजार रक्कम खर्च केले आहे.  सोलापूर येथील मेसर्स महेश रुपचंदाणी ने दिनांक 21 ऑक्टोबर 2014 रोजी काम सुरु झाले होते. सबवे चे काम मध्य आणि हार्बर रेल्वेच्या खालील भागात होत आहे.

अनिल गलगली यांच्या मते कोटयावधीचा खर्च करुनही गेल्या 15 वर्षापासून कुर्ला सबवे सुरु होऊ शकला नाही. कुर्ला सबवे सुरु होताच याचा लाभ हजारों पादचा-यांस होईल आणि रेल्वे दुर्घटनेत घट होण्यास मदत मिळेल, असा विश्वास अनिल गलगली यांनी व्यक्त केला.

Delayed by 15 years, Kurla Subway to be ready for use before Diwali

Construction of Subway passing underneath Kurla station work almost completed. Delayed by 15 years, Kurla Subway to be ready for use before Diwali.

RTI Activist Anil Galgali continue follow-up with this issue and now Kurla Subway work fully completed. This time Railway and Mumbai Municipal Corporation have teamed up to finish the indefinitely delayed Project, Entailing a fresh cost Rs 5.05 crores. On completion this subway will provide a much needed link between the East & West side to one of the busiest suburban thoroughfares in Mumbai.

M/s  Mahesh Roopchandani of Solapur have been awarded the contract of construction by the Railways. Central Railway is to provide an additional fund of Rs 2.11 crores for completion of the project. On 21 October 2014 work starts by Contractor.  Central Railway had earlier spent Rs 3.84 crores on 129.9 metre on construction of a tunnel running under Main and Harbour Railway lines. This 7.60 metre wide tunnel with a height of 2.6 metres was constructed years ago, lay incomplete.

BMC had been entrusted the responsibility of construction of approach road to the western side of Subway, which alone would cost Rs 2.94 crores. Work has already officially begun on February 2016 and almost completed, said S O Kori, Chief Engineer of MCGM.

"This uncompleted project had proved to be stupendous waste of resources, not put to use even after having spend Crores. I hope it will be completed now providing relief to common public, Also bringing down figures of deaths occurring during crossing of rail tracks", Galgali said.

Friday, 11 August 2017

मुंबई के किसानों की लिस्ट सरकार के पास नहीं

छ्त्रपती शिवाजी महाराज किसान सम्मान योजना अंतर्गत मुंबई शहर और मुंबई उपनगर स्थित किसानों की नाम के साथ वाली लिस्ट सरकार के रेकॉर्ड न होने का चौंकाने वाला क़बूलनामा महाराष्ट्र सरकार ने आरटीआई कार्यकर्ता अनिल गलगली को उपलब्ध कराई हुई जानकारी में किया हैं। मुंबई में 813 किसान होने की जानकारी मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने जाहीर करने के बाद सभी स्तर से आश्चर्य व्यक्त हुआ था। 

आरटीआई कार्यकर्ता अनिल गलगली ने महाराष्ट्र सरकार से छ्त्रपती शिवाजी महाराज किसान सम्मान योजना अंतर्गत मुंबई शहर और मुंबई उपनगर स्थित किसानों की नाम वाली लिस्ट मांगी थी।  महाराष्ट्र सरकार के सहकार मार्केटिंग और वस्त्रोद्योग विभाग के जन सूचना अधिकारी दि. म. राणे ने अनिल गलगली को बताया कि राज्यस्तरीय बँकर्स समिती से सरकार को जानकारी  प्राप्त थी। उसी के तहत मुंबई शहर में 694 किसानों के पास बकाया कर्ज रु 45.04 करोड़ और मुंबई उपनगर में 119 किसानों के पास बकाया  कर्ज रु 0.12 होने की जानकारी मोटे तौर पर बताई गई थी।  मुंबई शहर और मुंबई उपनगर स्थित किसानों की नाम वाली लिस्ट सरकार के रेकॉर्ड पर उपलब्ध नहीं हैं। यह जानकारी संबंधित बैंकों के पास उपलब्ध हैं।

