Sunday, 24 September 2017

रेलवे में खाद्यपदार्थ पर अब एमआरपी प्रिंट करवाना अनिर्वाय नहीं 

रेलवे मंत्री पियूष गोयल के आदेश के बाद रेलवे बोर्ड ने रेलवे में बिक्री होनेवाली खाद्यपदार्थ वस्तु के पैकेट पर जिन चीजों को प्रिंट करवाने का निर्देश जारी किया था उसमें एमआरपी प्रिंट करवाना अनिर्वाय नहीं हैं। इससे एमआरपी से अधिक मूल्य से खाद्यपदार्थ के पैकेट बेचने वाले विक्रेताओं की चांदी होगी। 

आरटीआई कार्यकर्ता अनिल गलगली ने रेलवे के इस अजीबोंगरीब आदेश के खिलाफ रेलवे मंत्री पियूष गोयल और आदेश जारी करने वाले संजीव गर्ग को पत्र भेजकर उनसे हुई गलती ध्यानार्थ में लाई हैं। संजीव गर्ग जो रेलवे बोर्ड के टुरिजम और कॅटरिंग के अतिरिक्त सदस्य हैं उन्होंने रेलवे मंत्री पियूष गोयल के आदेशानुसार एक निर्देश जारी किया हैं जिसमें खाद्यपदार्थ के पैकेट पर जिन चीजों को प्रिंट करना जरुरी हैं उसमें आपूर्तिधारक एवं ठेकेदार का नाम , शाकाहारी एवं मांसाहारी, वजन और पॅकिंग का दिनांक का जिक्र हैं। रेलवे में एमआरपी से अधिक मूल्य लेकर खाद्यपदार्थ के पॅकेट बेचने की सबसे अधिक शिकायतें आती हैं उसे ही बाहर कर दिया गया हैं। 

अनिल गलगली ने रेलवे मंत्री पियूष गोयल, संजीव गर्ग को लिखित पत्र भेजकर मांग की हैं कि वर्तमान निर्देश में बदलाव करते हुए एमआरपी का मूल्य प्रिंट किया जाए ताकि यात्रियों की होनेवाली लूट पर अंकुश रखेगा।

रेल्वेच्या खान पान पदार्थांवर एमआरपी छापने बंधनकारक नाही

रेल्वे मंत्री पियूष गोयल यांच्या आदेशानंतर रेल्वे बोर्डाने रेल्वेत विकल्या जाणा-या खान पान पदार्थांच्या पैकेटवर ज्या बाबी छापण्याचे निर्देश जारी केले होते त्यात आता एमआरपी छापने करणे बंधनकारक नाही. यामुळे एमआरपी पेक्षा जास्त भावाने अन्न पदार्थ विकणा-या विक्रेत्यांची चांदी होणार आहे.

आरटीआय कार्यकर्ते अनिल गलगली यांनी रेल्वेच्या या विचित्र आदेशाविरोधात रेल्वे मंत्री पियूष गोयल आणि आदेश जारी करणारे संजीव गर्ग यांस पत्र पाठवित झालेली घोडचूक लक्षात आणून दिली आहे. संजीव गर्ग जे रेल्वे बोर्डच्या टुरिझम आणि कॅटरिंगचे अतिरिक्त सदस्य आहेत त्यांनी रेल्वे मंत्री पियूष गोयल यांच्या आदेशानुसार एक निर्देश जारी केला आहे त्यात खान पान पदार्थावर ज्या बाबी छापणे आवश्यक आहे त्यात पुरवठादार किंवा कंत्राटदारांचे नाव, शाकाहारी किंवा मांसाहारी, वजन आणि पॅकिंग दिनांक याचा उल्लेख केला आहे. रेल्वेत एमआरपी पेक्षा जास्त भावाने खान पान पॅकेट विकण्याच्या सर्वाधिक तक्रारी असताना हीच बाब वगळली गेली आहे.

अनिल गलगली यांनी रेल्वे मंत्री पियूष गोयल, संजीव गर्ग यांस लेखी पत्र पाठवून मागणी केली आहे की या निर्देशात बदल करत एमआरपी मूल्य छापण्यात यावे जेणेकरून प्रवाश्यांची होणारी लूटमार थांबेल.

