Tuesday, 14 November 2017

मेरिट ट्रॅक कंपनी को ठेका देने के लिए मुंबई विद्यापीठ ने किया टेंडर की शर्तों में बदलाव

मुंबई विद्यापीठ के ऑन स्क्रीन मार्किंगच्या सेवा (ऑनलाइन मूल्यांकन)  के लिए निश्चित किया वार्षिक टर्नओवर की रकम तकनीकी मार्क कम करने का सनसनीखेज खुलासा आरटीआई कार्यकर्ता अनिल गलगली को उपलब्ध कराए गए दस्तावेजों से हो रहा हैं। 100 करोड़ का टर्नओवर की शर्त को 30 करोड़ किया गया और 70 के बजाय 60 मार्क करने से यह सारी गड़बड़ी हुई और एक विशेष कंपनी को ठेका मिलने में सहायक साबित हुआ। अपरोक्ष तौर प्त मुंबई विद्यापीठ के ऑन स्क्रीन मार्किंग की सेवा के लिए टर्नओवर और तकनीकी मार्क में हुआ बदलाव से मेरिट ट्रक कंपनी लाभान्वित हुई।

आरटीआई कार्यकर्ता अनिल गलगली ने ऑनलाइन पेपर की जांच और अन्य मामलों की जानकारी मांगी थी।  मुंबई विद्यापीठ के केंद्रीय मूल्यांकन केंद्र ने अनिल गलगली को उपलब्ध कराए हुए दस्तावेजों से स्पष्ट हो रहा हैं कि एक विशेष कंपनी को लाभ दिलाने के लिए 3 बार टेंडर जारी किया गया। मुंबई विद्यापीठ के मार्च 2017 के परीक्षाओं की उत्तर पत्रिका का ऑन लाइन मार्किंग ( OSM) के कंप्यूटर प्रणाली सेवा के लिए  28 फरवरी 2017 को जारी किए टेंडर को प्रतिसाद नहीं मिला।  मुंबई विद्यापीठ ने 100 करोड़ का टर्नओवर की शर्त को सीधे 30 करोड़ किया और मार्क को 70 के बजाय 60 किया।  प्रथम एक्सटेंशन 21 मार्च 2017 तक था जिसे 2 कंपनी ने प्रतिसाद दिया। तीसरी कंपनी न आने से  फिर एक बार 27 मार्च 2017 तक एक सप्ताह का दूसरा एक्सेंटशन दिया गया। फिर तीसरी कंपनी न आने से डॉ विजय जोशी की नेतृत्व में तकनीकी टेंडर कमिटी का गठन किया गया। टाटा कन्सल्टन्सी सर्विसेस इस ठेकेदार की तकनीकी मार्क की संख्या 95 इतनी थी वहीं मेरिट ट्रक सर्विस प्रायवेट लिमिटेड की मार्क की संख्या 45 थी। विशेष यानी मेरिट ट्रक कंपनी तकनीकी टेंडर बैठक में उपस्थित नहीं था ना उस ठेकेदार ने कंप्यूटर प्रणाली को पेश किया था।  तकनीकी टेंडर कमिटी के समक्ष न आने वाले मेरिट ट्रक कंपनी ने 28 अप्रैल 2017 को मुंबई विद्यापीठ के व्यवस्थापन परिषद के समक्ष प्रो सुरेश उकरंडे की मदद से संपूर्ण ब्यौरा दिया। इसके एक दिन पहले पहले  27 एप्रिल 2017 को परचेज कमिटी ने मेरिट ट्रक कंपनी को काम जारी किया। व्यवस्थापन परिषद में सरकारी प्रतिनिधी के तौर पर मौजूद सिद्धार्थ खरात , डॉ रोहिदास काळे और डॉ सुभाष महाजन इन तीनों ने इसका विरोध भी किया लेकिन वाईस चांसलर ने न जाने किसके दबाव में खुद की जिम्मेदारी पर निर्णय लिया, इसकी जांच होती हैं तो मुंबई से आंध्रप्रदेश तक इसका कनेक्शन मिल सकता हैं।

