Tuesday, 29 November 2016

​राजनीतिक दल सूचना का अधिकार यानी RTI के दायरे में आएं

सूचना का अधिकार यानी RTI ने इस देश में नई क्रांति लाई। मौजूदा सरकार इस तथ्य को भली भांति जानती हैं। RTI राजनीतिक दल, निजी कंपनियां और अल्पसंख्याक संस्थाओं को लागू नहीं हैं। जिस यूपीए सरकार ने RTI कानून लाया उसने भी राजनीतिक दलों को इसके दायरे में लाने की जो पहल केंद्रीय सूचना आयोग ने की थी उसका विरोध किया और सभी 6 राष्ट्रीय राजनीतिक दल इसके खिलाफ एकत्र आएं ताकि RTI को ख़ारिज किया जाए। 

आज का दौर अलग हैं। काला धन को लेकर भी सभी दल एकत्र नहीं हैं। यानी RTI उस काले धन से भी भयंकर हैं जो जिसे प्यार करता हैं वह भ्रष्ट व्यक्ती हो या सार्वजनिक प्राधिकरण हमेशा हमेशा के लिए गलत काम, लेनदेन और कानून का उल्लंघन जैसे कामों से स्वयं को दूर रखता हैं। RTI पारदर्शकता और सुशासन की गारंटी देता हैं क्योंकि हर एक दस्तावेज, फाइल, नोटिंग और प्रस्ताव मंजूरी से जुड़े सभी प्रकार के कागजात आम आदमी को पाने, देखने और पढ़ने की गारंटी देता हैं।

ऐसा सशक्त और पारदर्शक कामकाज की गारंटी देनेवाला कानून उन दल और व्यक्तिओं के लिए किसी खतरे से कम नहीं हैं जो आम लोगों को सिर्फ मुर्ख बनाने में सक्रिय रहते हैं। केंद्र की नई सरकार को इसकी पहल करनी चाहिए। जो भी दल हो उनकी कामकाज की शैली, प्रक्रिया और सभी व्यवहार सार्वजनिक होते हैं तो किसी भी दल को परेशानी कैसे हो सकती हैं? RTI लागू होते ही उनकी पारदर्शकिता और बढ़ेगी। उनके दल में कार्यरत हर एक कार्यकर्ता और नेता भ्रष्टाचार से दूर रहेगा और उनकी ईमानदारी से दल को भी लाभ होगा। जैसे प्रधानमंत्री जी ने काला धन को रोकने के लिए जो पहल की उससे 125 करोड़ की जनता को भले ही परेशानी हुई लेकिन हर एक उसका स्वागत किया वैसे ही कुछ दल परेशान होंगे लेकिन भविष्य में इसका लाभ सभी राजनीतिक दलों को अवश्य मिलेगा। 

इसलिए राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री जी को सूचना का अधिकार यानी RTI को तवज्जों देते हुए इसे मंजूरी देते हुए सभी राजनीतिक दलों को इसके दायरे में लाकर नई क्रांति का बिगुल बजा देना चाहिए।

 

Sunday, 27 November 2016

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस खारघर पीडित कुटुंबियांस भेटले

संपूर्ण देशात गाजलेल्या खारघर येथील डे केअर प्रकरणास जलद न्यायालयात चालविणार आणि याबाबतीत धोरण बनविण्याचे आश्वासन मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस यांनी रविवारी पीडित कुटुंबियांस दिले.

नवी मुंबईतील 10 महिन्याच्या बाळाला मारणे, आपटणे आणि लाथाने मारण्याचा प्रकार उघडकीस आला. पोलिसांनी मालक आणि आयास अटक केली. या प्रकाराची तक्रार 10 महिन्याच्या बाळाची आई रुचिता आणि वडील रजत सिन्हा यांनी केली होती.

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस हे रविवारी सह्याद्रि गेस्ट हाउसमध्ये खारघर प्रकरणात 10 महिन्याच्या मुलीची आई रुचिता सिन्हा यांस भेटले. त्यांच्यासोबत आरटीआय कार्यकर्ता अनिल गलगली, पंकज जायसवाल, आशीष मजाटिया, रुसित पटेल, योगेश सिंह बरोबर होते. रुचिता सिन्हा यांनी मुख्यमंत्र्यांस संपूर्ण प्रकरण सविस्तर सांगितले आणि प्रकरणास जलद न्यायालयात चालविण्याची मागणी केली. डे केअरचे मालिक आणि आया यांस कडक शिक्षा करत अश्याप्रकारच्या डे केअर केंद्रावर धोरण बनविण्याची मागणी केली.  मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस यांनी सहानभूती दाखवित आश्वासन दिले की आरोपीस सोडले जाणार नाही. या प्रकरणास जलद न्यायालयात घेण्याची आणि नियामक बनविण्यासाठी महिला आणि बाल विकास मंत्रालयास आवश्यक सूचना देण्याचे आदेश दिले.

Maharashtra CM met Kharghar Victim family & assured Justice

Chief Minister Maharashtra Devendra Fadanvis Met  Ruchita Sinha mother of child who has abuse at  Kharghar day care centre . Shri Fadanvis assured the family that this case will be taken on Fast Track Court and  ensure Justice .

In a shocking incident, a 10-month-old girl was allegedly beaten up and kicked at a creche in Navi Mumbai's Kharghar by a caretaker, who along with the day care centre owner has been arrested. The incident came to light when the CCTV footage of Purva Play School and Creche, a day care centre for children at Kharghar in Navi Mumbai, was analysed by the police and the infant's parents.

Infant's Pare along with RTI Activist Anil Galgali, CA Pankaj Jaiswal, Yogesh Singh, Rushit Patel, Ashish Majithia met CM Fadanvis at Sahyadri Guest house. During meeting Chief Minister Devendra Fadnavis has shown his sincereness and litlsten fully and accepted the request and demand of Ruchita Sinha's . Mr Fadanvis assured this case will be taken on Fast Track Court. Justice will be insured and instructed his official to look the matter to bring all Child Play Group and Day Care under regulation soon with involvement of Child & Women Department. Mr Fadanvis has assured full justice and arrest of all culprits soon.