No compulsion to print MRP on Food Packet in Railways

On the instructions of the new Railway Minister Piyush Goyel, Railway board recently issued a notification lisiting the details to be printed on the food packets /casserole. Incidently, This did not include the maxuimm retail price ( MRP) .

RTI Activist Anil Galgali has wriiten to The Railway board, As well as the Railway Minister, pointing out this error which may be misused by the Railway contractor and sellers to cheat the passangers. The notification dated 19 September 2017, issued by Sanjiv Garg, Add Member, Tourism and Catering, stated that " Hon'ble Minister of Railway has desired " each food box and Casserole shall now have to print 4 points details. These details include, Name of the supplier and Contractor, Weigh/grams, date of packing and Distinction symbol of Veg/Non Veg food item. 

Anil Galgali has demanded that this notification be rectified to include the MRP, which should be compulsary printed in each food packet/casserole.

Friday, 22 September 2017

33.34 लाख खर्च करने के बाद भी एमएमआरडीए मुख्यालय में ई-ऑफिस नहीं हैं

मुख्यमंत्री की अध्यक्षता वाली एमएमआरडीए के मुख्यालय ई-ऑफिस अब तक शुरु न होने का कबूलनामा आरटीआई कार्यकर्ता अनिल गलगली से एमएमआरडीए प्रशासन ने किया हैं। गत 15 महीने से ई -ऑफिस काम शुरु हैं जिसपर 33.34 लाख रुपए खर्च हुए हैं।

आरटीआई कार्यकर्ता अनिल गलगली ने एमएमआरडीए प्रशासन से एमएमआरडीए मुख्यालय में ई-ऑफिस की जानकारी मांगी थी। एमएमआरडीए प्रशासन के सूचना एवंम तकनीकी सेल ने अनिल गलगली को बताया कि ई ऑफिस के लिए NICISI का प्रस्ताव आया था।  उसके बाद सूचना एवंम तकनीकी सेल ने दिनांके 04/07/2016 को काम शुरु किया हैं। काम पूर्ण होने की जानकारी मांगने पर काम अब भी शुरु होने की बात बताई गई हैं। अब तक एमएमआरडीए प्रशासन ने ई-ऑफिस के लिए 33.34 लाख का खर्च भी किया हैं। उसके बाद भी काम वर्तमान में अधूरा ही हैं।

एक ओर एमएमआरडीए प्रशासन स्मार्ट बीकेसी जैसी  कल्पना कर रही हैं और दूसरी ओर उसी एमएमआरडीए प्रशासन का मुख्यालय स्मार्ट न होने पर खेद जताते हुए  अनिल गलगली ने तत्काल ई-ऑफिस शुरु करने की मांग मुख्यमंत्री और एमएमआरडीए के अध्यक्ष देवेंद्र फडणवीस से की हैं। इससे आम लोगों का समय पर और तत्काल कार्य करने में एमएमआरडीए अधिकारियों को सुलभता होगी और एमएमआरडीए मुख्यालय भी स्मार्ट होगा।

33.34 लाख खर्च केल्यानंतरही एमएमआरडीए मुख्यालयात ई-ऑफिसचा अद्यापही नाही

मुख्यमंत्री अध्यक्ष असलेल्या एमएमआरडीए मुख्यालयात ई-ऑफिस अद्यापही सुरु झाली नसल्याची स्पष्ट कबूली आरटीआय कार्यकर्ते अनिल गलगली यांस एमएमआरडीए प्रशासनाने दिली आहे. गेल्या 15 महिन्यापासून ई -ऑफिसचे काम सुरु असून 33.34 लाख रुपये खर्च झाले आहेत.

आरटीआय कार्यकर्ते अनिल गलगली यांनी एमएमआरडीए प्रशासनाकडे एमएमआरडीए मुख्यालयात ई-ऑफिसची बाबत माहिती मागितली होती. एमएमआरडीए प्रशासनाच्या माहिती व तंत्रज्ञान कक्षाने अनिल गलगली यांस कळविले की ई ऑफिससाठी NICISI चा प्रस्ताव आला होता. त्यानंतर माहिती व तंत्रज्ञान कक्षाने दिनांक 04/07/2016 रोजी काम सुरु केले आहे. काम पूर्ण होण्याबाबतची माहिती विचारली असता काम अजूनही सुरु असल्याची माहिती दिली. आतापर्यंत एमएमआरडीए प्रशासनाने ई-ऑफिससाठी 33.34 लाखांचा खर्चही केला आहे. त्यानंतरही काम अद्यापही पूर्ण झालेच नाही. 

