Friday, 16 February 2018

मेडिकल वीजा की जानकारी देने से भारत और पाकिस्तान के संबंध बिगड़ेंगे

पाकिस्तान और भारत के बीच आपसी संबंध अत्याधिक बिगड़ने से गत साल के मई महीने में विदेश मंत्रालय ने नई पॉलिसी की घोषणा करते हुए भारत में इलाज लेने के लिए पाकिस्तानी नागरिकों को तब मेडिकल वीजा दिया जाएगा जब पाकिस्तान के विदेश मंत्री के सलाहकार सरताज अज़ीज़ की सिफारिश होगी। लेकिन आरटीआई कार्यकर्ता अनिल गलगली को दिए हुए जबाब से एक ही सवाल पूछा जा रहा हैं कि भारत या पाकिस्तान इस पॉलिसी का अनुपालन कर रही हैं या नहीं। भारतीय उच्चायोग, इस्लामाबाद ने गलगली द्वारा मांगी हुई जानकारी ख़ारिज करते हुए विचित्र तर्क दिया कि मेडिकल वीजा की जानकारी देने पर भारत और पाकिस्तान के बीच आपसी संबंध बिगड़ेंगे।

15 नवंबर 2017 को मुंबई के आरटीआई कार्यकर्ता अनिल गलगली ने विदेश मंत्रालय को 2 सवालों की जानकारी मांगी थी। इसमें 10 मई 2017 से 1 दिसंबर 2017 के दौरान कितने पाकिस्तानी नागरिकों को मेडिकल वीजा दिया गया और इसमें से कितने को पाकिस्तान के विदेश मंत्री के सलाहकार सरताज अज़ीज़ की सिफारिश थी।  दूसरे सवाल  में मौजूदा वीजा पॉलिसी में बदलाव की जानकारी मांगी थी। विदेश मंत्रालय ने हस्तांतरित किए अनिल गलगली के आवेदन पर जबाब देते हुए गृह मंत्रालय के विदेश विभाग ने बताया कि 380 पाकिस्तानी नागरिकों मेडिकल वीजा दिया गया हैं। वहीं दूसरे सवाल पर भारत सरकार ने सरकारी पॉलिसी में किसी भी तरह का बदलाव न करने की जानकारी दी। अज़ीज़ की सिफारिश पर कितने को मेडिकल वीजा दिया गया इसपर मौन साधा गया। गलगली ने प्रथम अपील दायर करते ही उनका आवेदन भारतीय उच्चायोग, इस्लामाबाद को हस्तांतरित किया गया। भारतीय उच्चायोग, इस्लामाबाद में द्वितीय राजकीय सचिव अविनाश कुमार सिंह ने अनिल गलगली की जानकारी को ख़ारिज करते हुए विचित्र तर्क दिया कि मेडिकल वीजा की जानकारी सार्वजनिक करने से भारत और पाकिस्तान के आपसी संबंध बिगड़ेंगे। 

मैने सिर्फ सिफारिश की जानकारी मांगी थी और उससे भारत और पाकिस्तान के आपसी संबंध कैसे बिगड़ेंगे? क्योंकि पॉलिसी सरकार ने खुद बनाई हैं, ऐसा सवाल करते हुए अनिल गलगली ने इन आंकडों को सरकार को खुद ब खुद सार्वजनिक करने की अपील सरकार से की हैं। भारत सरकार ने जिस पॉलिसी की घोषणा की हैं उसका अनुपालन पाकिस्ता ने नकारने से ही भारत सरकार जानकारी नहीं दे रही हैं।  पाकिस्तान और भारत के संबंध कभी भी सौहार्द के नहीं थे। इसलिए इस जानकारी से संबंध बिगड़ेंगे, यह तर्क हास्यापद होने की बात अनिल गलगली ने कही हैं।