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मिला पीड़ित परिवार

पुरे देश को हिलानेवाली खारघर डे केअर मामले को गंभीरता से लेते हुए इसे फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट ले जाएंगे और नई नीतियां बनाने का ठोस आश्वासन मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने रविवार को पीड़ित परिवार को दिया।

नवी मुंबई के एक क्रेच में एक आया द्वारा 10 महीने की एक बच्ची को कथित रूप से पीटने, पटकने और लात मारने की दिल दहलाने वाली घटना सामने आई है। इस मामले में आया और डे केयर सेंटर की मालिक को गिरफ्तार कर लिया गया है।  10 महीने की बच्ची की मां रुचिता एवं पिता रजत सिन्हा ने इस मामले में शिकायत दर्ज कराई है।

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने रविवार को सह्याद्रि गेस्ट हाउस में 10 महीने की बच्ची की मां रुचिता सिन्हा से मुलाकात की। उनके साथ आरटीआई कार्यकर्ता अनिल गलगली, पंकज जायसवाल, आशीष मजाटिया, रुसित पटेल, योगेश सिंह थे। रुचिता सिन्हा ने मुख्यमंत्री से पुरी दास्ता बयान की और मामले को फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट में चलाने पर जोर दिया। डे केअर के मालिक और आया को कड़ी सजा दिलाने के साथ इसतरह के डे केअर पर नीतियां बनाने की जरुरत बताई। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस मामले को गंभीरता से लेने की बात कहते हुए कहा कि आरोपियों को बख्शा नहीं जाएगा। फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट पर लेकर जाने और नियमन बनाने के लिए महिला बाल विकास मंत्रालय को जरुरी कार्यवाही का आश्वासन दिया।

Friday, 25 November 2016

बंगले के मोह में एकनाथ खडसे बकाया रु 15 .50 लाख कब देंगे?

महाराष्ट्र के भाजपा नेता और पूर्व राजस्व मंत्री एकनाथ खडसे आज भी बंगले के मोह में हैं। मंत्री पद जाने के बाद भी खडसे ने सरकारी निवासस्थान वाला ' रामटेक' बंगला छोड़ा नहीं हैं और उनपर रु 15.50 लाख का बकाया होने की जानकारी आरटीआई कार्यकर्ता अनिल गलगली को सार्वजनिक निर्माण विभाग ने दी हैं।

आरटीआई कार्यकर्ता अनिल गलगली ने सार्वजनिक निर्माण विभाग से पूर्व मंत्री एकनाथ खडसे को आबंटित किया सरकारी बंगला 'रामटेक' की जानकारी मांगी थी। सार्वजनिक निर्माण विभाग ने अनिल गलगली को बताया कि राजस्व मंत्री एकनाथ खडसे ने अब तक 'रामटेक' बंगला वापस नहीं लौंटाया हैं। 4 जून 2016 को इस्तीफे के बाद उन्हें 19 जून 2016 को बंगला रिक्त करना जरुरी थी। पूर्व मंत्रियों को प्रथम 15 दिन सरकारी निवासस्थान मुफ्त होता हैं उसके बाद 3 महीने के लिए सरकारी अनुमति से प्रति वर्ग फुट रु 25/- और उसके बाद आगामी  3 महीने के लिए रु 50/- इतना दंड निश्चित किया हैं। अनिल गलगली की आरटीआई के बाद सरकार ने खडसे को 3 महीने की अनुमति दी थी। पूर्व राजस्व मंत्री एकनाथ खडसे जिस 'रामटेक' बंगले में रहते थे उसके इस्तेमाल पर दिनांक 19 नवंबर 2016 तक का बकाया रु 15,49, 975/- हैं।   सार्वजनिक निर्माण विभाग के मलबार हिल सेवा केंद्र ने दिनांक 17 नवंबर 2016 को सूचित किया हैं कि ना.दा. मार्ग स्थित सरकारी बंगला 'रामटेकएकनाथ खडसे, पूर्व मंत्री ने दिनांक 19 नवंबर 2014 को अपने अधिकार में लिया हैं। आज तक बंगले को रिक्त कर उसे सार्वजनिक निर्माण विभाग को सौंपा नहीं गया हैं।

अनिल गलगली के अनुसार सामान्य प्रशासन विभाग सरकारी निवासस्थान आबंटित करता हैं तो उस बंगले को रिक्त करने की सर्तकता उसी विभाग से लेने की जरुरत होते हुए वे इसे नजरअंदाज करते हैं। खडसे की बकाया राशि उनके वेतन से वसूल करने की मांग अनिल गलगली ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को भेजे हुए पत्र में करते हुए लापरवाही बरतने वाले संबधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने की मांग की हैं ताकि भविष्य में ऐसी गलती नहीं होगी।



एकनाथ खडसेनी ना बंगला सोडला ना रु 15 .50 लाखांची थकबाकी अदा केली

महाराष्ट्रातील भाजपा नेते आणि माजी महसूल मंत्री एकनाथ खडसे यांस अजूनही बंगल्याचा मोह सुटता सुटेना. मंत्री पद गेल्यानंतरही खडसेनी शासकीय निवासस्थान असलेला ' रामटेक' बंगला सोडला नाही आणि रु 15.50 लाखांची थकबाकी न अदा केल्याची माहिती आरटीआय कार्यकर्ते अनिल गलगली यांस सार्वजनिक बांधकाम खात्याने दिली आहे.

