Monday, 15 January 2018

अमिताभ बच्चन का अवैध निर्माण को मनपा ने किया नियमित

महान अभिनेता अमिताभ बच्चन के अलावा और  6 रसूखदारों का अवैध निर्माण को मनपा ने  नियमित करने की जानकारी आरटीआई कार्यकर्ता अनिल गलगली को पी दक्षिण मनपा वॉर्ड कार्यालय के पद निर्देशित अधिकारी और सहायक अभियंता ने एक पत्र के द्वारा दी हैं।  

आरटीआई कार्यकर्ता अनिल गलगली को भेजे हुए पत्र में पी दक्षिण मनपा वॉर्ड कार्यालय के पद निर्देशित अधिकारी और सहायक अभियंता ने साफ़ किया हैं कि अमिताभ बच्चन और अन्य लोगों ने किया हुआ अवैध निर्माण को  एमआरटीपी 53(1) कानून के तहत नोटीस जारी की थी। उसके बाद मालिक /निवासी/विकासक की ओर  से आर्किटेक्ट शशांक कोकीळ अँड असोसिएट्स ने  दिनांक 5 जनवरी  2017 को मंजूर प्लान में जो काम नहीं था इसे  मंजूर करने के लिए संशोधित प्लान मंजुरी के लिए कार्यकारी अभियंता, इमारत प्रस्ताव ( पश्चिम उपनगर ), पी विभाग के समक्ष पेश किया था उसके बाद कार्यकारी अभियंता, इमारत प्रस्ताव ( पश्चिम उपनगर ), पी विभाग की ओर से अवैध निर्माण को नियमित किया गया।

गोरेगांव पूर्व येथे 7 बंगले आहेत. पी दक्षिण मनपा कार्यालय ने अमिताभ बच्चन, राजकुमार हिराणी, ओबेरॉय रियालिटी, पंकज बलानी, हरेश खंडेलवाल, संजय व्यास, हरेश जगतानी ऐसे 7 लोगों को मंजूर प्लान नुसार जांच में पाई अनियमितता को पूर्ववत करने के लिए एमआरटीपी की नोटीस 7 दिसंबर 2016 को जारी की।  एमआरटीपी की नोटीस के बाद आर्किटेक्ट शशांक कोकील ने 5 जनवरी 2017 को पेश किया प्रस्ताव 17 मार्च 2017 को इमारत व प्रस्ताव विभाग ने नामंजुर कर दिया इसको लेकर इमारत व प्रस्ताव विभाग ने 11 अप्रैल 2017 को पी दक्षिण कार्यालय को अधिकृत तौर पर जानकारी देते ही 6 मई 2017 को पी दक्षिण कार्यालय ने अंतिम आदेश जारी करते हुए अवैध निर्माण स्वयं से निकालने की हिदायत दी। इसके बाद आर्किटेक्ट शशांक कोकील ने दोबारा प्रस्ताव पेश किया।

अनिल गलगली ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और मनपा आयुक्त अजोय मेहता को पत्र भेजकर ताबडतोब एमआरटीपी कानून के तहत कारवाई करते हुए अवैध निर्माण को तोड़ने की मांग की थी लेकिन इस अवैध निर्माण को नियमित करने के लिए ही मनपा ने एमआरटीपी प्रक्रिया को धीमी करने का आरोप अनिल गलगली ने लगाया हैं। इमारत प्रस्ताव विभाग के कुछ अधिकारियों को अवैध निर्माण को  नियमित करने के प्रयास को सफलता मिलने की टिप्पणी अनिल गलगली ने की हैं। ग़रीबों की झोपडी पर बुलडोजर चलनेवाली  मुंबई महानगरपालिका रसूखदारों के अवैध निर्माण को नियमित करने में स्वयं को धन्य मानती हैं। इसपर अनिल गलगली ने नाराजगी जताई हैं।

अमिताभ बच्चन यांचे अनधिकृत बांधकामास पालिकेने केले नियमित

महान अभिनेता अमिताभ बच्चन यांच्या सहित अन्य 6 मोठ्या धेंड्यानी केलेले बांधकाम पालिकेने नियमित केल्याची माहिती आरटीआय कार्यकर्ते अनिल गलगली यांस पी दक्षिण पालिका वॉर्ड कार्यालयाचे पद निर्देशित अधिकारी आणि सहायक अभियंता यांनी पत्राद्वारे कळविली आहे. 