Tuesday, 13 February 2018

मेडिकल वीजा की जानकारी देने से भारत और पाकिस्तान के संबंध बिगड़ेंगे

पाकिस्तान और भारत के बीच आपसी संबंध अत्याधिक बिगड़ने से गत साल के मई महीने में विदेश मंत्रालय ने नई पॉलिसी की घोषणा करते हुए भारत में इलाज लेने के लिए पाकिस्तानी नागरिकों को तब मेडिकल वीजा दिया जाएगा जब पाकिस्तान के विदेश मंत्री के सलाहकार सरताज अज़ीज़ की सिफारिश होगी। लेकिन आरटीआई कार्यकर्ता अनिल गलगली को दिए हुए जबाब से एक ही सवाल पूछा जा रहा हैं कि भारत या पाकिस्तान इस पॉलिसी का अनुपालन कर रही हैं या नहीं। भारतीय उच्चायोग, इस्लामाबाद ने गलगली द्वारा मांगी हुई जानकारी ख़ारिज करते हुए विचित्र तर्क दिया कि मेडिकल वीजा की जानकारी देने पर भारत और पाकिस्तान के बीच आपसी संबंध बिगड़ेंगे।

15 नवंबर 2017 को मुंबई के आरटीआई कार्यकर्ता अनिल गलगली ने विदेश मंत्रालय को 2 सवालों की जानकारी मांगी थी। इसमें 10 मई 2017 से 1 दिसंबर 2017 के दौरान कितने पाकिस्तानी नागरिकों को मेडिकल वीजा दिया गया और इसमें से कितने को पाकिस्तान के विदेश मंत्री के सलाहकार सरताज अज़ीज़ की सिफारिश थी।  दूसरे सवाल  में मौजूदा वीजा पॉलिसी में बदलाव की जानकारी मांगी थी। विदेश मंत्रालय ने हस्तांतरित किए अनिल गलगली के आवेदन पर जबाब देते हुए गृह मंत्रालय के विदेश विभाग ने बताया कि 380 पाकिस्तानी नागरिकों मेडिकल वीजा दिया गया हैं। वहीं दूसरे सवाल पर भारत सरकार ने सरकारी पॉलिसी में किसी भी तरह का बदलाव न करने की जानकारी दी। अज़ीज़ की सिफारिश पर कितने को मेडिकल वीजा दिया गया इसपर मौन साधा गया। गलगली ने प्रथम अपील दायर करते ही उनका आवेदन भारतीय उच्चायोग, इस्लामाबाद को हस्तांतरित किया गया। भारतीय उच्चायोग, इस्लामाबाद में द्वितीय राजकीय सचिव अविनाश कुमार सिंह ने अनिल गलगली की जानकारी को ख़ारिज करते हुए विचित्र तर्क दिया कि मेडिकल वीजा की जानकारी सार्वजनिक करने से भारत और पाकिस्तान के आपसी संबंध बिगड़ेंगे। 

मैने सिर्फ सिफारिश की जानकारी मांगी थी और उससे भारत और पाकिस्तान के आपसी संबंध कैसे बिगड़ेंगे? क्योंकि पॉलिसी सरकार ने खुद बनाई हैं, ऐसा सवाल करते हुए अनिल गलगली ने इन आंकडों को सरकार को खुद ब खुद सार्वजनिक करने की अपील सरकार से की हैं। भारत सरकार ने जिस पॉलिसी की घोषणा की हैं उसका अनुपालन पाकिस्ता ने नकारने से ही भारत सरकार जानकारी नहीं दे रही हैं।  पाकिस्तान और भारत के संबंध कभी भी सौहार्द के नहीं थे। इसलिए इस जानकारी से संबंध बिगड़ेंगे, यह तर्क हास्यापद होने की बात अनिल गलगली ने कही हैं।

