Monday, 14 August 2017

15 वर्ष से अटका कुर्ला सबवे दिवाली के पूर्व शुरु होगा

बहुप्रतिक्षित कुर्ला पूर्व और पश्चिम को जोड़नेवाला ऐसा कुर्ला सबवेे का काम लगभग पूर्ण हुआ है औए दीवाली के पहले आम लोगों के लिए खुलेगा। मध्य रेलवे ने  3.84 करोड़ अबतक खर्च किया हैं वहीं मध्य रेलवे ने 2.11 करोड़ और मनपा 2.94 करोड़ ऐसे कुल मिलाकर  5.05 करोड़ खर्च किए हैं।

 

कुर्ला सबवेे का काम यह पिछले 15 वर्षो से प्रलंबित हैं। मनपा और मध्य रेलवे में आपसी समन्वय न होने के चलते काम अटक गया था। मनपा के मुख्य अभियंता एस ओ कोरी ने बताया कि कुर्ला सबवे की कुल लंबाई 129.90 मीटर, चौड़ाई 7.60 मीटर और उंचाई 2.60 मीटर इतनी हैं। मनपा ने सिर्फ पश्चिमी छोर का अप्रोच रोड़ का काम किया हैं जिसका कुल  खर्च रु. 2 करोड़ 94 लाख 88 हजार 383 हैं।  यह काम करने के लिए मे.जे.एल.कंस्ट्रक्शन कंपनी की नियुक्ती की गई हैं। काम शुरु करने की तारीख 15 फरवरी 2016 थी।  अबतक रेलवे प्रशासन ने रु. 3 करोड़ 84 लाख 43 हजार रकम खर्च की हैं।  सोलापूर की मेसर्स महेश रुपचंदाणी कंपनी ने दिनांक 21 अक्तूबर 2014 को काम शुरु किया था।  इसका काम मध्य और हार्बर रेलवे की पटरियों से तले हो रहा हैं।

अनिल गलगली के अनुसार करोड़ों का खर्च करने के बाद भी पिछले 15 वर्षों से कुर्ला सबवे शुरु नहीं हो पाया हैं। कुर्ला सबवे शुरु होते ही उसका लाभ हजारों पैदल चलनेवाले नागरिकों को तो होगा ही साथ ही में रेलवे की दुर्घटना की संख्या में गिरावट आने में मदद होगी, ऐसा विश्वास अनिल गलगली ने व्यक्त किया हैं।

15 वर्षे रखडलेला कुर्ला सबवे दिवाळी पूर्व सुरु होणार

बहुप्रतिक्षित असा कुर्ला पूर्व आणि पश्चिमेला जोडणारा असा कुर्ला सबवे चे काम जवळपास पूर्ण झाले असून दिवाळीच्या आधी तो नागरिकांसाठी सुरु होईल. मध्य रेल्वेने 3.84 कोटी आतापर्यंत खर्च केले असून आता मध्य रेल्वे 2.11 कोटी आणि पालिका 2.94 कोटी असे 5.05 कोटी खर्च केले आहे.

कुर्ल्याचा सबवे चे काम हे गेल्या 14 वर्षापासून प्रलंबित आहे. पालिका आणि मध्य रेल्वेच्या समन्वयाच्या अभावी काम रखडलेले होते. आरटीआय कार्यकर्ते अनिल गलगली यांनी सतत केलेल्या पाठपुराव्यानंतर कुर्ला सबवे जवळपास पूर्ण झाला आहे. पालिकेचे मुख्य अभियंता एस ओ कोरी यांनी कळविले की सबवेची एकूण लांबी 129.90 मीटर, रुंदी 7.60 मीटर आणि उंची 2.60 मीटर इतकी आहे.  पालिकेने फक्त पश्चिमेकडील पोहोचमार्गाचे काम केले असून त्याचा एकूण खर्च रु. 2 कोटी 94 लाख 88 हजार 383 झाला आहे. हे काम करण्यासाठी मे.जे.एल.कंस्ट्रक्शन कंपनीची नेमणूक करण्यात आली होती. काम 15 फेब्रुवारी 2016 रोजी सुरु झाले असून कामाचा कालावधी 9 महिन्याचा (पावसाळा वगळून) होता. आतापर्यंत रेल्वेने रु. 3 कोटी 84 लाख 43 हजार रक्कम खर्च केले आहे.  सोलापूर येथील मेसर्स महेश रुपचंदाणी ने दिनांक 21 ऑक्टोबर 2014 रोजी काम सुरु झाले होते. सबवे चे काम मध्य आणि हार्बर रेल्वेच्या खालील भागात होत आहे.