सिर्फ हर एक उत्तर पत्रिका का दाम अधिक होने से टाटा कन्सल्टन्सी सर्विसेस इस कंपनी को बाहर का रास्ता दिखाया गया। टाटा ने रु 49.90/- तो मेसर्स मेरिट ने रु 23.90/- इतना दाम मांगा था। लेकिन यहीं मेरिट कंपनी नियमों की पूर्तता न करने से इसके पहले 60 मार्क तक नहीं पहुंची थी। उस वक्त इसी कंपनी को सिर्फ 45 मार्क मिले थे। विशेष यानी 27 अप्रैल 2017 को चयन होते ही दूसरे दिन ही मेसर्स मेरिट ट्रक कंपनी को आशय पत्र दिया गया और  2 मई 2017 को कार्यादेश जारी किया गया। मुंबई विद्यापीठ ने 20 पन्ने का सामंजस्य करार 8 अगस्त 2017 को तैयार किया।

जिस तकनीकी कमिटी की अपरिपक्वता से मेसर्स मेरिट ट्रक कंपनी को काम जारी हुआ और गड़बड़ी हुई उस कमिटी पर विराजित डॉ विजय जोशी, प्रो सुरेश उकरंडे और राजेंद्र दानोळे को कुलपती ने अभयदान दिया हैं। 5 सदस्य होते हुए सिर्फ 3 सदस्यों ने एकमत से निर्णय लेने से उनपर भी कारवाई करने की जरुरत हैं। 

अनिल गलगली ने राज्यपाल विद्यासागर राव को पत्र भेजकर टेंडर प्रक्रिया की जांच कर तकनीकी कमिटी के सदस्यों पर भी कारवाई करने की मांग की हैं।नियमों पर आधारित मार्कस को नजरअंदाज कर मुंबई विद्यापीठ ने पैसे बचाने के लिए मेसर्स मेरिट ट्रक कंपनी को काम देने का तर्क गड़बड़ वाला हैं इसकी जड़ें मुंबई से आंध्रप्रदेश तक होने की संभावना हैं। इस पुरे मामले की जांच सीआईडी से होती हैं तो निश्चित तौर पर बडा खुलासा हो सकता हैं।

मेरिट ट्रॅक कंपनीस काम देण्यासाठी मुंबई विद्यापीठाने निविदा शर्तीमध्ये केला बदल 

मुंबई विद्यापीठाच्या ऑन स्क्रीन मार्किंगच्या सेवेसाठी (ऑनलाइन मूल्यांकनासाठी)  निश्चित केलेली वार्षिक टर्नओव्हर रक्कम आणि तांत्रिक गुणात घट केल्याची धक्कादायक माहिती आरटीआय कार्यकर्ते अनिल गलगली यांस प्राप्त झाली आहे. 100 कोटींची टर्नओव्हरची अट असताना त्यास 30 कोटी केले आणि 70 गुणांऐवजी 60 गुण केल्यामुळे हा सर्व गोंधळ तर झाला आणि एका विशेष कंपनीस कंत्राट मिळाले. अप्रत्यक्षात मुंबई विद्यापीठाच्या ऑन स्क्रीन मार्किंगच्या सेवेसाठी टर्नओव्हर आणि तांत्रिक गुणात घट मेरिट ट्रक कंपनीस फायदेशीर ठरला आहे.