मेडिकल व्हिसाची माहिती दिल्यास भारत आणि पाकिस्तानमधील संबंध बिघडतील 

पाकिस्तान आणि भारताचे आपसातील संबंध अत्याधिक बिघडल्याने गेल्या वर्षी मे महिन्यात विदेश मंत्रालयाने नवीन धोरणाची घोषणा करत भारतात उपचार घेण्यासाठी पाकिस्तानी नागरिकांना तेव्हाच मेडिकल व्हिसा दिला जाईल जे पाकिस्तानच्या विदेश मंत्र्यांचे सल्लागार सरताज अझीझ यांची शिफारस आणतील. पण आरटीआय कार्यकर्ते अनिल गलगली यांस दिलेल्या उत्तराने एकच सवाल विचारला जात आहे की भारत किंवा पाकिस्तान धोरणाचे पालन करत आहेत किंवा नाही. भारतीय उच्चायोग, इस्लामाबाद यांनी गलगली यांची मागणी फेटाळत विचित्र तर्क दिला की मेडिकल व्हिसाची माहिती दिल्यास भारत आणि पाकिस्तानमधील संबंध बिघडतील.

15 नोव्हेंबर 2017 रोजी मुंबईतील आरटीआय कार्यकर्ते अनिल गलगली यांनी विदेश मंत्रालयास 2 प्रश्नांची माहिती विचारली होती. यात 10 मे 2017 ते 1 डिसेंबर 2017 या दरम्यान किती पाकिस्तानी नागरिकांना मेडिकल व्हिसा देण्यात आला आणि यापैकी कितींना पाकिस्तानच्या विदेश मंत्र्यांचे सल्लागार सरताज अझीझ यांची शिफारस होती. दुसऱ्या प्रश्नात पाकिस्तानी नागरिकांना व्हिसा मंजूर करताना धोरण बदलण्याची माहिती मागितली होती. विदेश मंत्रालयाने हस्तांतरित केलेल्या अनिल गलगली यांच्या अर्जावर उत्तर देताना गृह मंत्रालयाच्या विदेश खात्याने कळविले की 380 पाकिस्तानी नागरिकांना मेडिकल व्हिसा देण्यात आला आहे. तर दुसऱ्या प्रश्नांवर भारत सरकारने धोरणात कोणताही बदल न केल्याची माहिती दिली. अझीझ यांच्या शिफारसीवर कितींना मेडिकल व्हिसा दिला गेला यावर मौन बाळगले गेल्यामुळे अनिल गलगली यांनी प्रथम अपील दाखल करताच त्यांचा अर्ज भारतीय उच्चायोग, इस्लामाबाद येथे हस्तांतरित केला गेला.

भारतीय उच्चायोग, इस्लामाबाद येथील द्वितीय राजकीय सचिव अविनाश कुमार सिंह यांनी अनिल गलगली यांची मागणी फेटाळत विचित्र तर्क दिला की मेडिकल व्हिसाची माहिती दिल्यास भारत आणि पाकिस्तानमधील संबंध बिघडतील.मी फक्त शिफारस बाबत माहिती विचारली होती आणि यामुळे भारत आणि पाकिस्तान मधील संबंध कसे बिघडतील? कारण धोरण सरकारने स्वतःच बनविले होते. असा सवाल विचारत अनिल गलगली यांनी आकडेवारी सरकारने स्वतःच सार्वजनिक करण्याचे आवाहन केले आहे.

भारत सरकार ने ज्या धोरणाची घोषणा केली त्याचे अनुपालन पाकिस्तानने नाकारले असून यामुळेच भारत सरकार माहिती देत नाही. पाकिस्तान आणि भारताचे संबंध कधीच एकोप्याचे नसून सदर माहितीमुळे बिघडतील ही बाब पटण्यासारखी नसल्याचे मत अनिल गलगली यांनी व्यक्त केले.

If information about granting Medical Visas to Pakistani citizens is disclosed, then it could affect relationship between India and Pakistan

In May last year amid worsening relations with Pakistan, the External Affairs Ministry announced a new policy whereby it would grant Pakistani citizens seeking medical visas to get treated in India only if they have  a recommending letter by Pakistan Foreign Minister Adviser Sartaj Aziz. A RTI query filed by Anil Galgali has however put question marks on whether Pakistan or even India is following this policy. High Indian High Commission in Islamabad infomed that ‘the disclosure of this affection would prejudicially affect relations with a foreign state ie pakistan. This information was being denied to Anil Galgali under Section 8 of the RTI act.

