Wednesday, 18 October 2017

Protest against Reliance Energy Limited company

A one day hunger strike was called upon by Akhil Bhartiya Kaamgar Utkarsh Sangh on Wednesday in front of the head quarters of Reliance Energy Limited office at Santacruz east. The purpose of this protest was to bring in notice to the  owner and Businessman Anil Ambani about the wrong working of the company policy of promoting outsourcing of works for many years impacting on the lives of thousands of workers of this company and the exploitation been faced by the workers.

Trade union President Adv. Rajesh Dabholkar highlighted some very serious and important issue such as corruption and fraud in the company, making contract  workers to be made permanent, providing job to the member of deceased family and also about giving 25% bonus to the workers.

Union Top mentor and Guides RTI activist Anil Galgali mention that Reliance Energy and Reliance Infrastructure is accused of being corrupt and fraud. And also they are doing conspiracy to sell this profit making company and endangering the lives of 12000 workers.  Galgali also appealed to Chief Minister Devendra Fadnavis and Energy Minister Chandrashekhar Bawankule to take control of the situation in proper time or else the Reliance energy company will be sold by Anil Ambani.Also he pointed that at present the company is maintaining a single account for all their earnings and expenses which is totally wrong and told that three different account to be maintained i.e. Generation, Distributions and collections.

In this protest Anandrao Kaligota, Sandeep Singh, Vinayak Trikal, Nitin Bhalerao, Raju Mandavkar, Kunal Sangoi, Pravin Pawar, Atul Pawar, Vicky Shirke, Shailesh Patil, Viveka Dabholkar, Prasad Abhyankar, Prakash Gawde, Ramesh Sukha ,Sahdev Parab etc. were present. 

Tuesday, 17 October 2017

मंत्रियों के 'आधार' कार्ड की जानकारी प्रधानमंत्री कार्यालय के पास नहीं

125 करोड़ भारतीयों को 'आधार' कार्ड अनिवार्य कर उसकी जानकारी सभी तरह की सुविधाओं से जोड़ने की अपील करनेवाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री कार्यालय के पास उनके ही मंत्रियों की 'आधार' कार्ड की जानकारी न होने का खुलासा आरटीआई कार्यकर्ता अनिल गलगली को उपलब्ध कराई गई जानकारी से हुआ हैं। इससे यह भी साबित हो रहा हैं कि मोदी की अपील को उनके सारे मंत्रियों ने ठेंगा दिखाया हैं।

आरटीआई कार्यकर्ता अनिल गलगली ने प्रधानमंत्री कार्यालय से भारत के प्रधानमंत्री सहित मंत्रिमंडल के सभी सदस्यों ने 'आधार' कार्ड की जानकारी पेश की हैं तो उन मंत्रियों के नामवाली लिस्ट मांगी थी। अनिल गलगली आवेदन मंत्रिमंडल सचिवालय, लोकसभा सचिवालय, राज्यसभा सचिवालय, सूचना व तकनीक मंत्रालय, भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण ऐसे 5 स्थानों पर हस्तांतरित किया गया।

प्रधानमंत्री कार्यालय के अवर सचिव प्रवीण कुमार ने स्पष्ट किया कि भले ही प्रधानमंत्री के पास आधार नंबर हैं लेकिन सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा  8(1) (ञ) के तहत जानकारी देने से खारिज कर रहे हैं।इस धारा के अनुसार सूचना, जो व्यक्तिगत सूचना से संबंधित है, जिसके प्रकट करने का किसी लोक क्रियाकलाप या हित से संबंध नहीं है या जिससे व्यक्ति की एकांतता पर अनावश्यक अतिक्रमण नहीं होता है;

परंतु यह कि ऐसी सूचना प्रकट की जा सकेगी यदि यथास्थिति, सूचना अधिकार या अपील प्राधिकारी का यह समाधान हो जाता है कि ऐसी सूचना का प्रकटन विस्तृत लोक हित में न्यायोचित है। भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण के जन सूचना अधिकारी अशोक कुमार ने यह जानकारी थर्ड व्यक्ति से जुड़े होने का दावा करते हुए स्पष्ट किया कि जनसंख्यकीय और बायोमेट्रिक डाटा की गोपनीयता के मद्देनजर जिस निवासी से जानकारी जुड़ी हैं वहीं निवासी जानकारी प्राप्त कर सकता हैं। 

अनिल गलगली के अनुसार स्वयं प्रधानमंत्री और मंत्रियों के 'आधार' कार्ड की जानकारी केंद्र सरकार के पास उपलब्ध होना आवश्यक हैं। प्रधानमंत्री कार्यालय के पास मंत्रियों के 'आधार' कार्ड की जानकारी न होने से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील की ओर उनके ही मंत्रियों ने ठेंगा ही दिखाया हैं, ऐसा गलगली ने कहा हैं।