राज्य सरकार ने किसानो की कर्जमाफी निर्णय लेने के बाद सभी किसानों की लिस्ट सार्वजनिक की थी। इसी दौरान मुंबई में किसान होने को लेकर उसे लेकर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सवाल करते हुए जांच कर कर्जमाफी देने का स्पष्टीकरण मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने किया था। अनिल गलगली के अनुसार सरकार के पास लिस्ट ही न होते हुए मोटे तौर पर उपलब्ध जानकारी मुख्यमंत्री को देना, यह प्रशासकीय कामकाज के नजरिए गंभीर मामला हैं। 

मुंबईतील शेतकऱ्यांची नावासहित यादी शासनाकडे नाही

छ्त्रपती शिवाजी महाराज शेतकरी सम्मान योजना अंतर्गत मुंबई शहर आणि मुंबई उपनगर येथील शेतकऱ्यांची नावासहित यादी शासनास्तरावरील अभिलेखात उपलब्ध नसल्याची धक्कादायक कबूली आरटीआय कार्यकर्ते अनिल गलगली यांस महाराष्ट्र शासनाने दिली आहे. मुंबईत 813 शेतकरी असल्याची आकडेवारी मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस यांनी जाहीर केल्यानंतर सर्वत्र आश्चर्य व्यक्त झाले होते.

आरटीआय कार्यकर्ते अनिल गलगली यांनी महाराष्ट्र शासनाकडे छ्त्रपती शिवाजी महाराज शेतकरी सम्मान योजना अंतर्गत मुंबई शहर आणि मुंबई उपनगर येथील शेतकऱ्यांची नावासहित यादी मागितली होती. महाराष्ट्र शासनाच्या सहकार पणन व वस्त्रोद्योग विभागाचे जन माहिती अधिकारी दि. म. राणे यांनी अनिल गलगली यांस कळविले की राज्यस्तरीय बँकर्स समितीकडून शासनाकडे माहिती प्राप्त होते. त्यानुसार मुंबई शहर येथे 694 शेतकऱ्यांकडे थकीत कर्ज रु 45.04 कोटी व मुंबई उपनगर येथे 119 शेतकऱ्यांकडे थकीत कर्ज रु 0.12 कोटी असल्याने ढोबळमानाने कळविण्यात आले होते. मुंबई शहर आणि मुंबई उपनगर येथील शेतकऱ्यांची नावासहित यादी शासनास्तरावरील अभिलेखात उपलब्ध नाही. सदरची माहिती संबंधित बँकांकडे उपलब्ध आहे.

राज्य सरकारने शेतकऱ्यांच्या कर्जमाफीचा निर्णय घेतल्यानंतर सर्व शेतकऱ्यांची यादी नुकतीच जाहीर करण्यात आली. दरम्यान, मुंबईत शेतकरी आहेत का, असा प्रश्न मलाही पडला होता. मी तसे अधिकाऱ्यांना विचारलेही. मात्र चौकशी करुनच कर्जमाफी दिली जाणार असल्याचे स्पष्टीकरण मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस यांनी दिले होते. अनिल गलगली यांच्या मते शासनास्तरावर यादीच नसतानाही ढोबळमानाने आलेल्या माहितीची शहानिशा न करता मुख्यमंत्र्यांस सादर करण्यात आली होती, ही बाब प्रशासकीय दृष्टीकोणातून फारच गंभीर आहे.

No records of the Mumbai Farmers with Govt

In a shocking information provided to RTI Activist Anil Galgali, the government has confirmed that it does not have records of the names of the Farmers covered under the Chattrapati Shivaji Maharaj Farmers Welfare scheme in Mumbai city and Mumbai suburbs. The declaration by CM Devendra Fadnavis that 813 farmers belonging to Mumbai were included in the Farmers loan waiver scheme had surprised everyone.

RTI Activist Anil Galgali had sought information from the government seeking details along with names of the Mumbai Farmers figuring as beneficiaries of the loan waiver scheme under the Chattrapati Shivaji Maharaj Farmers Welfare scheme. Shri D M Rane, Public Information Officer of the Maharashtra Govts, Cooperation, Marketing and Textiles department informed Galgali that, the govt receives information from the State level Bankers Committee and according to that information, 694 Farmers from Mumbai city have outstanding loans amounting to Rs 45.04 crores and 119 farmers from Mumbai Suburbs have a outstanding loans amounting to Rs 0.12 crores in the basis of assumption. The government does not have the list of farmers with their names and the list is with the bankers.