The External Affairs Ministry had in May last year announced the new rule after relations soured between the two countries after Pakistan announced that it had sentenced to death Kulbushan Jadhav, who it alleges it has caught for spying in Pakistan. On 15 November 2017 , a Mumbai based RTI activist Anil Galgali had asked two questions from the External Affairs Ministry seeking details of how many Pakistani nationals have been given medical visa since May 10, 2017 to December 1,2017 and how many of these have got recommendations letters from Sartaj Aziz. The second question pertained to whether the policy towards granting medical visas to Pakistani nationals has changed.

In a RTI dated 8th December the Ministry of Home Affairs  (Foreigners Division) to whom the query was forwarded by the External Affairs Ministry responded to him saying that while 380 Pakistani nationals were given medical visas for the above mentioned period.  Responding to his second query it said that the Indian government had not changed its policy on granting of medical visas to Pakistani nationals.

It however stayed silent on how many of the 380 Pak nationals that got medial visas had recommendation letters from Aziz. “ I wrote a letter to the External Affairs ministry saying that the queries that I had specifically asked were not addressed. In response I have got a letter from the High Indian High Commission in Islamabad in February that ‘the disclosure of this affection would prejudicially affect relations with a foreign state’ this information was being denied to me under Section 8 of the RTI act.”said Galgali.

Galgali added, “ I have just asked how many of these Pakistani nationals had recommendation letters. How will it affect relations with Pakistan, when you yourself have announced such a new rule..  Why is the government unable to give the figures? Will disclosures of this information already worsen the situation between our two countries from what it is currently.”questioned Galgali.

Anil Galgali claimed that he filed the RTI because he has got the information that while the Indian government announced the policy, the Pakistani government refused to give recommendation letters. “ This is why they are not giving the information because it would be a embarrassment to the government.”said Galgali.

Monday, 12 February 2018

रंगशारदा प्रतिष्ठान द्वारा किए गए म्हाडा जमीन के गैरइस्तेमाल पर जांच का प्रस्ताव सरकार ने अटकाया

नाटयमंदिर निर्माण के लिए म्हाडा ने ने दिए भूखंड पर हॉटेल और अन्य व्यवसायिक इस्तेमाल करनेवाली रंगशारदा प्रतिष्ठान की अनियमितता की जांच का प्रस्ताव सरकार ने अटकाने की जानकारी आरटीआई कार्यकर्ता अनिल गलगली को म्हाडा ने दिए हुए दस्तावेजों से स्पष्ट हो रही हैं। ताज्जुब की बात यह हैं कि 13 साल पहले मुंबई उच्च न्यायालय ने म्हाडा ने भाडेपट्टा करारनामा रद्द करने के आदेश को रद्द करते हुए उपाध्यक्ष या मुख्य कार्यकारी अधिकारी के समकक्ष अधिकारी से जांच करने के आदेश को नजरअंदाज किया गया। मराठी नाटक के लिए भूखंड का इस्तेमाल न करते हुए पंचतारांकित हॉटेल एवं उपहारगृह बनाने का मुख्य दोष लगाया हैं।  

आरटीआई कार्यकर्ता अनिल गलगली ने म्हाडा प्रशासन से रंगशारदा प्रतिष्ठान की अनियमितता को लेकर जांच के प्रस्ताव की जानकारी मांगी थी। म्हाडा के मुंबई मंडल ने अनिल गलगली को दिए दस्तावेजों से सनसनीखेज जानकारी सामने आयी हैं। म्हाडा प्राधिकरण ने  6 जुलाई 1981 को रंगशारदा प्रतिष्ठान के साथ 90 साल के लिए जमीन का लीज अग्रीमेंट किया था। हर  30 साल के बाद किराया के शुल्क में बदलाव करने करण्याचे निश्चित किया गया।  म्हाडा की किसी भी तरह की अनुमति लिए बिना रंगशारदा प्रतिष्ठान ने बरती अनियमितता को लेकर म्हाडा ने कारणे बताओ नोटीस जारी की लेकिन रंगशारदा प्रतिष्ठान के संबंधित लोगों ने जबाब देने के बजाय पलायन शुरु किया और प्रभुदास लोटिया ने म्हाडा द्वारा मांगे दस्तावेजों की पूर्तता नहीं की। 29 अक्टूबर 2014 को यह भूखंड सामाजिक इस्तेमाल न करते हुए व्यापारीकरण के लिए इस्तेमाल करने का दोष मुंबई मंडल के  मुख्य अधिकारी ने सुनवाई में लगाया था।  