अनिल गलगली यांच्या मते कोटयावधीचा खर्च करुनही गेल्या 15 वर्षापासून कुर्ला सबवे सुरु होऊ शकला नाही. कुर्ला सबवे सुरु होताच याचा लाभ हजारों पादचा-यांस होईल आणि रेल्वे दुर्घटनेत घट होण्यास मदत मिळेल, असा विश्वास अनिल गलगली यांनी व्यक्त केला.

Delayed by 15 years, Kurla Subway to be ready for use before Diwali

Construction of Subway passing underneath Kurla station work almost completed. Delayed by 15 years, Kurla Subway to be ready for use before Diwali.

RTI Activist Anil Galgali continue follow-up with this issue and now Kurla Subway work fully completed. This time Railway and Mumbai Municipal Corporation have teamed up to finish the indefinitely delayed Project, Entailing a fresh cost Rs 5.05 crores. On completion this subway will provide a much needed link between the East & West side to one of the busiest suburban thoroughfares in Mumbai.

M/s  Mahesh Roopchandani of Solapur have been awarded the contract of construction by the Railways. Central Railway is to provide an additional fund of Rs 2.11 crores for completion of the project. On 21 October 2014 work starts by Contractor.  Central Railway had earlier spent Rs 3.84 crores on 129.9 metre on construction of a tunnel running under Main and Harbour Railway lines. This 7.60 metre wide tunnel with a height of 2.6 metres was constructed years ago, lay incomplete.

BMC had been entrusted the responsibility of construction of approach road to the western side of Subway, which alone would cost Rs 2.94 crores. Work has already officially begun on February 2016 and almost completed, said S O Kori, Chief Engineer of MCGM.

"This uncompleted project had proved to be stupendous waste of resources, not put to use even after having spend Crores. I hope it will be completed now providing relief to common public, Also bringing down figures of deaths occurring during crossing of rail tracks", Galgali said.

Friday, 11 August 2017

मुंबई के किसानों की लिस्ट सरकार के पास नहीं

छ्त्रपती शिवाजी महाराज किसान सम्मान योजना अंतर्गत मुंबई शहर और मुंबई उपनगर स्थित किसानों की नाम के साथ वाली लिस्ट सरकार के रेकॉर्ड न होने का चौंकाने वाला क़बूलनामा महाराष्ट्र सरकार ने आरटीआई कार्यकर्ता अनिल गलगली को उपलब्ध कराई हुई जानकारी में किया हैं। मुंबई में 813 किसान होने की जानकारी मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने जाहीर करने के बाद सभी स्तर से आश्चर्य व्यक्त हुआ था। 

आरटीआई कार्यकर्ता अनिल गलगली ने महाराष्ट्र सरकार से छ्त्रपती शिवाजी महाराज किसान सम्मान योजना अंतर्गत मुंबई शहर और मुंबई उपनगर स्थित किसानों की नाम वाली लिस्ट मांगी थी।  महाराष्ट्र सरकार के सहकार मार्केटिंग और वस्त्रोद्योग विभाग के जन सूचना अधिकारी दि. म. राणे ने अनिल गलगली को बताया कि राज्यस्तरीय बँकर्स समिती से सरकार को जानकारी  प्राप्त थी। उसी के तहत मुंबई शहर में 694 किसानों के पास बकाया कर्ज रु 45.04 करोड़ और मुंबई उपनगर में 119 किसानों के पास बकाया  कर्ज रु 0.12 होने की जानकारी मोटे तौर पर बताई गई थी।  मुंबई शहर और मुंबई उपनगर स्थित किसानों की नाम वाली लिस्ट सरकार के रेकॉर्ड पर उपलब्ध नहीं हैं। यह जानकारी संबंधित बैंकों के पास उपलब्ध हैं।