आरटीआय कार्यकर्ते अनिल गलगली यांनी ऑनलाइन पेपर तपासणी आणि अन्य बाबीची माहिती मागितली होती. मुंबई विद्यापीठाच्या केंद्रीय मूल्यांकन केंद्राने अनिल गलगली यांस उपलब्ध करुन दिलेल्या कागदपत्राच्या आधारे स्पष्ट होत आहे की एका विशेष कंपनीस लाभ मिळवून देण्यासाठी एक नाही 4 वेळा निविदा जारी करण्यात आल्या होत्या. मुंबई विद्यापीठाच्या मार्च 2017च्या परीक्षांच्या उत्तर पत्रिकांचे ऑन लाइन मार्किंग ( OSM) च्या संगणक प्रणाली सेवांसाठी 28 फेब्रुवारी 2017 रोजी जारी केलेल्या निविदांवर प्रतिसाद मिळाला नाही. मुंबई विद्यापीठाने 100 कोटी उलाढालाची अट शिथिल करत 30 कोटी केली आणि गुण 70 ऐवजी 60 केले.  प्रथम मुदतवाढ 21 मार्च 2017 पर्यंत होती ज्यास 2 कंपनीने प्रतिसाद दिला. तिसरी निविदा न आल्यामुळे पुन्हा एकदा 27 मार्च 2017 पर्यंत एका आठवड्याची दुसरी मुदतवाढ देण्यात आली तरीही तिसरा देकार आला नाही. त्यानंतर डॉ विजय जोशी यांच्या नेतृत्वाखाली तांत्रिक निविदा समितीचे गठन केले गेले. त्यावेळी टाटा कन्सल्टन्सी सर्विसेस या ठेकेदारांची गुणसंख्या 95 एवढी भरली होती तर मेरिट ट्रक सर्विस प्रायव्हेट लिमिटेडची गुणसंख्या 45 भरली होती.विशेष म्हणजे मेरिट ट्रक तांत्रिक निविदा बैठकीसाठी उपस्थित ही नव्हता ना या ठेकेदाराने संगणक प्रणालीचे सादरीकरण केलेच नाही. तांत्रिक निविदा समितीसमोर न येणारी मेरिट ट्रक कंपनीने 28 एप्रिल 2017 रोजी मुंबई विद्यापीठाच्या व्यवस्थापन परिषदेसमोर तंत्रशिक्षण विद्याशाखेचे समनव्यक डॉ सुरेश उकरंडे यांच्यासमवेत सविस्तर माहिती दिली. त्यापूर्वीच एक दिवस अगोदर 27 एप्रिल 2017 रोजी खरेदी समितीने मेरिट ट्रक कंपनीस काम जारी केले. व्यवस्थापन परिषदेत शासकीय प्रतिनिधी असलेले सिद्धार्थ खरात , डॉ रोहिदास काळे आणि डॉ सुभाष महाजन या तिघांनी विरोध केला होता. तरीसुद्धा कुलगुरु यांनी कोणाच्या दबावाखाली स्वतःच्या जबाबदारीवर निर्णय घेतला होता, याची चौकशी केल्यास मुंबई पासून आंध्रप्रदेश येथपर्यंत कनेक्शन सापडू शकते.

फक्त प्रत्येक उत्तर पत्रिकेचे दर जास्त असल्याने टाटा कन्सल्टन्सी सर्विसेस या कंपनीस डावलले गेले. टाटाने रु 49.90/- तर मेसर्स मेरिट ने रु 23.90/- इतका दर मागितला होता. परंतु हीच मेरिट कंपनी निकषांची पूर्तता न केल्यामुळे पूर्वी 60 गुणापर्यंत जाऊ शकली नव्हती. त्यावेळी या कंपनीस फक्त 45 गुण मिळाले होते. विशेष म्हणजे 27 एप्रिल 2017 रोजी निवड होताच दुसऱ्या दिवशी मेसर्स मेरिट ट्रक कंपनीस आशय पत्र दिले तर 2 मे 2017 रोजी कार्यादेश जारी केले. मुंबई विद्यापीठाने 20 पानांचा सामंजस्य करार 8 ऑगस्ट 2017 रोजी केला.

ज्या तांत्रिक समितीच्या उलाढालीमुळे मेसर्स मेरिट ट्रकला काम जारी केले आणि गोंधळ झाला त्या समितीवरील डॉ विजय जोशी, प्रो सुरेश उकरंडे आणि राजेंद्र दानोळे यांस कुलपतीने अभय देण्याचे काम केले आहे. 5 सदस्य असताना 3 सदस्यांनी एकमताने निर्णय घेतला असून यांच्यावरही कार्यवाही करण्याची आवश्यकता आहे.

अनिल गलगली यांनी राज्यपाल विद्यासागर राव यांस पत्र पाठवून निविदा प्रक्रियेची चौकशी करत तांत्रिक समितीच्या सदस्यांवर कारवाई करण्याची मागणी केली आहे. निकषांच्या आधारित गुणांकडे दुर्लक्ष करत मुंबई विद्यापीठाने पैसे वाचविण्यासाठी मेसर्स मेरिट ट्रक कंपनीला काम दिल्याचा तर्क पटण्याजोगे नसून याची पाळेमुळे मुंबई पासून आंध्रप्रदेश पर्यंत असण्याची शक्यता व्यक्त केली आहे. या प्रकरणाची सीआयडी चौकशी केल्यास निश्चितपणे यातील सत्य बाहेर येईल.