मंत्र्यांच्या 'आधार' कार्डची माहिती पंतप्रधान कार्यालयाकडे नाही

125 कोटी भारतीयांना 'आधार' कार्ड अनिवार्य करत ती माहिती सर्व सुविधासाठी जोडण्याचे आवाहन करणारे पंतप्रधान नरेंद्र मोदी यांच्या पंतप्रधान कार्यालयाकडे त्यांच्याच मंत्र्यांची 'आधार' कार्डची माहिती नसल्याची बाब माहिती अधिकार कार्यकर्ते अनिल गलगली यांस दिलेल्या माहितीतून समोर आली आहे. एकप्रकारे सर्व मंत्र्यांनी मोदी यांच्या आवाहनास ठेंगाच दाखविला आहे, असे म्हणणे चुकीचे ठरणार नाही.

आरटीआय कार्यकर्ते अनिल गलगली यांनी पंतप्रधान कार्यालयाकडे भारताचे पंतप्रधान सहित मंत्रिमंडळातील सर्व सदस्यांनी आपल्या 'आधार' कार्डची माहिती सादर केली असल्यास त्या मंत्र्यांच्या नावाची यादी मागितली होती. अनिल गलगली यांचा अर्ज मंत्रिमंडळ सचिवालय, लोकसभा सचिवालय, राज्यसभा सचिवालय, माहिती व तंत्रज्ञान मंत्रालय, भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण अश्या 5 स्थानी हस्तांतरित केला गेला. 

पंतप्रधान कार्यालयाचे अवर सचिव प्रवीण कुमार यांनी स्पष्ट केले की जरी पंतप्रधान यांसकडे आधार नंबर असला तरी माहितीचा अधिकार अधिनियम, 2005 च्या कलम 8(1) (ञ) माहिती नाकारली गेली.  या कलम नुसार जी माहिती प्रकट करणे हे व्यापक लोकहिताच्या दृष्टीने आवश्यक आहे अशी, यथास्थिति, केंद्रीय जन माहिती अधिकाज्याची, राज्य जन माहिती अधिकाज्याची किंवा अपील प्राधिकाज्याची खात्री पटली असेल, ती खेरीजकरून, जी प्रकट करण्याचा कोणत्याही सार्वजनिक कामकाजाशी किंवा हितसंबंधाशी काहीही संबंध नाही किंवा जी व्यक्तीच्या खाजगी बाबीत आगंतुक हस्तक्षेप करील, अशी वैयक्तिक तपशीलासंबंधातील माहिती. भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरणाचे जन माहिती अधिकारी अशोक कुमार यांनी सदर माहिती त्रयस्थ व्यक्तीशी संबंधित असल्याचा दावा करत स्पष्ट केले की जनसंख्यकीय आणि बायोमेट्रिक डाटाची गोपनीयता पहाता केवळ निवासी ज्यांच्याशी माहिती संबंधित आहे तोच माहिती प्राप्त करु शकतो.

अनिल गलगली यांच्या मते स्वतः पंतप्रधान आणि मंत्र्यांच्या 'आधार' कार्डची माहिती केंद्रीय शासनाकडे उपलब्ध असणे आवश्यक आहे. पंतप्रधान कार्यालयाकडे मंत्र्यांची 'आधार' कार्ड माहिती नसल्याने पंतप्रधान नरेंद्र मोदींचा आवाहनाकडे मंत्र्यांनी दुर्लक्ष केल्याचे स्पष्ट होत असल्याची बाब गलगली यांनी नमूद केली.

No information about the Minister's Aadhar card with PMO

At a time when, PM Narendra Modi is making the use of Aadhar card mandatory across all the services that the 125 crores Indian citizen utilise, its own Office does not have the information about the Aadhar card details of its own Minister's. Infact it can also be concluded that the Minister's in the government are themselves showing thumbs at the mandatory registering of the Aadhar card, this information has come to light through the reply provided to RTI Activist Anil Galgali on his query.

RTI Activist Anil Galgali had sought information from the PMO about the names of those Ministers including the PM who have submitted the details of their Aadhar card to the PMO. The RTI application filed by Galgali was transferred to 5 different Ministry's, namely Cabinet Secretariat, loksabha Secretariat, Rajya Sabha secretariat, Information and Technology Ministry, and UIDAI.