राज्य सरकार ने किसानो की कर्जमाफी निर्णय लेने के बाद सभी किसानों की लिस्ट सार्वजनिक की थी। इसी दौरान मुंबई में किसान होने को लेकर उसे लेकर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सवाल करते हुए जांच कर कर्जमाफी देने का स्पष्टीकरण मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने किया था। अनिल गलगली के अनुसार सरकार के पास लिस्ट ही न होते हुए मोटे तौर पर उपलब्ध जानकारी मुख्यमंत्री को देना, यह प्रशासकीय कामकाज के नजरिए गंभीर मामला हैं। 

मुंबईतील शेतकऱ्यांची नावासहित यादी शासनाकडे नाही

छ्त्रपती शिवाजी महाराज शेतकरी सम्मान योजना अंतर्गत मुंबई शहर आणि मुंबई उपनगर येथील शेतकऱ्यांची नावासहित यादी शासनास्तरावरील अभिलेखात उपलब्ध नसल्याची धक्कादायक कबूली आरटीआय कार्यकर्ते अनिल गलगली यांस महाराष्ट्र शासनाने दिली आहे. मुंबईत 813 शेतकरी असल्याची आकडेवारी मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस यांनी जाहीर केल्यानंतर सर्वत्र आश्चर्य व्यक्त झाले होते.

आरटीआय कार्यकर्ते अनिल गलगली यांनी महाराष्ट्र शासनाकडे छ्त्रपती शिवाजी महाराज शेतकरी सम्मान योजना अंतर्गत मुंबई शहर आणि मुंबई उपनगर येथील शेतकऱ्यांची नावासहित यादी मागितली होती. महाराष्ट्र शासनाच्या सहकार पणन व वस्त्रोद्योग विभागाचे जन माहिती अधिकारी दि. म. राणे यांनी अनिल गलगली यांस कळविले की राज्यस्तरीय बँकर्स समितीकडून शासनाकडे माहिती प्राप्त होते. त्यानुसार मुंबई शहर येथे 694 शेतकऱ्यांकडे थकीत कर्ज रु 45.04 कोटी व मुंबई उपनगर येथे 119 शेतकऱ्यांकडे थकीत कर्ज रु 0.12 कोटी असल्याने ढोबळमानाने कळविण्यात आले होते. मुंबई शहर आणि मुंबई उपनगर येथील शेतकऱ्यांची नावासहित यादी शासनास्तरावरील अभिलेखात उपलब्ध नाही. सदरची माहिती संबंधित बँकांकडे उपलब्ध आहे.

राज्य सरकारने शेतकऱ्यांच्या कर्जमाफीचा निर्णय घेतल्यानंतर सर्व शेतकऱ्यांची यादी नुकतीच जाहीर करण्यात आली. दरम्यान, मुंबईत शेतकरी आहेत का, असा प्रश्न मलाही पडला होता. मी तसे अधिकाऱ्यांना विचारलेही. मात्र चौकशी करुनच कर्जमाफी दिली जाणार असल्याचे स्पष्टीकरण मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस यांनी दिले होते. अनिल गलगली यांच्या मते शासनास्तरावर यादीच नसतानाही ढोबळमानाने आलेल्या माहितीची शहानिशा न करता मुख्यमंत्र्यांस सादर करण्यात आली होती, ही बाब प्रशासकीय दृष्टीकोणातून फारच गंभीर आहे.

No records of the Mumbai Farmers with Govt

In a shocking information provided to RTI Activist Anil Galgali, the government has confirmed that it does not have records of the names of the Farmers covered under the Chattrapati Shivaji Maharaj Farmers Welfare scheme in Mumbai city and Mumbai suburbs. The declaration by CM Devendra Fadnavis that 813 farmers belonging to Mumbai were included in the Farmers loan waiver scheme had surprised everyone.