एकीकडे एमएमआरडीए प्रशासन स्मार्ट बीकेसी सारख्या वल्गना करत आहे आणि दुसरीकडे त्याच एमएमआरडीए प्रशासनाचे मुख्यालय स्मार्ट नसल्याची टीका करत अनिल गलगली यांनी लवकरात लवकर ई-ऑफिस सुरु करण्याची मागणी मुख्यमंत्री आणि एमएमआरडीएचे अध्यक्ष देवेंद्र फडणवीस यांसकडे केली आहे. यामुळे नागरिकांचे वेळेत आणि जलद गतीने कार्य करण्यात एमएमआरडीए अधिका-यांस सुलभ होईल आणि एमएमआरडीए मुख्यालय सुद्धा स्मार्ट होईल.

After spending Rs 33.34 lakhs, MMRDA Head Office deprived of E-Office

MMRDA headed by the CM lacks a proper E-OFFICE was a fact admitted by the administration in an RTI response to RTI Activist Anil Galgali. The project for E-OFFICE is ongoing for the past 15 months and MMRDA has already incurred an expense of Rs 33.34 lakhs on it.

RTI Activist Anil Galgali had sought information from the MMRDA about the E-OFFICE at its headquarters. The MMRDA's Information and Technology cell has informed Galgali that, for the E-OFFICE it had received a proposal from NICISI, on which the IT cell has started the work on 04/07/2016. On the query pertaining to the completion of work, it has been informed that the work is still in progress and the MMRDA has spent Rs 33.34 lakhs on it and yet the work is still incomplete. 

Anil Galgali in is comment has stated that at one end the MMRDA is claiming to create a Smart BKC but its own Office situated in BKC is not Smart. In a letter addressed to Chief Minister and MMRDA Chairman Devendra Fadnavis, Galgali has demanded that the project of converting it's headquarter as a smart Office be completed as soon as possible, which will facilitate the MMRDA Officers to sort out the problems of the citizens in a fast and efficient manner apart from making the Head quarters of MMRDA smart.

Monday, 18 September 2017

Cost escalation of Rs 166 crores for the Indu Mill Dr Babasaheb Ambedkar Memorial due to 23 months delay

In background of the Bihar Assembly Elections, Prime Minister of India Narendra Modi had done the bhoomi poojan of the Dr Babasaheb Ambedkar Memorial at the Indu Mill plot. But till date no activity has been started despite 23 months being elapsed since the bhoomi poojan. But the fallout of the delay has increased the proposed cost by Rs 166 crores. Presently the total cost is estimated to Rs 591 crores and the Architect, M/s Shashi Prabhu and Associates have been paid Rs 3.44 crores as per the information provided by MMRDA to RTI Activist Anil Galgali.

RTI Activist Anil Galgali had sought information from the MMRDA about the proposed Bharatratna Dr Babasaheb Ambedkar Memorial at Indu Mill. With the Bihar Assembly Elections looming large, the PM Narendra Modi had done the bhoomi poojan of the project and at that time it was announced that the estimated project cost would be Rs 425 crores. The MMRDA has informed Galgali that, the Indu Mill memorial plot size is 48414.83 sq metres and possession of the land is with the MMRDA on behalf of the state government since 25th March 2017. The tender was called for on 14th April 2017 on the basis of Design and Construction and once the tender process is completed the work will be started. The project cost is presently estimated to be Rs 591 crores. The MMRDA has appointed M/s Shashi Prabhu and Associates as Architect for the project and has paid them Rs 3.44 crores as consultancy for the project. The Bhoomi poojan was conducted on 11th October 2015 at the hands of PM Narendra Modi.

Anil Galgali in a statement has expressed regret that, though there was no preparation on planning done for the project, the bhoomi poojan was done only looking at the approaching Bihar Assembly Elections. The cost of the unplanned working has costed Rs 166 crores. The Central govt and the state government should take due precautions in future to ensure such losses due to escalation do not happen, demanded Anil Galgali.