आरटीआय कार्यकर्ते अनिल गलगली यांस पाठविलेल्या पत्रात पी दक्षिण पालिका वॉर्ड कार्यालयाचे पद निर्देशित अधिकारी आणि सहायक अभियंता यांनी स्पष्ट केले की अमिताभ बच्चन आणि अन्य लोकांनी केलेले अनधिकृत बांधकामास एमआरटीपी 53(1) कायद्या अंतर्गत नोटीस बजाविण्यात आली होती. त्यानंतर मालक/रहिवाशी/विकासक यांच्यातर्फे वास्तुविशारद शशांक कोकीळ अँड असोसिएट्स यांनी दिनांक 5 जानेवारी 2017 रोजी मंजूर आराखड्यात नसलेल्या बाबी मंजूर करण्याकामी सुधारित आराखडे मंजुरीकरिता कार्यकारी अभियंता, इमारत प्रस्ताव ( पश्चिम उपनगरे), पी विभाग यांच्याकडे सादर केले होते त्यानंतर कार्यकारी अभियंता, इमारत प्रस्ताव ( पश्चिम उपनगरे), पी विभाग यांच्याकडून अनधिकृत बांधकाम नियमित करण्यात आलेले आहे.

गोरेगांव पूर्व येथील 7 बंगला आहेत. अमिताभ बच्चन, राजकुमार हिराणी, ओबेरॉय रियालिटी, पंकज बलानी, हरेश खंडेलवाल, संजय व्यास, हरेश जगतानी अश्या 7 लोकांना मंजूर आराखडयानुसार आढळून आलेल्या अनियमितता पूर्ववत करण्यासाठी एमआरटीपीची नोटीस 7 डिसेंबर 2016 बजावली होती. एमआरटीपीची नोटीसनंतर वास्तुविशारद शशांक कोकीळ यांनी 5 जानेवारी 2017 रोजी सादर केलेला प्रस्ताव 17 मार्च 2017 रोजी इमारत व प्रस्ताव खात्याने नामंजुर केला. याबाबत इमारत व प्रस्ताव खात्याने 11 एप्रिल 2017 रोजी पी दक्षिण कार्यालयास रीतसर माहिती देताच 6 मे 2017 रोजी पी दक्षिण कार्यालयाने अंतिम आदेश जारी करत अनधिकृत बांधकाम स्वतःहुन काढण्याची तंबी दिली. यानंतर वास्तुविशारद शशांक कोकीळ यांनी दुसऱ्यादा प्रस्ताव सादर केला होता.

अनिल गलगली यांनी मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस आणि पालिका आयुक्त अजोय मेहता यांस पत्र पाठवून ताबडतोब एमआरटीपी कायदा अंतर्गत कार्यवाही करण्याची मागणी करत अनधिकृत बांधकामे तोडण्याची मागणी केली होती पण या अनधिकृत बांधकामास नियमित करण्यासाठी वेळखाऊ धोरण पालिकेने अवलंब करण्याचा आरोप अनिल गलगली यांनी केला आहे. इमारत प्रस्ताव खात्यातील काही अधिका-यांस अनधिकृत बांधकाम नियमित करण्याच्या प्रयत्नाला यश आले असल्याची टीका अनिल गलगली यांनी केली आहे.गरिबांच्या झोपडीवर बुलडोझर चालविणारी मुंबई महानगरपालिका बड्या धेंड्याच्या अनधिकृत बांधकामास नियमित करण्यात धन्यता मानते, अशी खंत अनिल गलगली यांनी व्यक्त केली आहे.