The State government which had announced the loan waiver scheme for farmers had recently released the list of names of the beneficiaries. I too had apprehension about the presence of farmers in Mumbai, hence I sought the information from the government. CM Devendra Fadnavis had announced and assured that the loan waiver will be given only after detailed inquiry and cross check. The government doesn't have any list on its records and without cross verification and due diligence by the authorities, CM Devendra Fadnavis was given the data on  assumption is a very serious lapse in the administration front, expressed Anil Galgali.

Saturday, 5 August 2017

रोजाना 7 पेड़ों को कांटने की अनुमति देती हैं मनपा

महाराष्ट्र सरकार 4 करोड़ पेड़ लगाने का संकल्प लेकर मैदान में तो उतरी हैं लेकिन मुंबई जैसे शहर में रोजाना 7 पेड़ों को अधिकृत तौर पर कांटने की अनुमति स्वयं मनपा द्वारा देने का खुलासा आरटीआई कार्यकर्ता अनिल गलगली को गार्डन विभाग ने मुहैय्या कराए दस्तावेजों से हो रहा हैं।

आरटीआई कार्यकर्ता अनिल गलगली ने गार्डन विभाग से गत 3 वर्षों में मनपा द्वारा पेड़ों की कटाई की अनुमति की जानकारी मांगी थी। गार्डन विभाग उप अधीक्षक ने अनिल गलगली को वर्ष 2014, वर्ष 2015 और वर्ष 2016 में काटे गए, पुर्नरोपित और बरकरार रखे पेड़ों की संख्या दी। गत 3 वर्षों में कुल 7842 पेड़ कांटे गए। 13070 पेड़ पुर्नरोपित किए गए और 28787 पेड़ बरकरार रखे गए हैं। 3 वर्षों में सर्वाधिक 3819 पेड़ वर्ष 2016 में काटे गए, इनमें 1830 निजी, 1448 सरकार और 541 मनपा ने विभिन्न कामों के लिए तोड़ दिए। उसके बाद 2720 पेड़ वर्ष 2015 और 1303 पेड़ वर्ष 2014 में काटे गए। मनपा का दावा हैं कि 3 वर्षो में कुल 13070 पेड़ पुर्नरोपित किए गए जिनमें वर्ष 2015 सर्वाधिक 5054 पेड़ निजी, सरकार और मनपा ने पुर्नरोपित किए। वर्ष 2016 में यह आंकड़ा घटकर 3770 हुआ हैं। मनपा और एक दावा किया हैं कि गत 3 वर्षों में कुल 49060 वृक्षारोपण हुआ हैं। वर्ष 2014 में 14253 की संख्या बढ़कर वर्ष 2015 में 16157 हुई और वर्ष 2016 में इसमें इज़ाफ़ा होते हुए यह संख्या 18650 तक जा पहुंची हैं। 

अनिल गलगली का मानना हैं कि हर कोई विकास के नाम पर पेड़ काटने में अधिक रुचि रखता हैं। मनपा की वृक्ष प्राधिकरण कमिटी जब चाहे जिसे भी इसकी अनुमति देने से आंकड़ों में इजाफा हो रहा हैं जो अप्रत्यक्ष ग्रीन मुंबई के अभियान के लिए घातक हैं। इसलिए जिस इलाके के पेड़ काटने को लेकर आवेदन आते ही जब निरीक्षण किया जाता हैं तो स्थानीय लोगों को आमंत्रित कर निर्णय लिया जाए ताकि बेफिजूल काटे जानेवाले पेड़ों को बचाया जा सकता हैं।

रोज 7 झाडांना कापण्याची परवानगी देते मुंबई महानगरपालिका

महाराष्ट्र शासन 4 कोटी झाडे लावण्याचा विक्रम करण्यासाठी मैदानात उतरली असताना मुंबई महानगरपालिका दररोज 7 झाडांना कापण्याची परवानगी देण्याची धक्कादायक माहिती आरटीआय कार्यकर्ते अनिल गलगली यांस पालिकेच्या उद्यान खात्याने दिली आहे.