The Under Secretary in PMO, Shri Pravin Kumar specified that,though  the PM may have the Aadhar nos the information was rejection under Section 8(1) of the RTI Act 2005. Information which relates to personal information the disclosure of which has not relationship to any public activity or interest, or which would cause unwarranted invasion of the privacy of the individual unless the Central Public Information officer or State Public Information officer or the appellate authority, as the case may be satisfied that the larger public interest justifies the disclosure of such Information”: 

The Public Information Officer Shri Ashok Kumar, declaring that the information sought pertains to Third party, specified that, the information is about the biometric data and the population hence the secrecy is paramount hence the information can be provided only to people related with the data. 

Anil Galgali has expressed that, the PM and the Minister's Aadhar details should be available with the Central Govt. He further commented that, if the PMO does not have the details of Aadhar card of its own Minister's, it means that the Minister's themselves have ignored the directions of PM Narendra Modi.

Thursday, 5 October 2017

3 हजार करोड़ से अधिक का बकाया वसूल करने में एमएमआरडीए फेल

मुख्यमंत्री की अध्यक्षता वाली एमएमआरडीए प्रशासन की धाक बकायेदारों पर कम होने से बकायेदारों से 3 हजार करोड़ से अधिक का बकाया वसूलने में एमएमआरडीए फेल हो चुकी हैं। इनमें विख्यात उद्योगपती मुकेश अंबानी से लेकर इनकम टैक्स, जमुनाबेन फाऊंडेशन, इंडियन न्युजपेपर सोसायटी, ओरिएंटल बँक ऑफ कॉमर्स, नमन हॉटेल, तालीम रिसर्च फाऊंडेशन का शुमार होने की जानकारी आरटीआई  कार्यकर्ता अनिल गलगली को एमएमआरडीए प्रशासन ने दी हैं। इसमें सबसे अधिक 95% रकम मुकेश अंबानी की रिलायन्स इंडिस्ट्रीज लिमिटेड कंपनी से आना शेष हैं। 

आरटीआई कार्यकर्ता अनिल गलगली ने एमएमआरडीए प्रशासन से बकायेदारों की लिस्ट मांगी थी। एमएमआरडीए प्रशासन ने 12 सितंबर 2017 को 7 बड़े बकायेदारों को नोटीस जारी कर ताबडतोब बकाया राशि  अदा करने की हिदायत दी हैं। मुकेश अंबानी की रिलायन्स इंडिस्ट्रीज लिमिटेड कंपनी, अंबानी का ही जमनालाल हिराचंद अंबानी फाऊंडेशन, इनकम टैक्स, इंडियन न्युजपेपर सोसायटी, ओरिएंटल बँक ऑफ कॉमर्स, नमन हॉटेल, तालीम रिसर्च फाऊंडेशन का शुमार हैं। मुकेश अंबानी ने 3 जमीन लीज पर ली थी उसमें  2 स्थानों पर अतिरिक्त एफएसआय निर्माण के लिए खरीदा   दोनों स्थानों पर अतिरिक्त एफएसआय का 1137.75 करोड़ अदा किया नहीं। साथ ही 4 वर्ष में निर्माण काम पूर्ण न होने से दोनों स्थानों का अतिरिक्त अधिमूल्य 1600 करोड़ अदा किया नहीं हैं। अंबानी की मेसर्स जमनाबेन हिराचंद अंबानी फाऊंडेशन का 31 करोड़ अदा नहीं किया। इंडियन न्युजपेपर सोसायटी ने निर्माण 4 वर्ष में पूर्ण नहीं करने से 54.74 करोड़ अतिरिक्त प्रीमियम अदा किया नहीं और अतिरिक्त एफएसआय का 50.52 करोड़ अदा किया नहीं। मेसर्स नमन हॉटेल का 32 करोड़, तालीम रिसर्च फाऊंडेशन का 33 करोड़, इनकम टैक्स का 1 करोड़, ओरिएंटल बँक ऑफ कॉमर्स का 25 करोड़ अदा किया नहीं। ऐसा कुल  3 हजार करोड़ से अधिक की रकम बकाया हैं।

सीबीआई, इंडियन चार्टर्ड अकाउंट्स, पासपोर्ट ऑफिस,अकाउंटंट ऑफ जनरल और कामगार आयुक्त इन शासकीय संस्थानों ने ताबडतोब अतिरिक्त प्रीमियम अदा किया हैं वहीं बँक ऑफ इंडिया, इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट बँक, पंजाब नेशनल बँक, कॅनरा बँक, बँक ऑफ बडोदा, इंडियन ऑइल और ओएनजीसी इन निजी सार्वजनिक संस्थानों ने रकम अदा की हैं। इसके अलावा भारत डायमंड बोर्स, टाटा कंपनी, टीसीजी, ईआयएच, पराईनी डेवलपर्स, जेट एअरवेज, रघुलीला रिअल इस्टेट, स्टारलाईट जैसे निजी संस्थानों ने अतिरिक्त प्रीमियम की रकम अदा की हैं।