आरटीआय कार्यकर्ते अनिल गलगली यांनी सार्वजनिक बांधकाम खात्याकडे माजी मंत्री एकनाथ खडसे यांस वितरित केलेला शासकीय बंगला 'रामटेक' बाबत माहिती विचारली होती. सार्वजनिक बांधकाम खात्याने अनिल गलगली यांस कळविले की माजी महसूल मंत्री एकनाथ खडसे यांनी अद्याप पर्यंत 'रामटेक' बंगला शासनाच्या ताब्यात दिला नाही. 4 जून 2016 रोजी राजीनामानंतर 19 जून 2016 रोजी त्यांस बंगला रिक्त करणे आवश्यक होते. माजी मंत्र्यांस पहिले 15 दिवस शासकीय निवासस्थान निःशुल्क असते त्यानंतर 3 महिन्यासाठी शासनाच्या परवानगीने प्रति वर्ग फुट  रु 25/- आणि त्यानंतर पुढील 3 महिन्यासाठी रु 50/- इतका दंडनीय आकार निश्चित केला आहे. अनिल गलगली यांच्याच आरटीआय नंतर शासनाने खडसे यांस 3 महिन्याची परवानगी दिली होती. माजी महसूल मंत्री एकनाथ खडसे हे वास्तव्य करीत असलेले शासकीय निवासस्थान 'रामटेक' बंगला वापरापोटी असलेली  दिनांक 19 नोव्हेंबर 2016 पर्यंत थकबाकी रु 15,49, 975/- आहे.  सार्वजनिक बांधकामाच्या मलबार हिल सेवा केंद्राने दिनांक 17 नोव्हेंबर 2016 रोजी कळविले आहे की ना.दा. मार्ग येथील शासकीय बंगला 'रामटेक' येथे एकनाथ खडसे, माजी मंत्री यांनी दिनांक 19 नोव्हेंबर 2014 मध्यान्ह पूर्व पासून बंगल्याचा ताबा घेतला असून , अद्यापपर्यंत सदर बंगल्याचा रिक्त ताबा सार्वजनिक बांधकाम विभागाच्या ताब्यात दिलेला नाही.


अनिल गलगली यांच्या मते सामान्य प्रशासन विभाग शासकीय निवासस्थान वितरित करत असून रिक्त करण्याची खबरदारी त्याच विभागाकड़ून करणे अपेक्षित असताना त्या बाबीची दखल घेतली जात नाही. खडसे यांच्या थकबाकीची वसूली त्यांच्या वेतनातून वळते करण्याची मागणी अनिल गलगली यांनी मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस यांस लिहिलेल्या पत्रात करत झालेला निष्काळजीपणा पहाता संबधित अधिका-यांची जबाबदारी निश्चित करण्याची मागणी केली आहे जेणेकरुन भविष्यात अश्या प्रकारची चूक होणार नाही.

Eknath Khadse not Vacate 'Ramtek' nor yet to paid Rs 15.50 Lakhs due rent

Former Minister Eknath Khadse may have resigned from Maharashtra cabinet, but has no qualms on using facilities given to a Minister. Khadse has till to vacate spacious sea-side 'Ramtek' Bungalow, Also not pay Rs 15.50/- Lakhs, the rent arrears due to the Public Works department, An RTI query by RTI Activist Anil Galgali revealed.

Anil Galgali had put up an RTI application demanding to know status of occupation and rent arrears of much sought-after "Ramtek' bungalow on Narayan Dabholkar Road. Public Works department informed Galgali that Ekanath Khadse has not vacated the bungalow, Since he had first occupied it on the afternoon of 19th November 2014. He has been charged rent since his resignation as Minister but has not paid up. These rent arrears due from him have mounted to 15.50/- lakhs and he has not made any payment, Malabar Hill division of PWD informed to PWD Higher Authority.

After his resignation as Revenue Minister, Anil Galgali First who had publicly raised the issue of Khadse illegal occupation of official bungalow. It was imperative for him to vacate the bungalow on 19th June 2016 as he had resigned on 4th June 2016. A minister can use his official residence free for a period of 15 days, from the date that he ceases to be a Minister. After that on obtaining Government permission he can retain the residence for three months on a payment of Rs 25 per square foot. After three months this charge is to be doubled to Rs 50 per sq foot. Khadse had till then not even bothered to obtain necessary permission for his extended stay. Following Galgali's previous intervention, Khadse had been granted permission valid for a period of 3 months. Not much seems to have changed and Khadse has not vacated the Government bunglow, neither has he paid the rent due for it. Arrears due from him as rent stood on Rs 15,49, 975/- as on 19th November 2016.


Anil Galgali has written to the Chief Minister Devendra Fadnavis seeking action against the GAD officials failing in their duty to protect prime Government property from illegal occupation of a politician & Ex Minister. They must be held liable for dereliction of duty and the rent arrears must be deducted from their salaries, Galgali argued.

Monday, 21 November 2016

मॅगसेसे विजेता जोकीम की स्पार्क संस्था मनपा ने किया ब्लैक लिस्ट

मुंबई की झुग्गियों का जीवन बदलने का नजारा विदेश में बताकर आंतरराष्ट्रीय पुरस्कार मॅगसेसे विजेता जोकीम की स्पार्क स्वयंसेवी संस्था और स्पार्क समुदाय निर्माण सहायक संस्था को मनपा ने ब्लैक लिस्ट करने की जानकारी आरटीआई कार्यकर्ता अनिल गलगली को मनपा ने दी हैं। स्पार्क समुदाय निर्माण सहायक संस्था को 24 लाख का दंड ठोंका गया हैं और 26 लाख की डिपॉजिट रकम जब्त की गई हैं।