आरटीआय कार्यकर्ते  अनिल गलगली यांनी पालिकेच्या उद्यान खात्यास गेल्या  3 वर्षात पालिकेने झाडे कापण्यासाठी दिलेल्या परवानगीची माहिती मागितली होती. पालिकेच्या उद्यान उप अधीक्षक यांनी अनिल गलगली यांस वर्ष 2014, वर्ष 2015 आणि वर्ष 2016 या वर्षात कापली गेलेली झाडे, पुर्नरोपित आणि राखलेली झाडांची संख्या दिली आहे. गेल्या 3 वर्षात एकूण 7842 झाडे कापली गेली. 13070 झाडे पुर्नरोपित केली गेली तर 28787 झाडे राखली गेली. 3 वर्षात सर्वात जास्त 3819 झाडे वर्ष 2016 या वर्षात कापली गेली. यात  1830 खाजगी , 1448 शासन आणि2 541 पालिकेने विविध कामासाठी कापली आहे. त्यानंतर 2720 झाडे वर्ष 2015 आणि 1303 झाडे वर्ष 2014 कापली गेली. पालिकेने दावा केला आहे की 3 वर्षात एकूण 13070 झाडे पुर्नरोपित केली गेली. वर्ष 2015 या वर्षात सर्वात जास्त 5054 झाडे खाजगी , शासन आणि पालिकेने पुर्नरोपित केली आहे. वर्ष 2016 या वर्षात ही संख्या कमी होत 3770 इतकी झाली आहे. पालिकेने अजून एक दावा केला आहे की गेल्या 3 वर्षात एकूण 49060 झाडांचे वृक्षारोपण केले आहे.  वर्ष 2014 मधील 14253 ही संख्या वाढत वर्ष 2015 या वर्षात 16157 झाली तर वर्ष 2016 या वर्षात ही संख्या वाढत 18650 पर्यंत झाली आहे.

अनिल गलगली यांच्या मते विकासाच्या नावाखाली सर्वच झाडे तोडण्याच्या कामात जास्त रस घेतात. पालिकेची वृक्ष प्राधिकरण समिती जेव्हा मनात येईल तेव्हा झाडे कापण्याची परवानगी देत असल्यामुळे अप्रत्यक्ष ग्रीन मुंबई चळवळीस ही बाब घातक आहे. त्यासाठी जेव्हा झाडे तोडण्यासाठी अर्ज येईल तेव्हा समितीच्या बरोबर स्थानिक नागरिकांना निरीक्षणासाठी आमंत्रित करावे जेणेकरुन विनाकारण झाडे तोडण्याचा प्रकार बंद होईल.

Tree cutting permission issued by BMC is 7 trees per day

At a time when the Maharashtra govt has taken up a task of planting 4 crore trees, the BMC shockingly issues permission to cut down 7 trees daily as per the information provided by the BMC's Garden department to RTI Activist Anil Galgali.

An RTI file by RTI Activist Anil Galgali shows that Garden department of the BMC gave its permission to cut 7,842 trees in the last three years in the year 2014, 2015 and 2016. According to the figures, seven trees were permitted each day to cut," said Galgali referring to the figure.

Galgali also added most of the 3819 trees were hacked in the last year 2016 itself that included 1830 trees were from the private people, 1448 trees belonged the government intities while BMC itself hacked 541 tree owing to different reasons including paving the way for infrastructural  activities.

Reply furnished from the Deputy Superintendent of the Garden Department, has also claimed that apart from cutting 7842 trees in the last three years, BMC also transplanted 13070 trees during the same period. Besides, BMC conducted several tree plantation drives throughout the year in which it planted 49060 saplings in the correspondence year. In the year 2014, BMC planted 14253 saplings, 16157 saplings in 2015 and 18650 saplings were planted in the 2016," says RTI.    

Terming the process of permitting the tree cuttings, Galgali said that the time has come when tree authority should devise a proper mechanism with people's involvement to protect the greenery of the city and to protect the lives of the citizens of the city.

He said, "Cutting the trees in the name of development is avoidable and tree authority need to be made answerable for this. The proper machenism would be to call the people of the adjoining places and to hear their voice too." 