MU tweaked, undermined Tender Conditions to benefit Merit Trac Company

In a shocking revelation it  has come to light that,, the Mumbai University had resorted to dilute the criteria for selection of contractor to implement it's On Screen Marking (OSM) by way of reducing the minimum turnover and reduction of Minimum Technical Score criteria for selection process of the contract in its Tender process. In the original tender documents the minimum requirements for qualification in the tender process was pegged at Rs 100 crores was reduced to Rs 30 crores and the requirements of Minimum Technical Score for consideration in qualifying for the tender was scoring 70 points, who was modified to 60 points to probably facilitate the tender in favour of the chosen contractor. The dilution in the pre qualification criteria proved beneficial to the bagging of the OSM contract to Merit Trac. 

RTI Activist Anil Galgali had sought information from the Mumbai University about the Online paper evaluation and other related informations. From the documents provided by the Mumbai University's Central Evaluation Center it can be ascertained that, in order to facilitate and benefit a specific company the tender was issued 4 times. The University had issued the tender for the first time on 28th February 2017 for implementing the OSM system of paper correction for the first time for the March 2017 Examinations being conducted by the University to which it didn't receive any response. After that the University diluted it pre qualification criteria by reducing the Minimum Turn Over required from Rs 100 crores to Rs 30 crores and the Technical Score requirements from Minimum 70 points to 60 points. The tender process was extended upto 21st March 2017, during which 2 companies participated in the process. Since the process required a 3rd tenderer, an second extension was given upto 27th March 2017 which also resulted in non application by a 3rd tenderer. Thereafter a Tender selection committee was constituted under the Chairmanship of Dr Vijay Joshi. On the assessment of the tenderers it was found that Tata Consultancy services had scored 95 points, whereas Merit Trac had scored 45 points. Also the Merit Trac was not even present at the Technical Tender selection meeting, also no demonstration of its technology was given before the Tender selection committee. Merit Trac, company which did not appear before the Tender selection committee, came before the University's Management Council on 28th April 2017 along with the IT department's coordinator Dr Suresh Ukrande and provided detailed information. In a surprising act the Purchase Committee had given the contract to Merit Trac just a day earlier on 27th April 2017 even before appearing and presentation before the Management Council. In the Management Council, the Govt representative's Siddarth Kharat, Dr Rohidas Kale and Dr Subhash Mahajan had voiced it's opinion against the process, but the Vice Chancellor taking personal responsibility took the decision in favour of Merit Trac on some unknown pressure. This enquiry if conducted, will reveal the hidden connections between Mumbai and Andhra Pradesh, which inconvenienced lakhs of Students and played havoc on their careers, expressed Galgali. 

The Tata Consultancy Services were ignored only on the criteria of higher cost, though they scored the highest on the technical score and technology presentation. The Tata's had quoted Rs 49.90 in comparison to Merit Trac's quotation of Rs 23.90. Merit Trac could not even meet the diluted criteria of required Technical Score of 60 points, whereas their score was 45 points. The  issues which need specific attention are that, Merit Trac was handed over the confirmation letter on the very next day of its selection on 27th April 2017, even ahead of its presentation before the Management Council and also non presentation before the Tender selection committee. Merit Trac was issued the work order on 2nd May 2017 and the contract was signed on 8th August 2017. 

The Technical Committee which awarded the contract to Merit Trac and responsible for the mess, comprising of Dr Vijay Joshi, Dr Suresh Ukrande and Rajendra Dhanole was given exoneration by the Vice Chancellor. In the 5 member Committee the above mentioned three members decided in favour of Merit Trac unanimously and hence actions need to be taken against their activities. 

Anil Galgali in a letter addressed to Governor Chi Vidyasagar Rao, who is also the Chancellor of Mumbai University has demanded a complete enquiry into the tender process for selection of the OSM contractor, he also demanded actions against the Technical Committee. He further stressed that, by ignoring the technical competence, and the reason of only with a veiw of saving money of the University, Merit Trac was awarded the contract is not convincing, there seems to be some other active  connections between Mumbai and Andhra Pradesh which facilitated the award of contract  to Merit Trac cannot be ruled out stated Galgali. If CID inquiry recommended by Governor then real picture come in light.