आरटीआई कार्यकर्ता अनिल गलगली ने मनपा की बस्ती स्वच्छता कार्यक्रम विभाग से मेसर्स स्पार्क is संस्था को ब्लैक लिस्ट करने को लेकर जानकारी मांगी थी। मनपा की बस्ती स्वच्छता कार्यक्रम विभाग के उपप्रमुख अभियंता ने अनिल गलगली को ब्लैक लिस्ट करार दिया हुआ पत्र और रिपोर्ट दी। मनपा ने 26 फरवरी 2016 को स्पार्क स्वयंसेवी संस्था और स्पार्क समुदाय निर्माण सहायक संस्था को पत्र भेजकर ब्लैक लिस्ट करने की जानकारी दी।  23 मार्च 2016 को सर्कुलर जारी कर मेसर्स स्पार्क का वेंडर नंबर 4127 और स्पार्क समुदाय निर्माण सहायक संस्था का वेंडर नंबर 14884 के तहत दिया हुआ ठेका और काम को रद्द करते हुए आनेवाले 5 वर्षों के लिए दोनों संस्था को ब्लैक लिस्ट किया हैं।  स्पार्क को किसी भी तरह का नया काम न देने और दिए हुए काम के बिल की रकम रोकने का आदेश जारी किया हैं।


स्पार्कपर दोष दायित्व अवधि में शौचालय की मरम्मत न करने और कछुआ गति से थर्ड क्लास काम का प्रमुख आरोप हैं। इसके अलावा अकार्यक्षमता, समय में  काम पूर्ण न करना, अभियांत्रिकी प्रक्रिया का अनुपालन न करना, दंडात्मक कार्यवाही, अस्पष्ट और असंबद्ध जबाब , स्टाफ की कमी, लेटलतिफी , काम में दोष और फ्रॉड का आरोप भी तय किया गया हैं।  स्पार्क को मनपा के 4 जोन में कुल 66 काम का वर्क आर्डर दिए थे उसमें से 37 काम को स्पार्क ने खुद रद्द करने का अनुरोध किया।  शेष 29 में से सिर्फ 20 काम को पूर्ण किया गया। 9 में 8 काम आज भी पुरे नहीं किए गए हैं और 1 काम आज तक शुरु ही नही हुआ हैं। अनिल गलगली ने मनपा की कार्यवाही का स्वागत किया। मनपा आयुक्त अजोय मेहता को भेजे हुए पत्र में अनिल गलगली ने मांग की हैं कि एक ही स्वयंसेवी संस्था या ठेकेदार को एक साथ काम देने के बजाय मनपा ने वॉर्ड कार्यालय में अलग अलग स्वयंसेवी संस्था को काम दिया तो निश्चित तौर पर काम समय अवधि में पूर्ण होंगे और उसका लाभ स्थानीय जनता को होगा।

मॅगसेसे विजेता जोकीम यांच्या स्पार्क संस्थेस पालिकेने टाकले काळया यादीत

मुंबईतील झोपडपट्टीवासियांचे जीवन बदलण्याचे चित्र परदेशात दाखवित आंतरराष्ट्रीय पुरस्कार मॅगसेसे विजेता जोकीम यांची स्पार्क स्वयंसेवी संस्था आणि कंत्राटदार स्पार्क समुदाय निर्माण सहायक संस्थेस पालिकेने काळया यादीत टाकले असल्याची माहिती आरटीआय कार्यकर्ते अनिल गलगली यांस पालिकेने दिली आहे. कंत्राटदार स्पार्क समुदाय निर्माण सहायक संस्थेस 24 लाखांचा दंड आकारला असून 26 लाखांची अनामत रक्कम जप्त केली आहे.

आरटीआय कार्यकर्ते अनिल गलगली यांस पालिकेच्या वस्ती स्वच्छता कार्यक्रम खात्याकडे मेसर्स स्पार्क या संस्थेस काळया यादीत टाकल्याची विविध माहिती विचारली होती. पालिकेच्या वस्ती स्वच्छता कार्यक्रम खात्याचे उपप्रमुख अभियंता यांनी अनिल गलगली यांस काळया यादीत टाकल्याचे पत्र आणि अहवाल दिला. पालिकेने 26 फेब्रुवारी 2016 रोजी स्पार्क स्वयंसेवी संस्था आणि कंत्राटदार स्पार्क समुदाय निर्माण सहायक संस्थेस पत्र पाठवून काळया यादीत टाकल्याचे कळविले. तसेच 23 मार्च 2016 रोजी परिपत्रक जारी करत मेसर्स स्पार्कचे नोंदणी क्रमांक 4127 आणि स्पार्क समुदाय निर्माण सहायक संस्थेचा नोंदणी क्रमांक 14884 अंतर्गत दिलेली कंत्राटे रद्द करत पुढील 5 वर्षांसाठी काळया यादीत टाकले. स्पार्कस कोणतेही नवीन काम न देण्याचे आणि दिलेल्या कामाची देयके रोखून ठेवण्याचे आदेश जारी केले आहेत.

स्पार्कवर दोष दायित्व कालावधीत शौचालय दुरुस्ती न करण्याचा आणि कासवगतीने दर्जाहीन कामे करण्याचा मुख्य ठपका आहे. तसेच अकार्यक्षमता, वेळेत काम पूर्ण न करणे, अभियांत्रिकी पद्धतीची अवहेलना, दंडात्मक कार्यवाही, अस्पष्ट आणि असंबद्ध उत्तर, स्टाफची कमतरता, उशीरपणा, कामात दोष आणि फसवेगिरीचे आरोप सुद्धा आहे. 3 जानेवारी 2012 ला कार्यादेश जारी करत 30 महिन्यांच्या आत म्हणजे 30 जून 2014 पर्यंत काम पूर्ण करण्याचे उद्दिष्ट देण्यात आले. काम वेळेवर पूर्ण न झाल्यामुळे 30 जून 2015 अशी नवीन 1 वर्षाची मुदतवाढ देण्यात आली होती त्यात सुद्धा स्पार्क अपयशी ठरली. कंत्राटाचा कालावधी 42 महिन्याचा असून या कालावधीत 66 कामांपैकी 37 कामे स्पार्कने करण्यास नकार दिला. 29 पैकी फक्त 20 कामे पूर्ण केली आणि 8 कामे अपूर्ण असून 1 काम अद्यापपर्यंत सुरुच झाले नाही.