BMC regularises illegal modification in Amitabh Bachchan's Goregaon  bungalow.

The Mumbai Municipal corporation has regularised the illegal modifications observed in the bungalow belonging to Superstar Amitabh Bachchan and 6 other bigwigs, as per the information provided by the Competent Officer and Asst Engineer of the P South Ward to RTI Activist Anil Galgali.

In a letter sent to RTI Activist Anil Galgali, the competent officer and Asst Engineer P South Ward has informed that, a notice under Section 53(1) of the MRTP Act was issued to Super star actor Amitabh Bachchan and 6 other bigwigs for illegal Construction in their respective bungalows. In response to the notice, Architect Shashank Kokil and Associates representing the Owner/Residents/Developer's submitted a fresh ammended plan on 5th January 2017 to the Executive Engineer (Building Proposal), Western Suburbs, P Ward. The Execution Engineer acting on the application with ammended plans have regularised the violation as per the previous approved plans.

7 bungalow built in Goregaon East locality. The P South Ward Office  Under MRTP have been issued notices  to 7 persons including Amitabh Bachchan, Rajkumar Hirani, Oberoi Realty, Pankaj Balaji, Sanjay Vyas, Haresh Khandelwal , Haresh Jagtani etc on 7th December 2016,  for the variations observed in contrast of the Approved plans. On receiving the MRTP notices, the Architect Shashank Kokil submitted proposal on 5th January 2017 which was rejected by the MCGM's Building Proposal department on 17th March 2017. This rejection was conveyed to the Architect vide it's letter dt 11th April 2017 along with a copy to P south ward as information and conveying its final order to remove all the illegal construction and violation. The P South Ward Office also issued a final order Dt 6th May 2017 to themselves remove the violation and restore as per Original sanctioned plans. Thereafter the Architect Shashank Kokil resubmitted ammended plans.

Anil Galgali had in a letter addressed to CM Devendra Fadnavis had demanded strict and immediate action under the MRTP Act against the violators and carrying out demolition of the violation. Galgali had also alleged in that letter that several officer's of the department were hand in glove and were adopting delaying tactics for the purpose of securing approvals through regularisation proposal, which seems to have succeeded, alleged Galgali. In a blatant display of disparity, the Mumbai Municipal corporation bulldozes the structure's of the poor Slum dwellers and in the other side works towards regularising the illegal Construction of the Rich and the Powerful, lamented Anil Galgali.

Saturday, 13 January 2018

सतीश शेट्टी हत्या मामले की श्वेतपत्रिका जारी हो

आरटीआई कार्यकर्ता सतीश शेट्टी हत्या की जांच धीमी गति से शुरु हैं इसलिए इस हत्या मामले की श्वेतपत्रिका सरकार और 
सीबीआई से जारी करने की मांग आरटीआई कार्यकर्ता अनिल गलगली ने करते हुए वर्तमान में आरटीआई कानून को और  मजबूत करने की जरुरत बताई। 