भूखंड के 50 प्रतिशत क्षेत्र पर ड्रामा थिएटर से जुडी निर्माण काम न करते हुए असल में सिर्फ  26 प्रतिशत क्षेत्र पर ड्रामा थिएटर का निर्माण करने और शेष 74 प्रतिशत क्षेत्रफल का इस्तेमाल व्यापारीकरण के लिए करने से  रु 54,01,704/ इतनी रकम अदा करने का आदेश दिया। इसके अलावा दस्तावेज पेश न करने पर कुल 2120.60 क्षेत्र के लिए रु 1,62,32,790/- इतनी रकम ना आपत्ति प्रमाणपत्र शुल्क ऐसे कुल मिलाकर रु 2,16,34,494/- इतनी रकम अदा करने का आदेश दिया था। जिसके खिलाफ  24 जनवरी 2005 को म्हाडा उपाध्यक्ष के समक्ष हुई सुनवाई में लीज अग्रीमेंट रद्द करते हुए भूखंड म्हाडा के अधिकार में लेने का आदेश जारी किया। इस आदेश के खिलाफ रंगशारदा प्रतिष्ठान ने मुंबई उच्च न्यायालय में दायर याचिका की सुनवाई में दिनांक 4 मई 2005 को न्यायमुर्ती डॉ चंद्रचूड ने म्हाडा का आदेश रद्द किया और उपाध्यक्ष या मुख्य कार्यकारी अधिकारी के समकक्ष अधिकारी से जांच का आदेश दिया था लेकिन महाराष्ट्र सरकार ने गत 13 सालों से किसी भी तरह की अधिकृत भूमिका जाहीर नहीं की।द

मुंबई मंडल के मुख्य अधिकारी ने अनिल गलगली को बताया कि जांच अधिकारी नियुक्ति के मद्देनजर 30 मार्च 2016 और 30 दिसंबर 2017 को सरकार को जानकारी दी हैं। अनिल गलगली ने गत 13 साल से उच्च न्यायालय के आदेशानुसार कारवाई न करने वाले अधिकारियों पर कारवाई करने की मांग  मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को भेजे हुए पत्र में की हैं। साथ ही में जल्द से जल्द भूखंड सरकार के अधिकार में लेते हुए  वर्तमान में हॉटेल का लाइसेंस रद्द कर व्यवसायीकरण उसे बंद करने की मांग की हैं। सरकार भूखंड को अपने अधिकार में लेते हुए मराठी भाषा और ड्रामा के लिए भव्य ड्रामा थिएटर निर्माण कर नाटक प्रेमियों के लिए सुअवसर प्राप्त होगा, ऐसा मत अनिल गलगली ने व्यक्त किया हैं।

रंगशारदा प्रतिष्ठानाच्या अनियमितताबाबत चौकशीचा प्रस्ताव शासनाने लटकविला

नाटयमंदिर बांधण्यासाठी म्हाडाने दिलेल्या भूखंडावर हॉटेल आणि अन्य व्यवसायिक वापर करणाऱ्या रंगशारदा प्रतिष्ठानाच्या अनियमितताबाबत चौकशीचा प्रस्ताव शासनाने लटकविला असल्याची माहिती आरटीआय कार्यकर्ते अनिल गलगली यांस म्हाडाने दिलेल्या कागदपत्रावरुन स्पष्ट होत आहे. विशेष म्हणजे 13 वर्षांपूर्वी मुंबई उच्च न्यायालयाने म्हाडाने भाडेपट्टा करारनामा रद्द करणेबाबत आदेश रद्द करत उपाध्यक्ष किंवा मुख्य कार्यकारी अधिकारी यांच्या समकक्ष अधिका-यांमार्फत चौकशीचे दिलेल्या आदेशाकडे दुर्लक्ष केले गेले आहे. मराठी नाटकासाठी जागेचा वापर न करता पंचतारांकित हॉटेल व उपहारगृह बांधण्यासाठी केल्याचा मुख्य ठपका आहे.