अनिल गलगली के अनुसार एमएमआरडीए प्रशासन के अधिकारी बड़े बकायेदारों के सामने नतमस्तक होने से बकायेदारों से बकाया रकम वसूलने में फेल हो चुकी हैं। जो बकायेदार हैं उनका काम बंद करना चाहिए और जिन्हें ओसी दी हैं उसे  रद्द करनेपर बकाया वसूल होगी। लेकिन एमएमआरडीए प्रशासन के कुछ अधिकारियों की आपसी सांठगांठ से एमएमआरडीए को मिलनेवाला राजस्व एमएमआरडीए की तिजोरी में जमा नहीं हो पा रहा हैं। उल्टे बकायेदारों को मदद करने के लिए कानूनी सलाह लेने का आरोप अनिल गलगली ने लगाया हैं। बकायेदार बकाया रकम अदा नहीं करने पर जमीन वापस लेने और इस मामले में एमएमआरडीए के अधिकारियों की जिम्मेदारी निश्चित करने की मांग अनिल गलगली ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को भेजे हुए पत्र में की हैं।

3 हजाराहून अधिक कोटीची थकबाकी वसूल करण्यात एमएमआरडीए सपशेल अपयशी

मुख्यमंत्री अध्यक्ष असलेल्या एमएमआरडीए प्रशासनाचा थकबाकीदारांवर वचक दिवसेंदिवस कमी होत असून आजच्या घडीला 3 हजाराहून अधिक कोटीची थकबाकी थकबाकीदारांकडून वसूल करण्यात एमएमआरडीए सपशेल अपयशी ठरली आहे. यात जगप्रसिध्द उद्योगपती मुकेश अंबानी पासून आयकर खाते, जमुनाबेन फाऊंडेशन, इंडियन न्युजपेपर सोसायटी, ओरिएंटल बँक ऑफ कॉमर्स, नमन हॉटेल, तालीम रिसर्च फाऊंडेशनचा समावेश असल्याची माहिती आरटीआय कार्यकर्ते अनिल गलगली यांस एमएमआरडीए प्रशासनाने दिली आहे. यात सर्वाधिक 95% रक्कम थकबाकीदार मुकेश अंबानी  यांच्या रिलायन्स इंडिस्ट्रीज लिमिटेड कंपनी यांस कडून येणे बाकी आहे.

आरटीआय कार्यकर्ते अनिल गलगली यांनी एमएमआरडीए प्रशासनाकडे थकबाकीदारांची माहिती मागितली होती. एमएमआरडीए प्रशासनाने 12 सप्टेंबर 2017 रोजी 7 बड्या थकबाकीदारांस नोटीस बजावत ताबडतोब थकबाकीची रक्कम अदा करण्याची ताकीद दिली आहे. यात मुकेश अंबानी यांची रिलायन्स इंडिस्ट्रीज लिमिटेड कंपनी, अंबानी यांचीच जमनालाल हिराचंद अंबानी फाऊंडेशन, आयकर खाते, इंडियन न्युजपेपर सोसायटी, ओरिएंटल बँक ऑफ कॉमर्स, नमन हॉटेल, तालीम रिसर्च फाऊंडेशनचा समावेश आहे. मुकेश अंबानी यांनी 3 जमीनी लीजवर घेतल्या असून 2 ठिकाणी अतिरिक्त एफएसआय बांधकामासाठी विकत घेतले. दोन्ही ठिकाणी अतिरिक्त एफएसआयचे  1137.75 कोटी अदाच केले नाही. तसेच 4 वर्षांत बांधकाम पूर्ण न झाल्यामुळे दोन्ही जागेवर सुरु असलेल्या बांधकामासाठी अतिरिक्त अधिमूल्य 1600 कोटी अदा केले नाही. अंबानीच्या मेसर्स जमनाबेन हिराचंद अंबानी फाऊंडेशनने 31 कोटी अदा केले नाही. इंडियन न्युजपेपर सोसायटीने बांधकाम 4 वर्षात पूर्ण न केल्यामुळे 54.74 कोटी अतिरिक्त प्रीमियम अदा केले नाही आणि अतिरिक्त एफएसआयचे 50.52 कोटी अदा केले नाही. मेसर्स नमन हॉटेलचे 32 कोटी, तालीम रिसर्च फाऊंडेशनचे 33 कोटी, आयकर खात्याचे 1 कोटी, ओरिएंटल बँक ऑफ कॉमर्सचे 25 कोटी अदा केले नाही. अशी एकूण 3 हजाराहून अधिक कोटीची रक्कम थकबाकी आहे. 