आजाद मैदान में आरटीआई एक्टिविस्ट फोरम द्वारा आयोजित सतीश शेट्टी का क्या हुआ ? इस विरोध आंदोलन में अपनी बात रखते हुए अनिल गलगली ने आरटीआई कानून का हर सरकार अपनी अपनी सहूलियत से कैसे इस्तेमाल करती हैं उसका उदाहरण पेश किया।सतीश शेट्टी हत्या मामले पर श्वेतपत्रिका जारी होती हैं तो सरकार और सीबीआई ने किए हुए जांच की जानकारी जनता के सामने आ सकती हैं। सूचना का अधिकार कानून की धारा 4 को प्रत्येक सार्वजनिक प्राधिकरण ने कार्यान्वित किया तो आरटीआई आवेदन की संख्या में कमी होगी और एक क्लिक पर जानकारी उपलब्ध हो । सरकार और बाबू लोग जानबूझकर इसमें रोड़ा डालने का प्रयास करने का आरोप गलगली का हैं। शहीद सतीश शेट्टी के भाई संदीप ने सरकारी यंत्रणा पर विश्वास न होने का आरोप लगाते हुए सूत्रधार और हत्यारों को जेल भेजने तक चुप न बैठने की घोषणा की।मजदूर नेता विश्वास उटगी ने इस कानून की परिधि में निजी और कार्पोरेट संस्थान को लाने की जरुरत बताई।फोरम के अध्यक्ष सुधाकर कश्यप ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को 5 मांग वाला पत्र भेजकर मुख्य सूचना आयुक्त की नियुक्ति करना और निवृत्त न्यायाधीस को वरीयता देने की मांग की। इस मौके पर महाराष्ट्र के पुणे, परभणी, नगर, सांगली इन इलाकों से आरटीआई कार्यकर्ताओं के अलावा स्वाती पाटील, रमेश खानविलकर, शंकर पुजारी, अरुण माने, प्रवीण अरुणकर, क्षीरसागर आदी उपस्थित थे। इस मौके पर सतीश शेट्टी का क्या हुआ, मुख्य सूचना आयुक्त की नियुक्ति हो, निजी और कार्पोरेट संस्थान को आरटीआई के तहत लाया जाए, जैसी घोषणा की गई। 

सतीश शेट्टी हत्या प्रकरणाची श्वेतपत्रिका काढावी

आरटीआय कार्यकर्ते सतीश शेट्टी खूनाचा तपास संथगतीने सुरु असून या हत्या प्रकरणाची श्वेतपत्रिका शासन आणि सीबीआयने काढण्याची मागणी आरटीआय कार्यकर्ते अनिल गलगली यांनी करत आजही आरटीआय कायद्यास अजून बळकट करण्याची गरज असल्याचे प्रतिपादन केले.

आझाद मैदानात आरटीआय ऍक्टिव्हिस्ट फोरमतर्फे आयोजित सतीश शेट्टीचे काय झाले? या निदर्शने प्रसंगी अनिल गलगली यांनी आरटीआय कायदा प्रत्येक सरकार आपआपल्या सोयीने कशा वापरतात याची उदाहरणे दिली. सतीश शेट्टी हत्या प्रकरणाची श्वेतपत्रिका काढली गेली तर सरकार आणि सीबीआयने केलेल्या तपासाची माहिती जनतेसमोर येईल. माहितीचा अधिकार कायदाचे कलम 4 अन्वये देशातील प्रत्येक सार्वजनिक प्राधिकरणाने कार्यान्वित केले तर माहिती अधिकार अर्जाची संख्या कमी होऊ शकते आणि सर्व माहिती एका क्लिकवर उपलब्ध होऊ शकते पण सरकार आणि बाबू मंडळी जाणूनबुजून त्यात अडथळा आणण्याचा प्रयत्न करत असल्याचा आरोप गलगली यांनी केला. शहीद सतीश शेट्टी यांचे बंधू संदीप यांनी सरकारी यंत्रणेवर विश्वास नसल्याची टीका करत खरे सूत्रधार आणि खूनी गजाआड पाठविल्याशिवाय गप्प बसणार नसल्याची घोषणा केली. कामगार नेते विश्वास उटगी यांनी या कायद्याच्या कक्षेत खाजगी आणि कार्पोरेट संस्थानास आणण्याची गरज असल्याचे सांगितले. फोरमचे अध्यक्ष सुधाकर कश्यप यांनी मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस यांस 5 मागण्यांचे पत्र पाठवित मुख्य माहिती आयुक्त नेमणे तसेच निवृत्त न्यायाधीसांस प्राधान्य देण्याची मागणी केली. यावेळी महाराष्ट्रातील पुणे, परभणी, नगर, सांगली या भागातून आरटीआय कार्यकर्ते आले होते. यावेळी स्वाती पाटील, रमेश खानविलकर, शंकर पुजारी, अरुण माने, प्रवीण अरुणकर, क्षीरसागर आदी उपस्थित होते. याप्रसंगी सतीश शेट्टीचे काय झाले, मुख्य माहिती आयुक्त नेमा, खाजगी आणि कार्पोरेट संस्थानास आरटीआय अंतर्गत आणा, अश्या घोषणाही करण्यात आल्यात.