आरटीआय कार्यकर्ते अनिल गलगली यांनी म्हाडा प्रशासनाकडे रंगशारदा प्रतिष्ठानाच्या अनियमितताबाबत चौकशीचा प्रस्ताव बाबत माहिती मागितली होती. म्हाडाच्या मुंबई मंडळाने अनिल गलगली यांस दिलेल्या कागदपत्रात धक्कादायक माहिती समोर आली.म्हाडा प्राधिकरणाने  6 जुलै 1981 रोजी रंगशारदा प्रतिष्ठानासोबत 90 वर्ष कालावधीकरिता भूभाडे करारनामा केला. प्रत्येक 30 वर्षांनंतर भूभाडे शुल्कात बदल करण्याचे निश्चित करण्यात आले. म्हाडाची कोणतीही परवानगी न घेता रंगशारदा प्रतिष्ठानाने केलेली अनियमितता बाबत म्हाडाने कारणे दाखवा नोटीस बजावली पण रंगशारदा प्रतिष्ठान संबंधित व्यक्तींनी पळवाट सुरु केली आणि प्रभुदास लोटिया यांनी म्हाडातर्फे मागितलेल्या कागदपत्रांची पूर्तता केली नाही. 29 ऑक्टोबर 2014 रोजी सदर भूखंड सामाजिक वापरात न आणता व्यापारीकरणासाठी केल्याचा ठपका मुंबई मंडळाचे मुख्य अधिकारी यांनी सुनावणीत ठेवला. 

भूखंडाच्या 50 टक्के क्षेत्रावर ड्रामा थिएटरशी निगडित बांधकाम न करता प्रत्यक्षात फक्त 26 टक्के क्षेत्रावर ड्रामा थिएटर बांधल्याने व उर्वरित 74 टक्के क्षेत्रफळाचा वापर व्यापारीकरणासाठी करत असल्याने रु 54,01,704/ इतक्या रकमेचा भरणा करण्याचे आदेश दिले. तसेच कागदपत्रे सादर न केल्यामुळे प्रचलित धोरणाप्रमाणे एकूण 2120.60 क्षेत्राकरिता रु 1,62,32,790/- इतकी रक्कम ना हरकत प्रमाणपत्र शुल्क अशी एकंदर रु 2,16,34,494/- इतक्या रक्कमेचा भरणा करण्याचे आदेश दिले ज्या विरोधात 24 जानेवारी 2005 रोजी म्हाडा उपाध्यक्ष यांच्या समोर झालेल्या सुनावणीत करारनामा रद्द करत भूखंड ताब्यात घेण्याचे आदेश जारी केले. या आदेशाविरोधात रंगशारदा प्रतिष्ठानाने मुंबई उच्च न्यायालयात दाखल केलेल्या याचिकेत दिनांक 4 मे 2005 रोजी न्यायमुर्ती डॉ चंद्रचूड यांनी म्हाडाचे आदेश रद्द केले आणि उपाध्यक्ष किंवा मुख्य कार्यकारी अधिकारी यांच्या समकक्ष अधिका-यांमार्फत चौकशीचे आदेश दिले होते ज्यावर महाराष्ट्र शासनाने गेल्या 13 वर्षांपासून कोणतीही अधिकृत भूमिका जाहीर केली नाही.