अनिल गलगली यांनी पालिकेच्या कार्यवाहीचे कौतुक केले आणि पालिका आयुक्त अजोय मेहता यांस लिहिलेल्या पत्रात मागणी केली आहे की एकाच स्वयंसेवी किंवा कंत्राटदारांस एकाच वेळी कामे देण्याऐवजी पालिकेने वॉर्ड कार्यालय स्तरावर वेगवेगळया स्वयंसेवी संस्थेस कामे दिल्यास कामे वेळेवर पूर्ण होतील आणि त्याचा लाभ स्थानिक नागरिकांना होईल. 

Magsaysay award winner Joakim's NGO SPARC blacklist by BMC


Showing the world how a life is lived in the slums of India, International Magsaysay award winner Joakim has been put in a fix. His NGO Spark and his contractor company Spark Corporation's subsidiary organisation has been blacklisted by the BMC, Its revels in a query filed by RTI Activist Anil Galgali. The Spark Group/Corporation has been slapped with a fine of Rs. 24 lakhs and has forcibly kept the earnest amount of Rs. 26 lakhs with itself, by the BMC.


RTI activist Anil Galgali had asked for the reasons for blacklisting M/s Spark in the Sanitation Department. Deputy Chief Engineer of the Sanitation Department of the BMC submitted the report along with the reasons for blacklisting the Spark Group. The BMC itself had intimated the Spark Group of blacklisting via its letter on the 26th February of 2016. Also on the 23of March 2016 the BMC cancelled the registration number 4127 of the NGO and Spark Group of Subsidiary companies bearing registration number 14884, and the contracts given therein, hence blacklisting the group of the next 5 year. No new work to be awarded, and to withhold the payments to be made were the instructions given by the BMC.


Non completion of the toilet repairs in the defects liability period and doing work at snails pace along with bogus quality were the main reasons for blacklisting the group.Also non-capapiliity and not getting work done in stipulated time,Gross underperformance, Failure of SPARC on part of NGO, Total disregard in following Engineering practices,  Penalized Action, Vague & Irrelevant reply of M/s SSNS, Insufficient Staff, Delays & Delays, Fraudulent Practices, Defect in works are some of the allegations put by the BMC. The work order was awarded on 3 January 2012 with Notice to proceed with the work with time period of 30 months ending on 30 June 2014. With a further extension of 1 year, the contract finally expired on 30 June 2015. Therefore, total contract period was 42 months. In the said 42 months, M/s SPARC & SNS has completed only 20 works with 8 works still in progress as on today.


Anil galgali has praised the efforts and the bold step of the BMC and in his letter to the Commissioner Ajoy Mehta has requested him to allot work at the ward level instead of giving it to one NGO or Contractor which will be more effective in completion of works and give Relief to resident of that area.


Saturday, 19 November 2016

शादी समारोह के लिए 2.50 लाख और किसानों को 50 हजार देने की घोषणा का सर्कुलर नहीं

शादी समारोह के लिए  2.50 लाख और किसानों को 50 हजार देने की घोषणा का सर्कुलर नहीं होने से सभी जगह पर संदेह का माहौल हैं। आरबीआई ने ताबड़तोब सर्कुलर या अधिसूचना जारी करने का आदेश देने की मांग आरटीआई कार्यकर्ता अनिल गलगली ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेजे हुए पत्र में की हैं।


आरटीआई कार्यकर्ता अनिल गलगली ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेजे हुए पत्र में साफतौर पर लिखा हैं कि केंद्र सरकार ने जिनके घर में शादी समारोह हैं उन्हें 2.50 लाख और किसानों को 50 हजार अकाउंट से निकालने की घोषणा भले ही की थी लेकिन बैंक को इसबारे में किसी भी प्रकार की सूचना नहीं दी गई जिससे बँक कर्मचारी और लोगों में संदेह का माहौल बना हुआ हैं। सर्कुलर निकलने की जिम्मेदारी जिन आरबीआई अधिकारियों की हैं उनकी लापरवाही से आम लोग परेशान हैं। उनपर कार्यवाही कर ताबडतोब वरीयता देने का सर्कुलर जारी करने का आदेश देने का अनुरोध अनिल गलगली ने किया है। 

.लग्न समारंभासाठी 2.50 लाख आणि शेतक-यांस 50 हजाराच्या घोषणेचे परिपत्रक नाही

लग्न समारंभासाठी 2.50 लाख आणि शेतक-यांस 50 हजाराच्या घोषणेचे परिपत्रक नसल्यामुळे सर्वत्र गोंधळाचे वातावरण असून याबाबतीत आरबीआय ने ताबडतोब परिपत्रक किंवा अधिसूचना काढण्यास आदेश देण्याची मागणी आरटीआय कार्यकर्ते अनिल गलगली यांनी पंतप्रधान नरेंद्र मोदी यांस पाठविलेल्या पत्रात केली आहे.


आरटीआय कार्यकर्ते अनिल गलगली यांनी पंतप्रधान नरेंद्र मोदी यांस पाठविलेल्या पत्रात नमूद केले आहे की केंद्र शासनाने ज्यांच्या घरात लग्न समारंभ आहेत त्यांस 2.50 लाख आणि शेतक-यांस 50 हजार खात्यातुन काढण्यासाठी घोषणा जरी केली असली तरी बँकेस याबाबतीत कोणतीही सूचना देण्यात आली नाही त्यामुळे बँक कर्मचारी आणि नागरिकांत संभ्रमाचे वातावरण आहे. ही जबाबदारी ज्या आरबीआय अधिका-यांची आहे त्यांच्या निष्काळजीपणाचा फटका सर्वानाच बसला असून त्यावर कार्यवाही करत ताबडतोब प्राध्यानाने या प्रकारचे परि
पत्रक काढण्याचे आदेस देण्याची विनंती अनिल गलगली यांची आहे.