Wednesday, 2 August 2017

शौचालय ब्लॉक की मरम्मत कार्य में 214 करोड़ का घोटाला

शौचालयों की मरम्मत के लिए 214 करोड़ रुपये का घोटाला हुआ हैं जबकि इतने ही पैसे में मुंबई में शौचालय की 12022 नई सीटें तैयार की जा सकती थी।  90% मामलों में, वास्तविक काम की लागत लागत अनुमान के बराबर है। यह जानकारी वाली रिपोर्ट आरटीआई कार्यकर्ता अनिल गलगली को प्राप्त हुई हैं। ताज्जुब की बात यह भी हैं कि मनपा और म्हाडा प्रशासन ने एक ही शौचालय की मरम्मत पर पैसे खर्च करने का सनसनीखेज खुलासा रिपोर्ट में हैं।  

आरटीआई कार्यकर्ता अनिल गलगली ने बीएमसी के SWM विभाग से यह जानकारी भी प्राप्त की। SWM विभाग की एक रिपोर्ट है जो कि पहले आवश्यक कार्रवाई के लिए नगर निगम आयुक्त अजय मेहता को भेजी जा चुकी हैं। 11 पृष्ठों की रिपोर्ट में कई चौंकाने वाले तथ्य हैं।  नए सीट के निर्माण पर केवल 1,78,000 रुपए की लागत अनुमानित होती हैं जबकि कुछ शौचालय में एक सीट पर 3 से 10 लाख की लागत का खर्च बताया गया है। कुछ मामलों में शौचालय एसी छत की होते हुए टेरेस स्लैब पर वॉटर प्रूफिंग की गई हैं।

दिलचस्प बात यह है इन शौचालयों भी म्हाडा द्वारा मरम्मत करने के बाद भी मुंबई में शौचालयों की गुणवत्ता में सुधार नहीं आ रहा है। मुंबई स्वच्छ भारत रैंकिंग में 10 से 29 नंबर पर आने के पीछे यहीं कारण मुख्य माना जाता हैं। दोषपूर्ण सैप प्रणाली और 1 वर्ष के दोष दायित्व अवधि में मरम्मत का नियम से क्वॉलिटी में गिरावट आती हैं। लेखा विभाग द्वारा वित्तीय कुप्रबंधन के रूप में शौचालय की मरम्मत कई बजट प्रावधानों है, सैप के दुरुपयोग और दोष दायित्व अवधि का केवल एक साल भी घोटाला करने के लिए जिम्मेदार होने का दावा अनिल गलगली ने किया हैं।

अनिल गलगली एक वर्ष के दोष दायित्व अवधि वाले  वार्ड कार्यालयों में हुए सभी कार्यों की जांच का आदेश देने और बीएमसी में एक 'शौचालय नियामक प्राधिकरण' का गठन करने की मांग वाला पत्र मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को भेजा हैं ताकि मुंबई में 10000 शौचालय निर्माण और मरम्मत का कार्य ठीक ढंग से हो सके। इंजीनियर और ठेकेदार, लेखा अधिकारी और वार्ड अधिकारियों की मिलीभगत की जांच होती हैं तो एक बड़े पैमाने पर हुए 5000 करोड़ रुपए भ्रष्टाचार की पोल खोल हो सकती हैं। 

शौचालय ब्लॉकच्या दुरुस्तीच्या कामात 214 कोटी रुपयांचा घोटाळा 

शौचालय ब्लॉकच्या दुरुस्तीसाठी 214 कोटी रुपयांचा घोटाळा झाला असून इतक्या पैश्यांत मुंबईमध्ये 12022 आसनांची शौचालये बनविणे शक्य होते तर 90% कामामध्ये प्रत्यक्ष कामाचा खर्च हा अंदाजित खर्चा इतकाच असल्याची माहिती आरटीआय कार्यकर्ते अनिल गलगली यांस उपलब्ध केलेल्या अहवालात आहे. विशेष म्हणजे पालिका आणि म्हाडाने एकाच शौचालयाच्या दुरुस्तीवर खर्च केल्याचे अहवालात स्पष्ट केले आहे.