मुंबई मंडळाचे मुख्य अधिकारी यांनी अनिल गलगली यांस कळविले आहे की चौकशी अधिकारी नेमण्याच्या अनुषंगाने 30 मार्च 2016 आणि 30 डिसेंबर 2017 रोजी शासनास अवगत केले आहे. अनिल गलगली यांनी गेल्या 13 वर्षांपासून उच्च न्यायालयाच्या आदेशानुसार कारवाई न करणाऱ्या अधिकारीवर्गावर कारवाई करण्याची मागणी मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस यांस केली आहे तसेच लवकरात लवकर सदर भूखंड शासनाच्या ताब्यात घेत सद्यस्थितीत हॉटेल परवाना रद्द करत व्यापारीकरणावर बंदी घालण्याची मागणी केली आहे. शासनाने भूखंड ताब्यात घेत मराठी भाषा आणि नाटकांसाठी भव्य नाट्यगृह बांधल्यास नाटक प्रेमीसाठी एक चांगली संधी उपलब्ध होईल, असे मत अनिल गलगली यांनी व्यक्त केले आहे.

The Government has halted the proposal for an inquiry into the irregularities of Rangsharda Pratishthan

RTI activist Anil Galgali has received information from that MHADA has halted the inquiry for the government proposes to investigate the irregularities of Rang Sharda Pratishthan for its illegal use of hotels and other commercial activities on the plot given by MHADA to build theater which was allotted by Mhada to Rang Sharda Pratishthan for the construction of Drama Theatre for Marathi Musical Play .  Specifically, 13 years ago, Bombay High Court quashed the order about the cancellation of lease deed by MHADA, and further gave directives that to investigate the irregularities done by the Rang Sharda Pratishthan by appointing  the officers equivalent of the Vice President or Chief Executive Officer of MHADA, however MHADA officers are purposefully  ignoring the said directives given by the Bombay High Court. It is pertinently to note that the said plot has never been used for theatre for the Marathi Drama however it is being used for three star Hotel and Restaurant and other commercial activities.   

RTI activist Anil Galgali had asked the MHADA administration to inquire and  investigate of irregularities by  Rangsharda Pratishthan. Upon documents revealed by MHADA to Anil Galgali it was very shocking information that MHADA Mumbai Board has allotted plot on lease for the 90 years to be renewed every 30 years to Rang Sharda Pratishthan and further signed lease deed on 6.07.1981. MHADA issued show-cause notices for the irregularities done by the Rangsharda Pratishthan without taking any permission from the MHADA, but Rang Sharda Pratishthan and Builder Prabhudas Lotia did not fulfill the documents sought by MHADA and tried to find out loopholes on the Lease deed of MHADA.  On October 29, 2014 Chief Officer Mumbai Board MHADA, in the hearing blamed Rang Sharda Pratishthan for the said Plot is exploited for the commercial activity as against social use for which land is allotted at concessional rate.

Instead of constructing at least 50% area of land plot for the construction of a drama theater  only 26% area was  constructed for drama theater and remaining 74% area is used for commercial purposes, hence Mhada Order to pay Rs. 54,01,704 /- for commercial area utilization of 2120 Sq. Mtr. Similarly, as per the prevailing policy for non-objection certificate, due to non-submission of documents Rs. 1,62,32,790 / total amount of Rs. 2,16,34,494 / - asked to pay to MHADA.  In the hearing on 24 January 2005, against the said Order in front of the Vice President of MHADA, the Order was taken to take possession of the land and cancelled the Lease Deed of Rang Sharda Pratishthan. Against the MHADA order writ petition was filed by Rang Sharda Pratishthan in the Bombay High Court, which was duly canceled by the Justice Chandrachud on May 4, 2005 and  has clearly given the direction in his order that that to assign the proceeding to an officer of a rank equivalent to the Vice President or Chief Executive Officer rank for the fresh determination of the case the present case and proceedings. However on this order Government of Maharashtra has not declared any official role for the past 13 years. 

Chief Executive Officer of Mumbai Board has informed Anil Galgali that on 30 March 2016 and 30th December 2017, that MHADA has further informed to the Government for the appointment to the inquiry officer. Anil Galgali has also asked Chief Minister Devendra Fadnavis to take action against the officials who did not take action as per  the High Court order for the last 13 years. As well as demand for stop misuse of commercialization at the earliest and government should take  possession of the of the land immediately by cancelling the Hotel License. Anil Galgali further said that if the government takes possession of the plot and build a grand theater for the Marathi language then in that case there will be a great opportunity for the drama lovers.