सीबीआय, इंडियन चार्टर्ड अकाउंट्स, पासपोर्ट ऑफिस,अकाउंटंट ऑफ जनरल आणि कामगार आयुक्त या शासकीय संस्थेने ताबडतोब अतिरिक्त प्रीमियम अदा केले तर बँक ऑफ इंडिया, इंडस्ट्रियल डेव्हलपमेंट बँक, पंजाब नेशनल बँक, कॅनरा बँक, बँक ऑफ बडोदा, इंडियन ऑइल आणि ओएनजीसी या खाजगी सार्वजनिक क्षेत्रातील संस्थेने रक्कम अदा केली आहे. याशिवाय भारत डायमंड बोर्स, टाटा कंपनी, टीसीजी, ईआयएच, पराईनी डेव्हलपर्स, जेट एअरवेज, रघुलीला रिअल इस्टेट, स्टारलाईट सारख्या खाजगी संस्थानी अतिरिक्त प्रीमियमची रक्कम अदा केली आहे.

अनिल गलगली यांच्याशी मते एमएमआरडीए प्रशासनाचे अधिकारी बड्या धेंड्या समक्ष लोटांगण घालत असून थकबाकीदारांकडून पैसे वसूल करण्यात सपशेल अपयशी ठरले आहे. जे थकबाकीदार आहेत त्यांची कामे बंद करावीत आणि ज्यांस ओसी दिली आहे ती रद्द केल्यास थकबाकी वसूल होईल पण एमएमआरडीए प्रशासनातील काही अधिका-यांच्या संगनमताने एमएमआरडीएला मिळणारा महसूल तिजोरीत जमा होत नाही उलट थकबाकीदारांस मदत करण्यासाठी कायदेशीर सल्ला घेतला जात असल्याचा आरोप अनिल गलगली यांनी केला आहे. थकबाकीदार थकबाकी अदा करत नसल्यास जमिनी ताब्यात घेण्याची आणि या प्रकरणी एमएमआरडीएच्या अधिका-यांची जबाबदारी निश्चित करण्याची मागणी अनिल गलगली यांनी मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस यांस पाठविलेल्या पत्रात केली आहे.  

MMRDA proves to be complete failure in recovering its own More then Rs 3000 crores dues

The MMRDA which is headed by the CM is rapidly losing its sting and authority, can be understood from its abject failure to recover it's own dues amounting to a whopping over Rs 3000 crores. The list of defaulter consists of who's who ranging from renowned Industrialist Mukesh Ambani to the Income tax dept, Jamunabai Foundation, Indian Newspaper Society, Oriental Bank of Commerce, Naman Hotels, Talim Research Foundation etc, has been revealed through the response of the MMRDA to a RTI query filed by RTI Activist Anil Galgali. 95% of the money out of total outstanding is still not recover from the Mukesh Ambani's Reliance Industries Limited Company.

RTI Activist Anil Galgali had sought information from the MMRDA administration about details of defaulter dues to be recovered by it. The MMRDA on 12th September 2017 has issued notices to its 7 largest defaulters and ordered them to immediately pay the amount dues. The defaulters issued notices include Mukesh Ambani's Reliance Industries Ltd, Jamnalal Hirachand Ambani Foundation belonging to the Ambani's, Income tax dept, Indian Newspaper Society, Naman Hotels, Talim Research Foundation. Mukesh Ambani has taken 3 plots on lease at the BKC, Out of the 3 plots, it has sought additional FSI on 2 plots amounting to Rs 1137.75 crores, which it has not paid. Simultaneously it was supposed to complete it's project within 4 years, which it has failed to complete, hence being liable to pay an additional surcharge of Rs 1600 crores for the 2 plots, which has still not been paid. The Ambani controlled Jamnaben Hirachand Ambani Foundation has not paid Rs 31 crores, Indian Newspaper Society was liable to pay Rs 54.74 crores as additional premium for its failure to complete it's project within 4 years, and Rs 50.52 crores for taking additional FSI, which has not been paid as of now. M/s Naman Hotels outstanding is Rs 32 crores, Talim Research Foundation Rs 33 crores, Income tax dept Rs 1 crore, and Oriental Bank of Commerce Rs 25 crores has not been paid, all the due outstanding crosses a whopping Rs 3000 crores.

The govt bodies like, CBI, Institute of Chartered Accountants of India, Accountant General of India, and Labour Commissioner had immediately paid it's amount for Additional premium on time. PSU's like Bank of India, IDBI, Punjab National Bank, Canara Bank, Bank of Baroda, Indian oil corporation, and ONGC also remitted the dues on time. Private entities like Bharat Diamond bourse, Tata Company, TCG, EIH, Paraini Developers, Jet Airways, Raghuleela Real estate, and Starlite have also paid it's additional premium amount on time.