Wedding Ceremony 2.50 lakh and for farmers 50 Thousand declare, but yet to issue circular by RBI

Due to Demonetisation drive, a lot of confusion has gripped the country.  The government announced that those people who have weddings approaching in their immediate family will be allowed to withdraw RS.  2.50 lakh and the farmer of our country will be allowed to withdraw Rs. 50,000 . But till date no such circular or any order has been issued to the banks by the RBI. For this, RTI activist Anil Galgali had written to the Prime minister Narendra Modi for demanding validate government order for the same, to avoid further confusion.


In a letter sent to the Prime minister by Anil Galgali, it is mentioned that since there is no official communication or circular sent by the RBI, for the wedding families and the farmer, both the Bank employees and the people are confused. When the government made such announcement, it was moral responsibility of the RBI officials to immediately issue circular to the Banks. But since it is not done, Galgali has demanded action on those people and requested PM to issue circular with immediate effect.

Wednesday, 16 November 2016

BKC की सफाई करनेवाली मनपा का रु 2.77 करोड़ एमएमआरडीए ने नहीं दिया

मुख्यमंत्री की अध्यक्षतावाली एमएमआरडीए अपने अधिकार वाली सड़कों की सफाई के लिए मनपा पर निर्भर हैं। गत 891 दिन का रु 2 करोड़ 76 लाख 73 हजार 918 रूपये और 67 पैसे  एमएमआरडीए पर बकाया होने की जानकारी आरटीआई कार्यकर्ता अनिल गलगली को महानगरपालिका ने दी हैं।  एमएमआरडीए प्रशासन मनपा की सफाई के बलबूते पर करोड़ों का मुनाफा कमाने से इस बकाया रकम पर ब्याज देने की मांग हो रही हैं। 

आरटीआई कार्यकर्ता अनिल गलगली ने  महानगरपालिका के सांताक्रूझ एच पूर्व कार्यालय से बीकेसी में की गई सफाई की जानकारी मांगी थी। मनपा के घनकचरा विभाग ने अनिल गलगली को बताया कि गत 891 दिन का रु 2 करोड़ 76 लाख 73 हजार 918 रुपए और 67 पैसे आज तक एमएमआरडीए प्रशासन ने अदा नहीं किए हैं। लगातार फॉलो अप करने के बाद एमएमआरडीए प्रशासन के अभियांत्रिकी विभाग के  मुख्य अभियंत ने मनपा को रकम अदा नहीं की ना जबाब देने की जहमत उठाई।   महानगरपालिका ने एमएमआरडीए की हद में स्थित बांद्रा- कुर्ला संकुल यानी बीकेसी के सड़कों की  सफाई यांत्रिक झाडू से करने का काम आरंभ किया। इस काम के लिए मेसर्स केबीए इन्फ्रास्ट्रक्चर अँड क्लीनटेक प्रायव्हेट लिमिटेड (जेव्ही) इस ठेकेदार को मनपा ने नियुक्त किया।  दिनांक 25 मई 2014 से काम शुरु किया गया।  5 वर्ष की अवधि के लिए रोजाना रु 29007 इस दाम से और दूसरे वर्ष 5 प्रतिशत बढ़े हुए दाम से करने का फैसला लिया गया। उसके अलावा सेवा का खर्च 15% पर्यवेक्षण के हिसाब से वसूल करने की कार्यवाही एच पूर्व मनपा वॉर्ड कार्यालय द्वारा करने की जानकारी एमएमआरडीए प्रशासन को 3 जून 2014 को दी गई।


गत 30 महीनों से एमएमआरडीए प्रशासन के अभियांत्रिकी विभाग को 4 बार पत्रव्यवहार करनेवाली मनपा को एक कौड़ी की कींमत नहीं दी गई और फोकट एमएमआरडीए प्रशासन सफाई काम को अंजाम देनेवाली एमएमआरडीए के इस रवैय्ये पर अनिल गलगली ने अचरज जताया। मनपा ने एमएमआरडीए प्रशासन से ब्याज सहित रकम वसूल करने की मांग करते हुए मनपा की रकम देने में लापरवाही बरतने वाले मुख्य अभियंता पर कार्यवाही करने की मांग मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को भेजे हुए पत्र में गलगली ने की हैं। एमएमआरडीए मनपा की सफाई काम पर ही सालाना करोड़ों का मुनाफा कमाने से बकाया रकम पर ब्याज दिया तो एमएमआरडीए का खजाना में कमी नहीं आएगी। ऐसा मत अनिल गलगली ने व्यक्त किया।

BKC स्वच्छ अभियानांतर्गत पालिकेचे 2.77 कोटी एमएमआरडीएने थकविले

मुख्यमंत्री यांच्या अध्यक्षतेखाली असलेली एमएमआरडीए आपल्या अधिकारातील रस्ते सुद्धा स्वच्छ करण्यास अक्षम्य असून पालिकेवर विसंबून आहे. गेल्या 891 दिवसांचे रु 2 कोटी 76 लाख 73 हजार 918 रुपये आणि 67 पैसे येणे बाकी असल्याची माहिती आरटीआय कार्यकर्ते अनिल गलगली यांस महानगरपालिकेने दिली आहे. एमएमआरडीए प्रशासन पालिकेच्या स्वच्छतेच्या जीवावर वर्षाला कोटयावधीचा नफा कमवित असून थकबाकी रक्कमेवर व्याज दिल्यास एमएमआरडीएच्या तिजोरी रिकामी होणार नाही.