आरटीआय कार्यकर्ते अनिल गलगली यांनी पालिकेच्या एसडब्ल्यूएम विभागातील ही माहिती प्राप्त केली आहे. एसडब्ल्यूएम विभागाने एक अहवाल तयार केला होता जो आवश्यक ती कार्यवाही करण्यासाठी आयुक्त अजय मेहता यांना पाठविला होता. 11 पृष्ठांच्या या अहवालात स्पष्ट केले आहे की, नवीन आसन बांधणीची किंमत केवळ 1,78,000 रुपये असतानाच शौचालयातील आसन रुपये 3 ते 10 लाखांच्या दराने दुरुस्ती केले गेले आहे. काही शौचालयात तर शौचालयं एसी छत असताना टेरेस स्लॅबमध्ये वॉटरप्रूफिंग केली गेली आहे.

विशेष म्हणजे ज्या शौचालयांची दुरुस्ती म्हाडाने केली आहे त्यानंतरही मुंबईतील शौचालयांची गुणवत्ता सुधारली नाही. प्रामुख्याने मुंबईतील नागरिक मुंबई महानगर पालिकेतर्फे स्वच्छतेवर केल्या जाणाऱ्या खर्चात होणा-या भ्रष्टाचारास वैतागले असून नागरिकांच्या अभिप्रायामुळेच मुंबईची स्वच्छ भारत रँकिंगची संख्या 10 वरुन 29 वर आली आहे. दोषरहित सॅप यंत्रणा आणि 1 वर्षाच्या दोष उत्तरदायित्व देण्याच्या मुदतीमुळे दुरुस्त्या करताना कंत्राटदार अधिका-यांच्या संगनमताने धूळफेक करतो असा आरोप अनिल गलगली यांनी केला आहे. आर्थिक गैरव्यवस्थेमुळे लेखा विभागामार्फत शौचालयांसाठी वेगवेगळया अर्थसंकल्पीय तरतूद, सॅपचा गैरवापर आणि दोष उत्तरदायित्व कालावधी केवळ एक वर्ष असल्यामुळे शौचालय बांधणीत मोठ्या प्रमाणात भ्रष्टाचार होत आहे.

अनिल गलगली यांनी मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस यांना पत्र पाठवून एक वर्षांच्या दोष उत्तरदायित्व कालावधीतील प्रभाग कार्यालयातील सर्व कामांची चौकशी करण्याचे आणि 10,000 शौचालय बांधकाम आणि दुरुस्तीची देखभाल करण्यासाठी मुंबई महानगरपालिकेमध्ये 'शौचालय नियामक प्राधिकरण' स्थापन करण्याचे आदेश देण्याची मागणी केली आहे. शौचालय बांधकाम आणि दुरुस्तीची चौकशी झाल्यास अभियंते व ठेकेदार, लेखा अधिकारी आणि प्रभाग अधिकारी यांच्यात संगनमत उघडकीस येऊ शकते ज्याची व्याप्ती ही 5,000 कोटी रुपयांची आहे.

₹ 214 crores scam on repairs to toilet blocks in Bmc

A scam of Rs 214 crores on repairs to toilet blocks in which amount 12022 new seats of toilets could have been constructed in Mumbai has been revealed by RTI Activist Anil Galgali.  In 90% cases, cost of actual work is equal to cost estimates. 

RTI Activist Anil Galgali has obtained this information from the SWM department of BMC. SWM Department provide a report which earlier send to Municipal Commissioner Ajoy Mehta for necessary action. 11 pages report States that some seats in toilets are repaired at the cost of 3 to 10 lacs when the new construction costs Rs1,78,000 only. In few cases, Waterproofing is done to terrace slabs when the toilets are sloping AC roof type.

Interestingly these toilets are repaired by MHADA also, but the quality of toilets in Mumbai has never improved. MumbaI's Swachh Bharat ranking has dropped to 29 from 10 six months ago mainly due to feedback from the citizens showing that the citizen of Mumbai are not happy with the corruption in BMC in spending on cleanliness. Faulty SAP system and 1 year defect liability period helps to allow repairs to be a pure hogwash. Financial mismanagement by accounts department as toilets have many budget provisions, misuse of SAP and only one year of Defect Liability period is also revealed to lead to scam, said Galgali. 

Anil Galgali has sent a letter to Chief Minister Devendra Fadnavis to order an enquiry into all works in ward offices with one year defect liability period and to appoint a Toilet Regulatory Authority in BMC to look after 10000 toilets construction and repairs. This can prove nexus between Engineers and Contractors, Accounts Officers and Ward officers indicating that their could be a massive 5000 crores corruption possible, if investigated, said Galgali.