According to Anil Galgali, the officers of the MMRDA administration have surrendered before the high and mighty defaulters thereby failing to recover it's dues and further failing to perform their duties. The MMRDA should stop work at the defaulters projects and for those to whom it has issued its OC, it should revoke the OC's to ensure the recovery of the dues, but sadly the defaulters in connivance of the officers of the MMRDA administration are causing losses to the government treasury. On the contrary, the MMRDA administration Officers are taking advise from legal experts  to ensure cooperation with the defaulters alleged Galgali. In a letter addressed to CM Devendra Fadnavis, Anil Galgali has demanded that, the MMRDA should immediately seize the property of the defaulters and fix the responsibility of the MMRDA Officers who are in connivance with the defaulters and take strict action against such persons and recover it's dues.

Wednesday, 4 October 2017

15 वर्ष से अटका कुर्ला सबवे हो गया तैयार

बहुप्रतिक्षित कुर्ला पूर्व और पश्चिम को जोड़नेवाला ऐसा कुर्ला सबवेे का काम पूर्ण हुआ है औए जल्द ही आम लोगों के लिए खुलेगा। मध्य रेलवे ने  3.84 करोड़ अबतक खर्च किया हैं वहीं मध्य रेलवे ने 2.11 करोड़ और मनपा 2.94 करोड़ ऐसे कुल मिलाकर  5.05 करोड़ खर्च किए हैं।

कुर्ला सबवेे का काम यह पिछले 15 वर्षो से प्रलंबित हैं। मनपा और मध्य रेलवे में आपसी समन्वय न होने के चलते काम अटक गया था।  कुर्ला सबवे की कुल लंबाई 129.90 मीटर, चौड़ाई 7.60 मीटर और उंचाई 2.60 मीटर इतनी हैं। मनपा ने सिर्फ पश्चिमी छोर का अप्रोच रोड़ का काम किया हैं जिसका कुल  खर्च रु. 2 करोड़ 94 लाख 88 हजार 383 हैं।  यह काम करने के लिए मे.जे.एल.कंस्ट्रक्शन कंपनी की नियुक्ती की गई हैं। काम शुरु करने की तारीख 15 फरवरी 2016 थी।  अबतक रेलवे प्रशासन ने रु. 3 करोड़ 84 लाख 43 हजार रकम खर्च की हैं।  सोलापूर की मेसर्स महेश रुपचंदाणी कंपनी ने दिनांक 21 अक्तूबर 2014 को काम शुरु किया था।  इसका काम मध्य और हार्बर रेलवे की पटरियों से तले हो रहा हैं।

अनिल गलगली के अनुसार करोड़ों का खर्च करने के बाद भी पिछले 15 वर्षों से कुर्ला सबवे शुरु नहीं हो पाया हैं। कुर्ला सबवे शुरु होते ही उसका लाभ हजारों पैदल चलनेवाले नागरिकों को तो होगा ही साथ ही में रेलवे की दुर्घटना की संख्या में गिरावट आने में मदद होगी, ऐसा विश्वास अनिल गलगली ने व्यक्त किया हैं।

15 वर्षे रखडलेला कुर्ला सबवे बांधुन तयार

बहुप्रतिक्षित असा कुर्ला पूर्व आणि पश्चिमेला जोडणारा असा कुर्ला सबवे चे काम पूर्ण झाले लवकरच तो नागरिकांसाठी सुरु होईल. मध्य रेल्वेने 3.84 कोटी आतापर्यंत खर्च केले असून आता मध्य रेल्वे 2.11 कोटी आणि पालिका 2.94 कोटी असे 5.05 कोटी खर्च केले आहे.

कुर्ल्याचा सबवे चे काम हे गेल्या 14 वर्षापासून प्रलंबित आहे. पालिका आणि मध्य रेल्वेच्या समन्वयाच्या अभावी काम रखडलेले होते. आरटीआय कार्यकर्ते अनिल गलगली यांनी सतत केलेल्या पाठपुराव्यानंतर कुर्ला सबवे जवळपास पूर्ण झाला आहे. कुर्ला सबवेची एकूण लांबी 129.90 मीटर, रुंदी 7.60 मीटर आणि उंची 2.60 मीटर इतकी आहे.  पालिकेने फक्त पश्चिमेकडील पोहोचमार्गाचे काम केले असून त्याचा एकूण खर्च रु. 2 कोटी 94 लाख 88 हजार 383 झाला आहे. हे काम करण्यासाठी मे.जे.एल.कंस्ट्रक्शन कंपनीची नेमणूक करण्यात आली होती. काम 15 फेब्रुवारी 2016 रोजी सुरु झाले असून कामाचा कालावधी 9 महिन्याचा (पावसाळा वगळून) होता. आतापर्यंत रेल्वेने रु. 3 कोटी 84 लाख 43 हजार रक्कम खर्च केले आहे.  सोलापूर येथील मेसर्स महेश रुपचंदाणी ने दिनांक 21 ऑक्टोबर 2014 रोजी काम सुरु झाले होते. सबवे चे काम मध्य आणि हार्बर रेल्वेच्या खालील भागात होत आहे.