आरटीआय कार्यकर्ते अनिल गलगली यांनी महानगरपालिकेच्या सांताक्रूझ एच पूर्व कार्यालयास बीकेसी येथील स्वच्छताबाबत माहिती विचारली होती. पालिकेच्या घनकचरा विभागाने अनिल गलगली यांस कळविले की गेल्या 891 दिवसांचे  2 कोटी 76 लाख 73 हजार 918 रुपये  आणि  67 पैसे अजूनपर्यंत एमएमआरडीए प्रशासनाने अदा केले नाहीत. सतत पाठपुरावा करुनही एमएमआरडीए प्रशासनातील ढिम्म अभियांत्रिकी विभागाच्या मुख्य अभियंतानी पालिकेस रक्कम अदा केली नाही ना उत्तर देण्याचे सौजन्य दाखविले.  महानगरपालिकेने एमएमआरडीए हद्दीतील बांद्रा- कुर्ला संकुल म्हणजे बीकेसी येथील रस्त्यांची सफाई यांत्रिक झाडूने करण्यास सुरुवात केली. याकामासाठी मेसर्स केबीए इन्फ्रास्ट्रुचतुरे अँड क्लीनटेक प्रायव्हेट लिमिटेड (जेव्ही) या कंत्राटदारांस पालिकेने नियुक्त सुद्धा केले. दिनांक 25 मे 2014 पासून काम सुरु करण्यात आले. 5 वर्षाच्या कालावधीकरिता प्रतिदिन रु 29007 या दराने आणि दुस-या वर्षी 5 टक्के वाढीव दराने करण्याचा निर्णय घेण्यात आला तसेच सेवेचा खर्च 15% पर्यवेक्षण असा आकारत वसूल करण्याची कार्यवाही एच पूर्व पालिका वॉर्ड कार्यालयातर्फे करण्याचे एमएमआरडीए प्रशासनास 3 जून 2014 रोजी कळविण्यात आले.


गेल्या 30 महिन्यापासून एमएमआरडीए प्रशासनाच्या अभियांत्रिकी विभागास 4 वेळा पत्रव्यवहार करणा-या पालिकेस कोणतीही किंमत दिली गेली नाही आणि फोकटात एमएमआरडीए प्रशासन स्वच्छता करुन घेत असल्याबद्दल अनिल गलगली यांनी आश्चर्य व्यक्त केले. पालिकेने एमएमआरडीए प्रशासनाकडून व्याजासकट रक्कम वसूल करण्याची मागणी करत पालिकेचे पैसे देण्यास चालढकल करणा-या मुख्य अभियंत्यावर कार्यवाही करण्याची मागणी मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस यांस पाठविलेल्या पत्रात केली आहे. एमएमआरडीए पालिकेच्या स्वच्छतेच्या जीवावर वर्षाला कोटयावधीचा नफा कमवित असून थकबाकी रक्कमेवर व्याज दिल्यास एमएमआरडीएच्या तिजोरी रिकामी होणार नाही, असे मत अनिल गलगली यांनी मांडले.

BMC runs up a bill of Rs 2.77 crore for keeping BKC clean, MMRDA delays payment

MUMBAI : BrihanMumbai Municipal Corporation (BMC) has run up a bill of Rs. 2.77 Crore for sweeping streets under jurisdiction of State body "Mumbai Metropolitan Region Development Authority" (MMRDA). RTI Activist Anil Galgali has appealed to Chief Minister Devendra Fadnavis, Who heads the cash-rich MMRDA, to clear these dues along with interest.

RTI Activist Anil Galgali had put up a RTI application enquiring in to details of cleaning of BKC. Solid waste management department of BMC informed Galgali that Mechanised broom is being used for cleaning BKC and KBA Infrastructure & Cleantech Pvt. Ltd. (JV) has been given this responsibility. BMC's H-East ward office took up the task of cleaning of Bandra-Kurla Complex from 25th May 2014 onwards on a daily fee of Rs 29,007 per day. This arrangement valid for 5 year also provided for additional 15% supervisory charges, with a provision of 5% yearly increment on all dues. MMRDA has not paid-up since and the pending bill for 891 days has now piled up to Rs 2,76,73,918. 67 /-.


All queries on payment of pending payment by H-East ward office have been stonewalled by Engineering department of MMRDA. The Chief Engineer has not even shown the courtesy of a formal reply to four reminders sent by BMC officials. Anil Galgali has demanded action against the Chief Engineer and demanded prompt payment of dues along with interest to the civic body of Mumbai. MMRDA has been making an earning of crores from BKC, with BMC led team toiling hard to keep it clean. It won't hurt cash-rich MMRDA to reimburse the pending bills of Mumbai civic body, Galgali wrote to Chief Minister Devendra Fadnavis.

सरकार और स्टेट बैंक ऑफ इंडिया विजय मल्ल्या को मदद करनेवाली को क्यों बचा रही हैं?



देश से फरार हुआ दिवालिया उद्योगपति विजय मल्या और मेसर्स किंगफिशर एयरलाइन्स लिमिटेड को दिया हुआ लोन और लोन देने के लिए स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के बोर्ड ऑफ़ डायरेक्टर की बैठक में मंजूर प्रस्ताव की जानकारी न देकर सरकार और स्टेट बैंक ऑफ इंडिया विजय मल्ल्या को मदत करनेवाले बड़े आसामियों को  बचाने का आरोप आरटीआई कार्यकर्ता अनिल गलगली ने लगाया हैं।


आरटीआई कार्यकर्ता अनिल गलगली ने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया से जानकारी मांगी थी कि विजय मल्या को दिया हुआ लोन और बोर्ड ऑफ डायरेक्टर की  बैठक में पेश किया हुआ एजेंडा, मंजूर प्रस्ताव और मिनट्स की कॉपी दे। अनिल गलगली के आवेदन पर जबाब देते हुए तनावग्रस्त प्रबंधन शाखा के उप महाप्रबंधक ने बताया कि यह मामला न्यायप्रविष्ठ और जांच प्राधिकरण के समक्ष प्रलंबित हैं। सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 की धारा 8 (ज) अन्वये सूचना देने से इनकार किया गया। इस धारा के अनुसार " जिस जानकारी से अपराधियों की जांच  करना या उसे गिरफ्तार करना या उसपर मुकदमा दायर करने की प्रक्रिया में रुकावट आएगी, ऐसी जानकारी " ताज्जुब की बात यह हैं कि जिस बोर्ड ऑफ डायरेक्टर की बैठक में  विजय मल्या को लोन मंजूर किया गया उस बैठक में उपस्थितों की लिस्ट भी नहीं दी गई।