Friday, 10 November 2017

मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन और शिर्के कंपनी के आर्थिक खातों का ऑडिट करेगी एमएमआरडीए

मुंबई में सबसे महंगी जमीनों में से एक ऐसे बीकेसी में 13 एकड़ का भूखंड एमएमआरडीए प्रशासन ने शैक्षणिक काम के लिए मुंबई क्रिकेट असोसिएशन को दिया था जिसके हुए व्यावसायिक इस्तेमाल के मद्देनजर एमएमआरडीए ने अब मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन और शिर्के कंपनी के आर्थिक खातों को  ऑडिट करने जा रही हैं, यह जानकारी आरटीआई कार्यकर्ता अनिल गलगली को एमएमआरडीए प्रशासन ने दी हैं। जबकि भाजपा सरकार के विधायक अध्यक्ष होने से मुंबई क्रिकेट असोसिएशन और शिर्के कंपनी पर मुख्यमंत्री की अध्यक्षतावली एमएमआरडीए प्रशासन 6 महीने के बाद कार्रवाई नहीं कर रही है उल्टे अब एमसीए में माऊंड गॅलरी बनाने कर प्रस्ताव को मान्यता देने के प्रयास में हैं।

आरटीआई कार्यकर्ता अनिल गलगली ने एमएमआरडीए प्रशासन से मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन को जारी नोटीस और ऑडिटर नियुक्ती के लिए की गई कार्रवाई की जानकारी मांगी थी। अनिल गलगली को बताया गया कि एमएमआरडीए प्रशासन ने 13 अप्रैल 2017 को पत्र भेजकर एमसीए अध्यक्ष आशिष शेलार को स्पष्ट किया हैं कि सॉलिसिटर से लीगल सलाह लेने के पश्चात निश्चित किया गया हैं कि अनुभवी आर्थिक ऑडिटिंग फर्म द्वारा सहूलियत दाम से अग्रीमेंट होने के दिनांक से एमसीए और शिर्के इन्फ्रास्ट्रक्चर समेत जुड़ी हुई सारी एजन्सी के आर्थिक दस्तावेज, आयकर रिटर्नस और ठेके का ऑडिट किया जाएगा जिसमें आयसीए सुविधा मुवैय्या कराई जाती हैं उसके दस्तावेज, असोसिएटशिप फीस, सेवा शुल्क, वार्षिक मेनटेन्स शुल्क, प्रायोजक शुल्क, विज्ञापन शुल्क, कुल संस्था और समय-समय पर आए डोनर्स का समावेश होगा ताकि एमसीए तथा शिर्के से हुए व्यावसायिक इस्तेमाल की जांच होगी। एमएमआरडीए के महानगर आयुक्त यूपीएस मदान की मान्यता से जारी किए हुए पत्र में एमएमआरडीए की वित्तीय और लेखा विभाग को ऑडिटर नियुक्ति का अधिकार दिया हैं तथा उस विभाग को दस्तावेज और उचित जानकारी देने का निर्देश भी दिया हैं।

एमएमआरडीए प्रशासन ने एमसीए को वितरित जमीन के मामले में कानूनी सलाह लेने के लिए मेसर्स खेतान अँड कंपनी और मेसर्स कांगा अँड कंपनी की नियुक्ति की थी। सलाह के लिए खेतान कंपनी ने किसी भी तरह की व्यावसायिक फीस की मांग नहीं की और मेसर्स कांगा अँड कंपनी ने मांगी हुई रु 65,000/- की रकम एमएमआरडीए द्वारा अदा की गई हैं।

पहले से अग्रीमेंट के शर्तों का उल्लंघन करनेवाली एमसीए के अध्यक्ष और मुंबई भाजपा के अध्यक्ष विधायक एड आशिष शेलार ने 22 अगस्त 2017 को पत्र भेजकर माउंड गैलरी का निर्माण काम प्रस्तावित किया हैं। पहले ही अग्रीमेंट के शर्तों का उल्लंघन करते हुुुए जमीन का व्यावसायिक इस्तेमाल करनेवाली एमसीए का नया प्रस्ताव तबतक नहीं संज्ञान में नहीं लिया जाए जब तक ऑडिट पूर्ण होकर निर्णय न आए, ऐसी मांग अनिल गलगली ने की हैं.