RTI Activist Anil Galgali had sought information from the government seeking details along with names of the Mumbai Farmers figuring as beneficiaries of the loan waiver scheme under the Chattrapati Shivaji Maharaj Farmers Welfare scheme. Shri D M Rane, Public Information Officer of the Maharashtra Govts, Cooperation, Marketing and Textiles department informed Galgali that, the govt receives information from the State level Bankers Committee and according to that information, 694 Farmers from Mumbai city have outstanding loans amounting to Rs 45.04 crores and 119 farmers from Mumbai Suburbs have a outstanding loans amounting to Rs 0.12 crores in the basis of assumption. The government does not have the list of farmers with their names and the list is with the bankers.

The State government which had announced the loan waiver scheme for farmers had recently released the list of names of the beneficiaries. I too had apprehension about the presence of farmers in Mumbai, hence I sought the information from the government. CM Devendra Fadnavis had announced and assured that the loan waiver will be given only after detailed inquiry and cross check. The government doesn't have any list on its records and without cross verification and due diligence by the authorities, CM Devendra Fadnavis was given the data on  assumption is a very serious lapse in the administration front, expressed Anil Galgali.

Saturday, 5 August 2017

रोजाना 7 पेड़ों को कांटने की अनुमति देती हैं मनपा

महाराष्ट्र सरकार 4 करोड़ पेड़ लगाने का संकल्प लेकर मैदान में तो उतरी हैं लेकिन मुंबई जैसे शहर में रोजाना 7 पेड़ों को अधिकृत तौर पर कांटने की अनुमति स्वयं मनपा द्वारा देने का खुलासा आरटीआई कार्यकर्ता अनिल गलगली को गार्डन विभाग ने मुहैय्या कराए दस्तावेजों से हो रहा हैं।

आरटीआई कार्यकर्ता अनिल गलगली ने गार्डन विभाग से गत 3 वर्षों में मनपा द्वारा पेड़ों की कटाई की अनुमति की जानकारी मांगी थी। गार्डन विभाग उप अधीक्षक ने अनिल गलगली को वर्ष 2014, वर्ष 2015 और वर्ष 2016 में काटे गए, पुर्नरोपित और बरकरार रखे पेड़ों की संख्या दी। गत 3 वर्षों में कुल 7842 पेड़ कांटे गए। 13070 पेड़ पुर्नरोपित किए गए और 28787 पेड़ बरकरार रखे गए हैं। 3 वर्षों में सर्वाधिक 3819 पेड़ वर्ष 2016 में काटे गए, इनमें 1830 निजी, 1448 सरकार और 541 मनपा ने विभिन्न कामों के लिए तोड़ दिए। उसके बाद 2720 पेड़ वर्ष 2015 और 1303 पेड़ वर्ष 2014 में काटे गए। मनपा का दावा हैं कि 3 वर्षो में कुल 13070 पेड़ पुर्नरोपित किए गए जिनमें वर्ष 2015 सर्वाधिक 5054 पेड़ निजी, सरकार और मनपा ने पुर्नरोपित किए। वर्ष 2016 में यह आंकड़ा घटकर 3770 हुआ हैं। मनपा और एक दावा किया हैं कि गत 3 वर्षों में कुल 49060 वृक्षारोपण हुआ हैं। वर्ष 2014 में 14253 की संख्या बढ़कर वर्ष 2015 में 16157 हुई और वर्ष 2016 में इसमें इज़ाफ़ा होते हुए यह संख्या 18650 तक जा पहुंची हैं। 

अनिल गलगली का मानना हैं कि हर कोई विकास के नाम पर पेड़ काटने में अधिक रुचि रखता हैं। मनपा की वृक्ष प्राधिकरण कमिटी जब चाहे जिसे भी इसकी अनुमति देने से आंकड़ों में इजाफा हो रहा हैं जो अप्रत्यक्ष ग्रीन मुंबई के अभियान के लिए घातक हैं। इसलिए जिस इलाके के पेड़ काटने को लेकर आवेदन आते ही जब निरीक्षण किया जाता हैं तो स्थानीय लोगों को आमंत्रित कर निर्णय लिया जाए ताकि बेफिजूल काटे जानेवाले पेड़ों को बचाया जा सकता हैं।