अनिल गलगली यांच्या मते कोटयावधीचा खर्च करुनही गेल्या 15 वर्षापासून कुर्ला सबवे सुरु होऊ शकला नाही. कुर्ला सबवे सुरु होताच याचा लाभ हजारों पादचा-यांस होईल आणि रेल्वे दुर्घटनेत घट होण्यास मदत मिळेल, असा विश्वास अनिल गलगली यांनी व्यक्त केला.

Delayed by 15 years, Kurla Subway is ready 

Delayed by 15 years Construction of Kurla Subway passing underneath Kurla station work completed.  

RTI Activist Anil Galgali continue follow-up with this issue and now Kurla Subway work fully completed. This time Railway and Mumbai Municipal Corporation have teamed up to finish the indefinitely delayed Project, Entailing a fresh cost Rs 5.05 crores. On completion this subway will provide a much needed link between the East & West side to one of the busiest suburban thoroughfares in Mumbai.

M/s  Mahesh Roopchandani of Solapur have been awarded the contract of construction by the Railways. Central Railway is to provide an additional fund of Rs 2.11 crores for completion of the project. On 21 October 2014 work starts by Contractor.  Central Railway had earlier spent Rs 3.84 crores on 129.9 metre on construction of a tunnel running under Main and Harbour Railway lines. This 7.60 metre wide tunnel with a height of 2.6 metres was constructed years ago, lay incomplete. BMC had been entrusted the responsibility of construction of approach road to the western side of Subway, which alone would cost Rs 2.94 crores. Work has already officially begun on February 2016 and completed.

"This uncompleted project had proved to be stupendous waste of resources, not put to use even after having spend Crores. I hope it will be completed now providing relief to common public, Also bringing down figures of deaths occurring during crossing of rail tracks", Galgali said.

Friday, 29 September 2017

रेल्वेच्या अनियोजनामुळे झाली दुर्घटना

परळ- एलफिस्टन पादचारी पुलावर झालेली दुर्घटना ही रेल्वे प्रशासनाच्या अनियोजनामुळे झाल्याच्या आरोप आरटीआय कार्यकर्ते अनिल गलगली यांनी केला असून वारंवार तक्रारी करुनही रेल्वे प्रशासनाने केलेल्या दुर्लक्षामुळे सामान्य प्रवाश्याना नाहक जीव गमवावा लागला आहे.

मुंबई उपनगरी सेवेकडे दिल्लीश्वरांनी नेहमीच दुर्लक्ष केले आहे. माजी रेल्वे मंत्री सुरेश प्रभू यांनी परळ टर्मिनसची केलेली घोषणा आजही कागदावरच आहे. परळ येथील पादचारी पुलावरची गर्दी पाहता मध्य रेल्वेने कल्याण दिशेकडे लाखों रुपये खर्च करुन बांधलेल्या पुलाचा वापर होत नाही कारण रेल्वे अधिका-यांनी अभ्यास न करता स्थान चुकीचे निवडत लाखों रुपये वाया घालविले. बुलेट ट्रेनच्या नादापायी मुंबई उपनगरी सेवेने प्रवास करणाऱ्या 75 लाख प्रवाश्याकडे राज्य आणि केंद्र सरकार जाणीवपूर्वक लक्ष देत नाही. याप्रकरणी चौकशीचा फार्स न करता ज्या अधिका-यांच्या निष्काळजीपणामुळे हा दुर्दैवी प्रकार घडला आहे त्यांस घरी पाठविण्याची ईच्छाशक्ती रेल्वे मंत्री पियूष गोयल यांनी दाखविण्याची गरज असल्याचे प्रतिपादन अनिल गलगली यांनी केले आहे.