अनिल गलगली ने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के इस तर्क वाले आदेश के खिलाफ प्रथम अपील दायर की हैं।अनिल गलगली के अनुसार  विजय मल्या जैसे दिवालियों को जिन अधिकारियों ने मदद की हैं उनके नाम को सार्वजनिक करने के लिए बोर्ड ऑफ डायरेक्टर की बैठक में पेश किया हुआ एजेंडा, मंजूर प्रस्ताव और मिनिट्स की जानकारी इसलिए महत्वपूर्ण हैं क्योंकि मल्या तो दोषी हैं लेकिन उन्हें मदद करनेवाले स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के वरिष्ठ अधिकारी भी जो जनता के पैसे सुरक्षित रखने में असफल हुए हैं और जिन्हें आजतक गिरफ्तार नहीं किया गया हैं । विजय मल्ल्या को मदत करनेवाले बड़े आसामियों का नाम सार्वजनिक न करने में कौनसा बड़ा राष्ट्रीय हित प्रभावित होगी? 

सरकार आणि स्टेट बैंक ऑफ इंडिया विजय मल्ल्यास मदत करणा-या का वाचवित आहे?



देशातून फरार झालेला दिवाळखोर उद्योगपति विजय मल्या आणि मेसर्स किंगफिशर एयरलाइन्स लिमिटेड यांस दिलेले कर्ज आणि कर्ज देण्यासाठी स्टेट बैंक ऑफ इंडियाच्या बोर्ड ऑफ़ डायरेक्टरच्या बैठकीत मंजूर प्रस्तावाची माहिती न देता सरकार आणि स्टेट बैंक ऑफ इंडिया विजय मल्ल्यास मदत करणा-याला बड्या धेंडास का वाचवित आहे? असा सवाल आरटीआय कार्यकर्ते अनिल गलगली यांनी केला आहे.

आरटीआय कार्यकर्ते अनिल गलगली यांनी स्टेट बैंक ऑफ इंडियाकडे माहिती मागितली होती की विजय मल्या यांस दिलेले एकूण कर्ज आणि बोर्ड ऑफ डायरेक्टरच्या बैठकीत सादर केलेला एजेंडा, मंजूर प्रस्ताव आणि इतिवृत्तांताची प्रत दयावी. अनिल गलगली यांच्या अर्जावर उत्तर देत तनावग्रस्त मत्ता व्यवस्थापन शाखेचे उप महाव्यवस्थापक यांनी कळविले की सदर प्रकरण न्यायप्रविष्ठ आणि चौकशी प्राधिकरणाकडे प्रलंबित आहे. माहितीचा अधिकार अधिनियम 2005 चे कलम 8 (ज) अन्वये नाकारण्यात येत आहे. सदर कलम असे सांगते की " ज्या माहितीमुळे अपराध्यांचा तपास करणे किंवा त्यांना अटक करणे किंवा त्यांच्यावर खटला दाखल करणे या प्रक्रियांमध्ये अडथळा येईल, अशी माहिती " विशेष म्हणजे बोर्ड ऑफ डायरेक्टरच्या बैठकीत  उपस्थित असलेल्या सर्वाची नावे आणि पदनाम ही माहिती सुद्धा दिली नाही.

अनिल गलगली यांनी स्टेट बैंक ऑफ इंडियाच्या या युक्तीवादाच्या आदेशाविरोधात प्रथम अपील दाखल केले आहे. विजय मल्या सारख्या दिवाळखोरांस ज्या अधिका-यांनी मदत केली आहे त्यांची नावे उघडकीस आणण्यासाठी बोर्ड ऑफ डायरेक्टर यांच्या बैठकीत सादर झालेला एजेंडा, मंजूर प्रस्ताव आणि इतिवृत्तांताची माहिती मिळणे आवश्यक आहे कारण मल्या हे तर दोषी आहेत पण त्यांस मदत करणा-या स्टेट बैंक ऑफ इंडियाच्या वरिष्ठ सुद्धा तेवढेच. कारण जनतेचे पैसे सुरक्षित ठेवण्यात यांस अपयश आले आहे आणि ज्यांस आजपर्यंत अटक झाली नाही. सदर माहिती सार्वजनिक झाल्यास विजय मल्ल्यास मदत करणा-या बड्या धेंडाची नावे सार्वजनिक न करण्यात कोणते राष्ट्रीय हित जपले आहे, असा प्रश्न अनिल गलगली यांनी विचारला आहे.

How govt and SBI are protecting those who helped Vijay Mallya


It is disturbing to note that the Sbi has written of the loans given by it to Vijay Mallya. Since May this year RTI Activist Anil Galgali had filed a RTI seeking details of the Agenda and Minutes of the meeting where the decision was taken to give a loan to Mallya. In spite of six months Sbi is just not ready to give any details. It makes me wonder what national interest is being served by not disclosing these details, said Galgali.  The reason SBI is not giving the details we have asked because it would reveal the names of the people and the role they played in clearing Mallyas loan, add Galgali.


RTI Activist Anil Galgali had sought information from the State Bank of India about the total quantum of loan extended to Vijay Mallya and also the details of the Board of directors meetings such as Agenda, proposal, approvals and the Minutes of the meeting in which the loan proposals were sanctioned. In a response to the query the Deputy General Manager and Public Information Officer of the Stressed Assets Management Branch informed that the case is subjudice and is pending before the enquiry commission and deriving exemption from disclosure under Section 8(1)(h) of Right to Information Act. Section indicated that the information which would impede the process of investigation or apprehension or prosecution of offenders, the information was refused, surprisingly they also refused to reveal the names of the persons and their designation, who attended the Board of Directors meeting.