Friday, 12 January 2018

टोईंग सेवा के तहत विदर्भ इन्फोटेक ने कमाया एक वर्ष में 9.22 करोड़ और ट्रैफिक पुलिस ने सिर्फ  5.92 करोड़

मुंबई ट्रैफिक पुलिस ने करोड़ों की कमाई पर पानी छोड़ते हुए निजी कंपनी को टोईंग का ठेका बहाल किया हैं। एका वर्ष में 2 व्हीलर औऱ 4 व्हीलर गाड़ियों से वसूल की गई कुल रकम में से ट्रैफिक पुलिस को सिर्फ 5.92 करोड़ वहीं विवादित मेसर्स विदर्भ इन्फोटेक कंपनी के हिस्से में कुल 9.22 करोड़ रुपए आने की जानकारी आरटीआई कार्यकर्ता अनिल गलगली को सह पुलिस आयुक्त, ट्रैफिक विभाग ने दी हैं।

आरटीआई कार्यकर्ता अनिल गलगली ने सह पुलिस आयुक्त, ट्रैफिक विभाग से टोईंग के लिए मेसर्स विदर्भ इन्फोटेक कंपनी को दिए हुए ठेके की जानकारी मांगी थी। ट्रैफिक कोष के अशोक शिंदे ने अनिल गलगली को बताया कि टोईंग की सेवा दिसंबर 2016 से शुरु की गई हैं। तबसे  30 नवंबर 2017 तक सभी मामलों में कुल रु 5,91,67,800/- इतनी समझौता रकम सरकारी की तिजोरी में जमा हुई हैं। वहीं मेसर्स विदर्भ इन्फोटेक कंपनी ने कर्षित वाहन शुल्क के तौर पर रु 9,22,37,148/- इतनी रकम वसूल की हैं।  वर्ष 2016 के दिसंबर महीने में  404 4 व्हीलर गाड़ियों से समझौता रकम 80,800/- वहीं कर्षित वाहन शुल्क रु 1,85,840/- इतनी रकम वसूल की गई हैं। वहीं वर्ष 2017 के 11 महीने में 1,95,843 जो 2 व्हीलर थी और 99,592 जो 4 व्हीलर थी उनसे समझौता रकम 5,90,87,000/- और कर्षित वाहन शुल्क रु 9,20,51,308/- इतनी रकम वसूल की गई हैं। कुल जमा की गई 15,14,04,948/-  रकम में से  39 प्रतिशत रकम ट्रैफिक पुलिस को और 61 प्रतिशत रकम मेसर्स विदर्भ इन्फोटेक कंपनी को प्राप्त हुई हैं। यह ठेका  75 महीने के लिए हैं और  बँक गारंटी 5 करोड़ की हैं।

अनिल गलगली ने मेसर्स विदर्भ इन्फोटेक कंपनी का निदेशक मंडल की लिस्ट और सालाना ऑडिट की कॉपी मांगी थी। ट्रैफिक पुलिस ने स्पष्ट किया कि ऐसी किसी भी तरह की जानकारी उनके रेकॉर्ड पर नहीं हैं।अनिल गलगली के अनुसार मेसर्स विदर्भ इन्फोटेक कंपनी को कुल रकम से जो हिस्सेदारी दी है रही हैं उस रकम का प्रतिशत और एग्रीमेंट सरकार के लिए घाटे वाला और निजी कंपनी को मुनाफा वाला होने की टिप्पणी अनिल गलगली ने करते हुए इसके पुर्ननिरीक्षण की मांग मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को लिखे हुए पत्र में की हैं।