Sunday, 30 July 2017

पांडुरंग फुंडकर नंबर वन दांडीबहाद्दुर

महाराष्ट्र की फडणवीस सरकार के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को छोड़ा जाए तो सभी मंत्रियों ने मंत्रिमंडल की बैठक में शतप्रतिशत उपस्थिती दर्ज नही की है। कृषिमंत्री पांडुरंग फुंडकर तो दांडी मारने में नंबर वन होने की जानकारी आरटीआई कार्यकर्ता अनिल गलगली को मुख्य सचिव कार्यालय ने दी हैं। 5 टॉप दांडी बहाद्दुर मंत्रियों में पांडुरंग फुंडकर,सुधीर मुनगंटीवार, चंद्रशेखर बावनकुळे, पंकजा मुंडे, संभाजी निलंगेकर-पाटील, राजकुमार बडोले का नंबर लगता हैं।

आरटीआई कार्यकर्ता अनिल गलगली ने मुख्य सचिव कार्यालय से मंत्रिमंडल की बैठक और मंत्रियों की उपस्थिती की जानकारी मांगी थी। मुख्य सचिव कार्यालय के अवर सचिव और जन सूचना अधिकारी विवेक पाटील ने अनिल गलगली को बताया कि दिनांक 17 जुलाई 2016 से 22 मई  2017 इस दरम्यान कुल 35 मंत्रिमंडल की बैठक हुई। सिर्फ मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का अपवाद छोड़ा जाए तो 22 के 22 मंत्रियों ने दांडी मारने के मौके से नही चूके । इन दांडी बहादुर मंत्रियों में विवादित कृषिमंत्री पांडुरंग फुंडकर ने नंबर वन हासिल कर 35 में से 11 बार अनुपस्थित रहे है।  उसके बाद वित्त मंत्री सुधीर मुनगंटीवार और ऊर्जा मंत्री चंद्रशेखर बावनकुळे इन दोनों ने 9 बार दांडी मारते हुए दूसरा नंबर हासिल किया। इसके बाद ग्रामीण और महिला बाल विकास मंत्री पंकजा मुंडे, सामाजिक न्याय मंत्री राजकुमार बडोले और कामगार मंत्री संभाजी निलंगेकर-पाटील यह तीनों 8 बार गैरहाजिर रही। अन्न, नागरी आपूर्ति और उपभोक्ता सरंक्षण मंत्री गिरीश बापट और गृहनिर्माण मंत्री प्रकाश महेता यह दोनों  7 बार गैरहाजिर थे। जलसंधारण व राजशिष्टाचार मंत्री प्रा राम शिंदे और पर्यावरण मंत्री रामदास कदम यह 6 बार गैरहाजिर थे। सहकार मंत्री सुभाष देशमुख, सार्वजनिक निर्माण मंत्री एकनाथ शिंदे और जलापूर्ति व स्वच्छता मंत्री बबन लोणीकर यह तीनों 5 बार गैरहाजिर थे। राजस्व मंत्री चंद्रकांत पाटील, उद्योग मंत्री सुभाष देसाई, सार्वजनिक स्वास्थ्य व परिवार कल्याण मंत्री डॉ दीपक सावंत यह 4 बार वहीं पर्यटन मंत्री जयकुमार रावल 3 बार और वैद्यकीय शिक्षा,जलसंपदा व लाभक्षेत्र विकास मंत्री गिरीष महाजन 2 बार गैरहाजिर थे। 35 में से सिर्फ एक बार गैरहाजिर रहनेवाले मंत्रियों में स्कूली शिक्षा मंत्री विनोद तावडे, परिवहन मंत्री दिवाकर रावते, आदिवासी मंत्री विष्णू सावरा और पशुसंवर्धन, दुग्धविकास व मत्स्यविकास मंत्री महादेव जानकर के नामों का शुमार हैं।

मंत्रिमंडल की बैठक में राज्य के विकास और पॉलिसी पर महत्वपूर्ण चर्चा होने से इन बैठक में शेष काम छोड़कर उपस्थित रहने की अपेक्षा मंत्रियों से अनिल गलगली ने जताई है।