एमएमआरडीए ने दिनांक 05.03.2004 को मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन को 80 वर्ष की लीज पर 52,157 वर्ग मीटर का भूखंड दिया जिसपर शुल्क 2,65,98,202 इतनी रकम ली गई। उसमें से 46,941 वर्ग मीटर खुला मैदान जमीन का इस्तेमाल 3 प्रकार का होगा। 10 प्रतिशत जमिन पर 15 प्रतिशत कंस्ट्रक्शन, 23 प्रतिशत जमीन तालाब, टेनिस कोर्ट, नेट्स और अन्य इस्तेमाल और 67 प्रतिशत जमीन सार्वजनिक अनुशासितबद्ध इस्तेमाल के लिए ओपन रखने के अलावा इनडोअर क्रिकेट अकादमी में पुरे महाराष्ट्र के छात्रों को प्रवेश खुला रखने की शर्त थी। यह भूखंड व्यावसायिक प्रयोजनार्थ न इस्तेमाल करने की मुख्य शर्त का उल्लंघन कर मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन ने मेसर्स शिर्के के साथ किए व्यावसायिक एग्रीमेंट से हुआ । शिर्के इन्फ्रास्ट्रक्चर के साथ किया एग्रीमेंट और व्यावसायिक प्रयोजन के मद्देनजर '3 महीने के भीतर योग्य कदम उठाए या लीज एग्रीमेंट निरस्त करेगे' ऐसी नोटीस एमएमआरडीए ने मुंबई क्रिकेट एसोसिएशनला को जारी कर दी है। एमएमआरडीए ने मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन को भूखंड देते वक्त सरकारी नियम, भूखंड वितरण की एमएमआरडीए की नीति और सरकारी निर्णय का उल्लंघन कर मनोरंजन मैदान के लिए आरक्षित भूखंड मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन को एकतरह से गिफ्ट ही दिया। क्योंकि स्वयं सरकार ने प्रायवेट संस्था की भूखंड, गार्डन देने पर दिनांक 15.05.2000 को रोक लगाई थी। एमएमआरडीए की नीतियों के तहत मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन को भूखंड वितरित करने की मांग विचारार्थ नही ली जा सकती है, ऐसी जानकारी अनिल गलगली को उपलब्ध कराए दस्तावेजों के आधार पर सामने आ रही है। टेंडर दिए बिना मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन को भूखंड देने से एमएमआरडीए को रु 13.95 करोड़ का घाटा होने का जिक्र ऑडिट रिपोर्ट में है। एमएमआरडीए की नींद भले ही देरी से खुली लेकिन आयकर विभाग ने मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन की व्यावसायिक कार्यशैली को भांपकर आयकर में दी जानेवाली रियायत को रद्द किया। इस मामले में एसोसिएशन ने सर्वोच्च न्यायालय में दस्तक भी दी लेकिन उन्हें वहां से कोई भी राहत नहीं मिली और आयकर अदा किया। मुख्यमंत्री की अध्यक्षता वाली एमएमआरडीए प्रशासन कानूनन सलाह लेने के नाम पर 6 महीने से मेसर्स कांगा एंड कंपनी से पत्राचार करती रही है। 

सरकारी लीगल विभाग किसी काम का न होने का बर्ताव कर एमएमआरडीए ने समय की बर्बादी कर मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन से भूखंड कब्जे में लेने के मामले से भागने की कोशिश करने का आरोप अनिल गलगली ने किया है. क्रिकेट यह खेल अब शैक्षणिक कैसे और कब से हुआ है? यह बात भी जांच का विषय है। आरटीआई कार्यकर्ता अनिल गलगली ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, मुख्य सचिव स्वाधीन क्षत्रिय और एमएमआरडीए के महानगर आयुक्त यूपीएस मदान से भूखंड वापस लेते हुए एक हजार करोड वसूल करने तथा मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन और मेसर्स शिर्के पर कारवाई करने की मांग की है।

मुंबई क्रिकेट असोसिएशन आणि शिर्केच्या आर्थिक खात्यांची एमएमआरडीए ऑडिट करणार

मुंबईतील सर्वाधिक महागडे असलेल्या बीकेसी मधील 13 एकरचा भूखंड एमएमआरडीए प्रशासनाने शैक्षणिक कामासाठी मुंबई क्रिकेट असोसिएशनने दिला असताना केलेला व्यावसायिक वापर पहाता एमएमआरडीएने आता मुंबई क्रिकेट असोसिएशन आणि शिर्केच्या आर्थिक खात्यांचे ऑडिट करणार असल्याची माहिती आरटीआय कार्यकर्ते अनिल गलगली यांना मिळाली आहे. परंतु