रेलवे के अनियोजन से हुआ हादसा 

परेल- एलफिस्टन एफओबी ब्रीज पर हुआ हादसा रेलवे प्रशासन के अनियोजन के होने का आरोप आरटीआई कार्यकर्ता अनिल गलगली ने किया हैं। सतत शिकायत के बाद भी रेलवे प्रशासन ने बरती लापरवाही से आम यात्रियों को अपनी जान गंवानी पड़ी हैं।

मुंबई उपनगरीय सेवा को लेकर दिल्ली ने हमेशा नकारात्मक भूमिका ली हैं। पूर्व रेलवे मंत्री सुरेश प्रभू ने परेल टर्मिनस की हुई घोषणा आज भी प्रलंबित हैं। परेल स्थित एफओबी ब्रीज पर भीड़ देखते हुए मध्य रेलवे ने कल्याण की ओर लाखों रुपए खर्च कर बनाया गए ब्रीज का इस्तेमाल नहीं हो रहा हैं क्योंकि रेलवे ने अध्ययन किए बिना गलत स्पॉट का चयन करने से लाखों रुपए का खर्च व्यर्थ साबित हुआ हैं। बुलेट ट्रेन के चकल्लस में मुंबई उपनगरी सेवा से यात्रा करनेवाले 75 लाख यात्रियों की सुरक्षा पर राज्य और केंद्र सरकार जानबूझकर ध्यान नहीं दे रही हैं। इस मामले में जांच का फार्स किए बिना जिन बाबूओं की लापरवाही से हादसा हुआ हैं। उन्हें घर भेजने का हिम्मत रेलवे मंत्री पियूष गोयल ने दिखाने की जरुरत हैं, ऐसा अनिल गलगली ने कहा हैं।

Non planning of Railway is the cause of the Elphinstone accident

The unfortunate accident due to stampede which happened at the Elphinstone station FOB is due to negligence and non planning by the Railway department stated RTI Activist Anil Galgali, he further alleged that due to non competent act of the Railways who has not paid attention to the problems inspite of regular complaints filed by citizens, many citizens have lost their lives today.

The Delhi based Railway bosses have always neglected Mumbai and it's needs. There was hope that Mumbai based Suresh Prabhu and now Piyush Goyal would do something for Mumbai, seems to be a distant dream. The announcement of creating Parel Terminus by the then Railway Minister Suresh Prabhu is existent only on papers. Looking at the daily crowd in the Parel station the Central Railway had constructed a new Rail FOB on the kalyan end, spending lakhs of rupees has been of no use as the location selected by the responsible authorities have been faulty. In its blind ambition for Bullet Train the Central and the state government has not been paying attention towards the needs of the daily 75 lakh commuters. Instead of instituting a farce enquiry, The Railway Minister Piyush Goyal should find out the negligent Officer's responsible for the today's mess and initiate punishment to them, demanded Galgali.

Monday, 25 September 2017

पियूष गोयल के हस्तक्षेप के बाद रेलवे में खाद्यपदार्थ पर एमआरपी प्रिंट करवाना हुआ अनिवार्य

रेलवे मंत्री पियूष गोयल के आदेश के बाद रेलवे बोर्ड ने रेलवे में बिक्री होनेवाली खाद्यपदार्थ वस्तु के पैकेट पर जिन चीजों को प्रिंट करवाने का निर्देश जारी किया था उसमें एमआरपी प्रिंट करवाना अनिर्वाय नहीं था। आरटीआई कार्यकर्ता अनिल गलगली की शिकायत को गंभीरता से लेते हुए रेलवे प्रशासन के एमआरपी प्रिंट करना अनिवार्य कर दिया हैं।

आरटीआई कार्यकर्ता अनिल गलगली ने रेलवे के इस अजीबोंगरीब आदेश के खिलाफ रेलवे मंत्री पियूष गोयल और आदेश जारी करने वाले संजीव गर्ग को पत्र भेजकर उनसे हुई गलती ध्यानार्थ में लाई हैं। संजीव गर्ग जो रेलवे बोर्ड के टुरिजम और कॅटरिंग के अतिरिक्त सदस्य हैं उन्होंने रेलवे मंत्री पियूष गोयल के आदेशानुसार एक निर्देश जारी किया हैं जिसमें खाद्यपदार्थ के पैकेट पर जिन चीजों को प्रिंट करना जरुरी हैं उसमें आपूर्तिधारक एवं ठेकेदार का नाम , शाकाहारी एवं मांसाहारी, वजन और पॅकिंग का दिनांक का जिक्र हैं। रेलवे में एमआरपी से अधिक मूल्य लेकर खाद्यपदार्थ के पॅकेट बेचने की सबसे अधिक शिकायतें आती हैं उसे ही बाहर कर दिया गया हैं। अनिल गलगली की शिकायत के बाद  माहिती मुंबई भाजपा के प्रवक्ता प्रो.भालचंद्र शिरसाट ने भी इस मामले में गोयल से संपर्क किया। इसके बाद 25 सितंबर 2017 को संजीव गर्ग ने पुराने परिपत्रक में बदलाव कर उसमें एमआरपी और बिक्री की किंमत प्रिंट करना अनिवार्य कर दिया हैं।

अनिल गलगली ने रेलवे मंत्री पियूष गोयल का आभार माना है क्योंकि अब होनेवाली लूट पर नियंत्रण होगा ।