Saturday, 29 July 2017

पांडुरंग फुंडकर दांडी मारण्यात अव्वल

महाराष्ट्रातील नवीन सरकारातील मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस यांचा अपवाद सोडता सर्वच मंत्र्यानी  मंत्रिमंडळाच्या बैठकीस शतप्रतिशत उपस्थिती राहिले नसून कृषिमंत्रीे पांडुरंग फुंडकर दांडी मारण्यात अव्वल असल्याची माहिती आरटीआय कार्यकर्ते अनिल गलगली यांस मुख्य सचिव कार्यालयाने दिली आहे. 5 टॉप दांडी बहादुर मंत्र्यामध्ये पांडुरंग फुंडकर, सुधीर मुनगंटीवार, चंद्रशेखर बावनकुळे, पंकजा मुंडे, संभाजी निलंगेकर-पाटील, राजकुमार बडोले यांचा क्रमांक लागतो.

आरटीआय कार्यकर्ते अनिल गलगली यांनी मुख्य सचिव कार्यालयाकडे मंत्रिमंडळाच्या बैठकी आणि मंत्र्याची उपस्थितीची माहिती मागितली होती. मुख्य सचिव कार्यालयाचे अवर सचिव आणि जन माहिती अधिकारी  केळकर यांनी अनिल गलगली यांस कळविले की दिनांक 17 जुलै 2016 पासून 22 मे 2017 या कालावधीत एकूण 35 मंत्रिमंडळाच्या बैठकी झाल्या आहेत. मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस यांचा अपवाद वगळता 22 च्या 22 मंत्र्यानी दांडी मारली. या दांडी बहादुरीत कृषिमंत्री पांडुरंग फुंडकर यांनी अव्वल क्रमांक पटवित 35 पैकी 11 वेळा अनुपस्थित होते. त्यानंतर वित्त मंत्री सुधीर मुनगंटीवार आणि ऊर्जा मंत्री चंद्रशेखर बावनकुळे या दोघांनीही 9 वेळा अनुपस्थित राहत दुसरा क्रमांक पटकविला. यानंतर ग्रामीण आणि महिला बाल विकास मंत्री पंकजा मुंडे, सामाजिक न्याय मंत्री राजकुमार बडोले आणि कामगार मंत्री संभाजी निलंगेकर-पाटील हे तिघे प्रत्येकी 8 वेळा अनुपस्थित होते. अन्न, नागरी पुरवठा आणि ग्राहक सरंक्षण मंत्री गिरीष बापट आणि गृहनिर्माण मंत्री प्रकाश महेता हे दोघे 7 वेळा अनुपस्थित होते. जलसंधारण व राजशिष्टाचार मंत्री प्रा राम शिंदे आणि पर्यावरण मंत्री रामदास कदम हे 6 वेळा अनुपस्थित होते. सहकार मंत्री सुभाष देशमुख, सार्वजनिक बांधकाम मंत्री एकनाथ शिंदे आणि पाणीपुरवठा व स्वच्छता मंत्री बबन लोणीकर हे तिघे 5 वेळा अनुपस्थित होते. महसूल मंत्री चंद्रकांत पाटील, उद्योग मंत्री सुभाष देसाई, सार्वजनिक आरोग्य व कुटुंब कल्याण मंत्री डॉ दीपक सावंत हे प्रत्येकी 4 वेळा तर पर्यटन मंत्री जयकुमार रावळ 3 वेळा आणि वैद्यकीय शिक्षण, जलसंपदा व लाभक्षेत्र विकास मंत्री गिरीष महाजन 2 वेळा अनुपस्थित होते.  प्रत्येकी 1-1 वेळा शालेय शिक्षण मंत्री विनोद तावडे, परिवहन मंत्री दिवाकर रावते, आदिवासी मंत्री विष्णू सावरा आणि पशुसंवर्धन, दुग्धविकास व मत्स्यविकास मंत्री महादेव जानकर अनुपस्थित होते.

मंत्रिमंडळाच्या बैठकीत राज्याचा विकास आणि धोरणाबाबत महत्वाची चर्चा होत असून अश्या बैठकीत मंत्र्यानी सर्व कामे सोडून उपस्थित राहण्याची अपेक्षा अनिल गलगली यांनी व्यक्त केली.