टोईंग सेवा अन्वये विदर्भ इन्फोटेकने कमविले एका वर्षात 9.22 कोटी तर वाहतूक पोलिसांने फक्त 5.92 कोटी 

मुंबई वाहतूक पोलिसांनी कोटयावधी रुपयांच्या कमाईवर पाणी सोडत खाजगी कंपनीला टोईंगचे कंत्राट बहाल केले आहे. एका वर्षांत दुचाकी आणि चारचाकी गाड्यांकडून वसूल केलेल्या एकूण रक्कमेंपैकी वाहतूक पोलिसांना फक्त 5.92 कोटी तर वादग्रस्त मेसर्स विदर्भ इन्फोटेक कंपनीच्या वाटयाला 9.22 कोटी रुपये आले असल्याची माहिती आरटीआय कार्यकर्ते अनिल गलगली यांस सह पोलीस आयुक्त, वाहतूक विभागाने दिली आहे. 

आरटीआय कार्यकर्ते अनिल गलगली यांनी सह पोलीस आयुक्त, वाहतूक विभागाकडे टोईंगसाठी मेसर्स विदर्भ इन्फोटेक कंपनीला दिलेल्या कंत्राटाची माहिती मागितली होती.वाहतूक कोषाचे अशोक शिंदे यांनी अनिल गलगली यांस कळविले की सदर टोईंगसाठी सेवा डिसेंबर 2016 पासून सुरु करण्यात आली आहे. तेव्हापासून 30 नोव्हेंबर 2017 पर्यंत सदर प्रकरणात एकूण रु 5,91,67,800/- इतकी एवढी तडजोड रक्कम सरकारी खात्यात जमा करण्यात आली आहे. तसेच मेसर्स विदर्भ इन्फोटेक कंपनीने कर्षित वाहन शुल्क म्हणून रु 9,22,37,148/- इतकी रक्कम वसूल केली आहे. वर्ष 2016 च्या डिसेंबर महिन्यात 404 चारचाकी गाडयाकडून तडजोड रक्कम 80,800/- तर कर्षित वाहन शुल्क रु 1,85,840/- इतकी रक्कम वसूल केली गेली. तर वर्ष 2017 च्या 11 महिन्यात 1,95,843 दुचाकी आणि 99,592 चारचाकी गाड्यांकडून तडजोड रक्कम 5,90,87,000/- तर कर्षित वाहन शुल्क रु 9,20,51,308/- इतकी रक्कम वसूल केली गेली. एकूण जमा 15,14,04,948/-  रक्कमेच्या 39 टक्के रक्कम वाहतूक पोलिसांना तर 61 टक्के रक्कम मेसर्स विदर्भ इन्फोटेक कंपनीस प्राप्त झाली आहे. सदर कंत्राट 75 महिन्यासाठी आहे आणि बँक गारंटी 5 कोटींची आहे. 

अनिल गलगली यांनी मेसर्स विदर्भ इन्फोटेक कंपनीच्या संचालक मंडळाची यादी आणि वार्षिक लेखा परिक्षणाची प्रत मागितली असता वाहतूक पोलिसांनी स्पष्ट केले की अशी कोणतीही माहिती त्यांच्या अभिलेखावर नाही. अनिल गलगली यांच्या मते मेसर्स विदर्भ इन्फोटेक कंपनीस जो एकूण रक्कमेपैकी हिस्सा दिला जात आहे तो अधिकच आहे. जी रक्कम मेसर्स विदर्भ इन्फोटेक कंपनीस दिली आहे त्या रक्कमेची टक्केवारी आणि एकूण करार हा शासनास नुकसानदायक आणि खाजगी कंपनीस लाभदायक असल्याची टीका अनिल गलगली यांनी केली आहे. कराराचे पुर्ननिरीक्षण करण्याची मागणी मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस यांस पाठविलेल्या पत्रात केली आहे.