भाजपा सरकारचे आमदार असलेले मुंबई क्रिकेट असोसिएशन आणि शिर्के कंपनीवर मुख्यमंत्री अध्यक्ष असलेल्या एमएमआरडीए प्रशासनाने 6 महिने उलटूनही कार्यवाही तर केली नाही उलट आता एमसीएत माऊंड गॅलरी बांधण्याच्या प्रस्तावास मान्यता देण्याच्या प्रयत्नात आहे.

आरटीआय कार्यकर्ते अनिल गलगली यांनी एमएमआरडीए प्रशासनाकडे मुंबई क्रिकेट असोसिएशनला दिलेली नोटीस आणि ऑडिटर नेमण्याबाबत केलेल्या कार्यवाहीची माहिती विचारली होती. अनिल गलगली यांस कळविण्यात आले आहे की एमएमआरडीए प्रशासनाने 13 एप्रिल 2017 रोजी पत्र पाठवून एमसीए यांस स्पष्ट केले आहे की सॉलिसिटरकडून लीगल सल्ला घेतल्यानंतर निश्चित करण्यात आले आहे की अनुभवी आर्थिक ऑडिटिंग फर्मकडून सवलतीच्या दराने करारनामा झाल्याच्या दिनांकापासून एमसीए तसेच शिर्के इन्फ्रास्ट्रक्चर समेत संलग्न विविध एजन्सीतील आर्थिक दस्तावेज, आयकर रिटर्नस आणि कंत्राटचे ऑडिट केले जाईल यात जे आयसीए सुविधा पुरवितात त्यांचे दस्तावेज, असोसिएटशिप फीस, सेवा शुल्क, वार्षिक परिरक्षण शुल्क, प्रायोजक शुल्क, जाहिरात शुल्क, एकूण संस्था आणि वेळोवेळीचे डोनर्सचा समावेश असेल जेणेकरुन एमसीए किंवा शिर्केकडून व्यावसायिक वापराचा तपास होईल. एमएमआरडीएचे महानगर आयुक्त यूपीएएस मदान यांच्या मान्यतेने जारी केलेल्या पत्रात एमएमआरडीएच्या वित्तीय आणि लेखा विभागास ऑडिटर नेमण्याचे अधिकार दिले असून त्यास दस्तावेज आणि उचित माहिती देण्याचे कळविण्यात आले आहे.

एमएमआरडीए प्रशासनाने एमसीए यांस दिलेल्या जमीनीबाबत कायदेशीर सल्ला घेण्याकरिता मेसर्स खेतान अँड कंपनी तसेच मेसर्स कांगा अँड कंपनीची नियुक्ती केली असून सदर सल्ला घेण्याकरिता खैतान कंपनीने कोणत्याही व्यावसायिक फी ची मागणी केलेली नसून मेसर्स कांगा अँड कंपनीने मागणी केलेली रु 65,000/- ची रक्कम एमएमआरडीए कडून अदा करण्यात आलेली आहे.

आधीच करार शर्तीचे उल्लंघन करणारी एमसीएचे अध्यक्ष असलेले आमदार आणि मुंबई भाजपाचे अध्यक्ष एड आशिष शेलार यांनी 22 ऑगस्ट 2017 रोजी एमएमआरडीए प्रशासनास पत्र पाठवून 2 माउंड गॅलरीचे बांधकाम प्रस्तावित केले आहे. आधीच करार शर्तीचे उल्लंघन करत जमीनीचा व्यावसायिक वापर करणाऱ्या एमसीएची नवीन मागणी तोपर्यंत मान्य न करावी जोपर्यत आर्थिक ऑडिट करत निर्णय घेतला जाईल, अशी मागणी अनिल गलगली यांनी केली आहे.

एमएमआरडीएने दिनांक 05.03.2004 रोजी मुंबई क्रिकेट असोसिएशनला 80 वर्षाच्या लीजवर 52,157 चौरस मीटर भूखंड दिला ज्यासाठी नाममात्र शुल्क 2,65,98,202 इतके आकारले.यापैकी 46,941 चौरस मीटर खुले मैदान आणि 5,215.7 चौरस मीटर बांधकामासाठी देत 1.5 एफएसआयला मंजूरी दिली. जमिनीचा वापर 3 प्रकारात असेल आणि 10 टक्के जमिनीवर 15 टक्के बांधकाम, 23 टक्के जमीन ही तलाव,टेनिस कोर्ट, नेट्स किंवा तत्सम वापर आणि 67 टक्के जागा सार्वजनिक शिस्तबद्ध वापरासाठी खुली ठेवण्याची तसेच इनडोअर क्रिकेट अकाडमीमध्ये सर्व महाराष्ट्रातील विद्याथ्यार्ना प्रवेश खुला ठेवावा. सदर भूखंड व्यावसायिक प्रयोजनार्थ न वापरण्याच्या मुख्य अटीचे उल्लंघन करत मुंबई क्रिकेट असोसिएशनने मेसर्स शिर्के यांच्याबरोबर व्यावसायिक करारनामा केला. शिर्के इन्फ्रा स्ट्रक्चरबरोबर केलेला करारनामा आणि व्यावसायिक प्रयोजन लक्षात घेत '3 महिन्याच्या आत योग्य पाऊल उचला किंवा लीज करारनामा समाप्त करु ' अशी नोटीस एमएमआरडीएने दिनांक 02.06.2015 रोजी जारी केली. एमएमआरडीएने मुंबई क्रिकेट असोसिएशनला भूखंड देताना शासकीय नियम, भूखंड वाटपाचे एमएमआरडीएचे धोरण आणि शासकीय निर्णयाचे उल्लंघन करत मनोरंजन मैदानासाठी राखीव असलेला भूखंड मुंबई क्रिकेट असोसिएशनला आंदण दिला कारण स्वत: शासनाने खाजगी संस्थेला भूखंड, गार्डन किंवा रिक्रिएशनला देण्यास दिनांक 15.05.2000 रोजी स्थगिती दिली होती. एमएमआरडीएच्या धोरणाप्रमाणे मुंबई क्रिकेट असोसिएशनला भूखंड वितरित करण्याची मागणी विचारार्थ घेतली जाऊ शकत नाही, अशी माहिती अनिल गलगली यांना उपलब्ध कागदपत्राच्या आधारावर पुढे येत आहे. टेंडर न देता मुंबई क्रिकेट असोसिएशनला भूखंड दिल्यामुळे एमएमआरडीएला रु 13.95 कोटीचे नुकसान झाल्याचे ऑडिट रिपोर्ट मध्ये उल्लेखित आहे. एमएमआरडीएला जरी उशिरा जाग आली असली तरी आयकर खात्याने मुंबई क्रिकेट असोसिएशनच्या व्यावसायिक कार्याची योग्य ती दखल घेत आयकरातील सुट रद्द केली. याबाबतीत असोसिएशनने सर्वोच्च न्यायालयात धाव घेतली पण त्यांस प्रॉफिटवर आयकर भरण्याची पाळी आली. मुख्यमंत्री अध्यक्ष असलेल्या एमएमआरडीए प्रशासनाने कायदेशीर सल्ला घेण्याच्या नावावर मेसर्स कांगा एंड कंपनीकडे पत्रव्यवहार केला. 

शासकीय विधी खाते कुचकामी असल्यासारखे वागत एमएमआरडीएने वेळखाऊ धोरणाचा अवलंब करत मुंबई क्रिकेट असोसिएशनला दिलेला भूखंड ताब्यात न घेता पळवाट शोधल्याचा आरोप अनिल गलगली यांनी केला आहे. क्रिकेट हा प्रकार आता शैक्षणिक कशा आणि केव्हापासून झाला? ही बाब सुद्दा चौकशीची आहे. आरटीआय कार्यकर्ते अनिल गलगली यांनी मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, मुख्य सचिव सुमित मलिक,  एमएमआरडीएचे महानगर आयुक्त यूपीएस मदान यांना भूखंड परत घेत एक हजार कोटी वसूल करण्याची तसेच मुंबई क्रिकेट असोसिएशन आणि मेसर्स शिर्के यांच्यावर कार्यवाही करण्याची मागणी केली आहे.